अध्याय 7क
CrPC Section 105C in Hindi: संपत्ति की कुर्की या समपहरण के आदेशों के संबंध में सहायता
New Law Update (2024)
धारा 92 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जहां भारत में किसी न्यायालय के पास यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि किसी व्यक्ति द्वारा अर्जित कोई संपत्ति, ऐसे व्यक्ति द्वारा किसी अपराध के किए जाने से प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः व्युत्पन्न या अर्जित की गई है, वहां वह ऐसी संपत्ति की कुर्की या समपहरण का आदेश कर सकेगा, जैसा वह धारा 105घ से 105ञ (दोनों सम्मिलित) के उपबंधों के अधीन ठीक समझे।
(2) जहां न्यायालय ने उपधारा (1) के अधीन किसी संपत्ति की कुर्की या समपहरण के लिए आदेश किया है, और ऐसी संपत्ति किसी संविदाकारी राज्य में होने का संदेह है, वहां न्यायालय ऐसे आदेश के निष्पादन के लिए संविदाकारी राज्य में किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध पत्र जारी कर सकेगा।
(3) जहां संविदाकारी राज्य में किसी न्यायालय या प्राधिकारी से केन्द्रीय सरकार को भारत में उस संपत्ति की कुर्की या समपहरण का अनुरोध करने वाला अनुरोध पत्र प्राप्त होता है, जो उस संविदाकारी राज्य में किए गए किसी अपराध के किए जाने से किसी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः व्युत्पन्न या अर्जित की गई है, वहां केन्द्रीय सरकार ऐसे अनुरोध पत्र को, जैसा वह ठीक समझे, धारा 105घ से 105ञ (दोनों सम्मिलित) के उपबंधों के अनुसार या, यथास्थिति, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अनुसार निष्पादन के लिए न्यायालय को भेज सकेगी।
Important Sub-Sections Explained
धारा 105ग(2)
यह उपधारा भारतीय न्यायालय को, किसी अपराध से प्राप्त संपत्ति की कुर्की या समपहरण का आदेश देने के बाद, एक औपचारिक अनुरोध विदेशी संविदाकारी राज्य को भेजने के लिए सशक्त करती है, यदि संपत्ति वहां स्थित होने का विश्वास है, उनके आदेश के निष्पादन में सहायता की मांग करते हुए।
धारा 105ग(3)
यह उपधारा विदेशी संविदाकारी राज्यों से प्राप्त अनुरोधों को संभालने की प्रक्रिया को रेखांकित करती है, जहां केंद्रीय सरकार भारत में स्थित अपराध-संबंधी संपत्ति की कुर्की या समपहरण के लिए उनके अनुरोधों को संबंधित कानूनों के तहत निष्पादन के लिए एक उपयुक्त भारतीय न्यायालय को अग्रेषित करती है।