धारा 85-86 BNS बनाम धारा 498A IPC: किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता (Cruelty by husband or relatives)
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय (Cognizable - if informed by relative/police protocol)
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती (Non-bailable) - Arrest guidelines apply
समझौता योग्य (Compoundable
शमनीय (कुछ राज्यों में न्यायालय की अनुमति से अमेंडमेंट द्वारा)
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 498A
BNS (नया कानून)
धारा 85, 86
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
दहेज प्रताड़ना व घरेलू हिंसा! (Dowry & Cruelty-498A)। भारत में यह महिलाओं की रक्षा करने वाली सबसे ज़्यादा चर्चित और इस्तेमाल होने वाली धारा है (इसे आम भाषा में 498A कहते हैं)। अगर शादी के बाद पति या सास-ससुर, ननद मिलकर बहू को 'दहेज (Dowry)' के लिए पीटते हैं (Physical), ताने मारते हैं (Mental torture) या आत्महत्या के लिए मजबूर करते हैं (Cruelty)। तो उन सभी रिश्तेदारों पर IPC 498A (नया BNS 85) का गैर-जमानती मुकद्दमा दर्ज होता है, जिसमें 3 साल की सजा है। नए कानून BNS 86 में 'क्रूरता' को बहुत अच्छी तरह से पारिभाषित किया गया है।
तुलना
Iconic Section Moved: 498A (दहेज प्रताड़ना) को अब BNS 85 के रूप में नंबर दिया गया है। सजा 3 वर्ष ही है। इसके दुरुपयोग (Misuse) को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अरेस्ट गाइडलाइंस (Arnesh Kumar judgement) अभी भी लागू रहेंगे।