अध्याय VII
CrPC Section 100 in Hindi: बंद स्थान के भारसाधक व्यक्ति तलाशी लेने देंगे
New Law Update (2024)
धारा 103 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जब कभी इस अध्याय के अधीन तलाशी या निरीक्षण के लिए दायी कोई स्थान बंद हो, तब उसमें निवास करने वाला या उसका भारसाधक कोई व्यक्ति, वारंट का निष्पादन करने वाले अधिकारी या अन्य व्यक्ति की मांग पर और वारंट के पेश किए जाने पर, उसे उसमें निर्बाध प्रवेश करने देगा और वहां तलाशी के लिए सभी उचित सुविधाएं प्रदान करेगा।
(2) यदि ऐसे स्थान में प्रवेश इस प्रकार प्राप्त नहीं किया जा सकता है, तो वारंट का निष्पादन करने वाला अधिकारी या अन्य व्यक्ति धारा 47 की उपधारा (2) द्वारा उपबंधित रीति से कार्यवाही कर सकेगा।
(3) जहां ऐसे स्थान में या उसके आसपास के किसी व्यक्ति पर यह उचित रूप से संदेह किया जाता है कि उसने अपने शरीर पर कोई ऐसी चीज छिपा रखी है जिसकी तलाशी ली जानी चाहिए, वहां ऐसे व्यक्ति की तलाशी ली जा सकती है और यदि ऐसा व्यक्ति कोई स्त्री है, तो तलाशी किसी अन्य स्त्री द्वारा शालीनता का कड़ाई से ध्यान रखते हुए की जाएगी।
(4) इस अध्याय के अधीन तलाशी करने से पहले, उसे करने वाला अधिकारी या अन्य व्यक्ति उस मुहल्ले के जिसमें तलाशी किया जाने वाला स्थान स्थित है, या किसी अन्य मुहल्ले के (यदि उक्त मुहल्ले का ऐसा कोई निवासी उपलब्ध नहीं है या तलाशी का साक्षी होने को इच्छुक नहीं है) दो या अधिक स्वतंत्र और प्रतिष्ठित निवासियों को उपस्थित होने और तलाशी को देखने के लिए बुलाएगा और उन्हें या उनमें से किसी को ऐसा करने के लिए लिखित आदेश दे सकेगा।
(5) तलाशी उनकी उपस्थिति में की जाएगी, और ऐसी तलाशी के अनुक्रम में अभिगृहीत सब चीजों की और उन स्थानों की जहां वे क्रमशः पाई गई हैं, एक सूची ऐसे अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा तैयार की जाएगी और ऐसे साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित की जाएगी; किंतु इस धारा के अधीन तलाशी के साक्षी किसी व्यक्ति को न्यायालय में तलाशी के साक्षी के रूप में उपस्थित होने के लिए तब तक अपेक्षित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे विशेष रूप से सम्मन न किया गया हो।
(6) तलाशी किए गए स्थान के अधिभोगी को या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को हर दशा में तलाशी के दौरान उपस्थित रहने दिया जाएगा और इस धारा के अधीन तैयार की गई सूची की एक प्रति, उक्त साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित करके, ऐसे अधिभोगी या व्यक्ति को परिदत्त की जाएगी।
(7) जब किसी व्यक्ति की उपधारा (3) के अधीन तलाशी ली जाती है, तब कब्जे में ली गई सब चीजों की एक सूची तैयार की जाएगी और उसकी एक प्रति ऐसे व्यक्ति को परिदत्त की जाएगी।
(8) कोई व्यक्ति जो, किसी युक्तियुक्त हेतुक के बिना, इस धारा के अधीन तलाशी में उपस्थित होने और साक्षी होने से इनकार या उपेक्षा करता है, जब उसे ऐसा करने के लिए लिखित आदेश द्वारा जो उसे परिदत्त या निविदत्त किया गया है, बुलाया जाता है, तो यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 187 के अधीन अपराध किया है।
Important Sub-Sections Explained
धारा 100(4)
यह उपधारा किसी भी तलाशी के दौरान मुहल्ले से कम से कम दो स्वतंत्र और प्रतिष्ठित साक्षियों की उपस्थिति को अनिवार्य करती है। जांच अधिकारियों द्वारा कदाचार को रोकने के लिए तलाशी को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाना सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
धारा 100(6)
यह प्रावधान तलाशी किए जा रहे स्थान के अधिभोगी, या उनकी ओर से किसी व्यक्ति को, पूरी तलाशी के दौरान उपस्थित रहने का अधिकार प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, जब्त की गई वस्तुओं की सूची की एक प्रति, साक्षियों द्वारा हस्ताक्षरित, अधिभोगी को प्रदान की जानी चाहिए, जिससे जवाबदेही बढ़ती है और उनके हितों की रक्षा होती है।
Landmark Judgements
पंजाब राज्य बनाम बलबीर सिंह (1994):
इस ऐतिहासिक उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के प्रावधानों की अनिवार्य प्रकृति को रेखांकित किया, विशेषकर तलाशी के दौरान स्वतंत्र साक्षियों की आवश्यकता के संबंध में। इसने इस बात पर जोर दिया कि इन प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों से किसी भी विचलन को अभियोजन पक्ष द्वारा समझाया जाना चाहिए, और गैर-अनुपालन तलाशी को अवैध बना सकता है, जिससे जब्त किए गए साक्ष्य की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
पी.पी. फातिमा बनाम केरल राज्य (2000):
इस मामले में केरल उच्च न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के साथ आवश्यक सख्त अनुपालन को दोहराया। इसने स्वतंत्र साक्षियों की उपस्थिति में पंचनामा (जब्त की गई वस्तुओं की सूची) तैयार करने और अधिभोगी को उसकी एक प्रति परिदत्त करने के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो और झूठे फंसाने को रोका जा सके।