अध्याय 1
CrPC Section 1 in Hindi: संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
धारा 1 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 है।
(2) इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है:
परंतु इस संहिता के अध्याय 8, अध्याय 10 और अध्याय 11 से संबंधित उपबंधों के सिवाय इसके उपबंध—
(क) नागालैंड राज्य को;
(ख) जनजाति क्षेत्रों को लागू नहीं होंगे:
परंतु यह और कि संबंधित राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसे उपबंधों या उनमें से किसी को ऐसे अनुपूरक, आनुषंगिक या पारिणामिक उपान्तरणों सहित, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, नागालैंड राज्य के संपूर्ण या किसी भाग को या यथास्थिति, ऐसे जनजाति क्षेत्रों को लागू कर सकेगी।
(3) यह 1 अप्रैल, 1974 को प्रवृत्त होगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 1(2) – विस्तार और लागू होना
यह उप-धारा दंड प्रक्रिया संहिता की भौगोलिक पहुंच को परिभाषित करती है, इसे नागालैंड राज्य और जनजाति क्षेत्रों से संबंधित विशेष प्रावधानों को छोड़कर, पूरे देश में विस्तारित करती है। यह निर्दिष्ट करती है कि कुछ अध्याय (जैसे सार्वजनिक व्यवस्था और निवारक कार्रवाई पर) इन विशेष क्षेत्रों में स्वतः लागू नहीं होते हैं, लेकिन राज्य सरकार द्वारा आवश्यक संशोधनों के साथ लागू किए जा सकते हैं।
Landmark Judgements
नागालैंड राज्य बनाम रतन सिंह (2019):
उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय ने नागालैंड में दंड प्रक्रिया संहिता के लागू होने को स्पष्ट किया, विशेष रूप से यह दोहराते हुए कि अध्याय VIII, X और XI (क्रमशः शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और पुलिस द्वारा निवारक कार्रवाई से संबंधित) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 1(2) के परंतुक के अनुसार नागालैंड राज्य पर स्वतः लागू नहीं होते हैं। न्यायालय ने नागालैंड के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधानों और ऐतिहासिक संदर्भ पर जोर दिया।
भारत संघ बनाम आर.एस. डोलिया (2012):
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 1(2) के दूसरे परंतुक के दायरे की जांच की। इसने संबंधित राज्य सरकार की दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों को जनजाति क्षेत्रों में आवश्यक समझे जाने वाले संशोधनों के साथ लागू करने की शक्ति की पुष्टि की, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान किया जाए जबकि सामान्य कानून के क्रमिक विस्तार की अनुमति भी हो।