अध्याय 7क
CrPC Section 105H in Hindi: कुछ मामलों में संपत्ति का समपहरण
New Law Update (2024)
धारा 109 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियागत – साक्ष्य / साक्षी
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) न्यायालय, धारा 105छ के अधीन जारी किए गए हेतुक-दर्शन सूचना के, यदि कोई हो, स्पष्टीकरण पर और अपने समक्ष उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के पश्चात् और व्यथित व्यक्ति को (और ऐसे मामले में जहां व्यथित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धारण करता है, वहां ऐसे अन्य व्यक्ति को भी) सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात्, आदेश द्वारा, यह निष्कर्ष लेखबद्ध कर सकेगा कि प्रश्नगत सभी या कोई संपत्तियां अपराध की आय हैं: परंतु यदि व्यथित व्यक्ति (और ऐसे मामले में जहां व्यथित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धारण करता है, वहां ऐसे अन्य व्यक्ति भी) हेतुक-दर्शन सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर न्यायालय के समक्ष हाजिर नहीं होता या अपना मामला उसके समक्ष प्रस्तुत नहीं करता है, तो न्यायालय इस उपधारा के अधीन निष्कर्ष को अपने समक्ष उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर एकपक्षीय रूप से लेखबद्ध करने के लिए अग्रसर हो सकेगा।
(2) जहां न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि हेतुक-दर्शन सूचना में निर्दिष्ट कुछ संपत्तियां अपराध की आय हैं किंतु ऐसी संपत्तियों को विशिष्ट रूप से अभिनिर्धारित करना संभव नहीं है, तब, न्यायालय के लिए ऐसी संपत्तियों को विनिर्दिष्ट करना विधिपूर्ण होगा जो उसके सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार अपराध की आय हैं और उपधारा (1) के अधीन तदनुसार निष्कर्ष लेखबद्ध करेगा।
(3) जहां न्यायालय इस धारा के अधीन इस प्रभाव का निष्कर्ष लेखबद्ध करता है कि कोई संपत्ति अपराध की आय है, वहां ऐसी संपत्ति सभी विल्लंगमों से मुक्त होकर केंद्रीय सरकार में समपहृत हो जाएगी।
(4) जहां किसी कंपनी के शेयर इस धारा के अधीन केंद्रीय सरकार में समपहृत हो जाते हैं, तब, कंपनी, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) या कंपनी के संगम-अनुच्छेदों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, तत्काल केंद्रीय सरकार को ऐसे शेयरों के अंतरिती के रूप में रजिस्टर करेगी।
Important Sub-Sections Explained
धारा 105एच(1)
यह उपधारा न्यायालय को यह अवधारित करने का अधिकार देती है कि क्या संपत्तियां अपराध की आय हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रभावित व्यक्ति या उसकी ओर से संपत्ति धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिले। यह एकपक्षीय आदेशों की भी अनुमति देता है यदि हेतुक-दर्शन सूचना प्राप्तकर्ता तीस दिनों के भीतर जवाब देने में विफल रहता है।
धारा 105एच(3)
यह उपधारा इस निष्कर्ष के महत्वपूर्ण परिणाम को निर्दिष्ट करती है कि संपत्ति अपराध की आय है। न्यायालय द्वारा ऐसे निर्धारण पर, संपत्ति तत्काल केंद्रीय सरकार में समपहृत हो जाती है, जो किसी भी मौजूदा विल्लंगम से मुक्त होती है।
Landmark Judgements
पी.पी. अब्दुल्ला और अन्य बनाम सीमा शुल्क निरीक्षक, सीमा शुल्क गृह, कोचीन (2012):
केरल उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय VII-A के प्रक्रियात्मक पहलुओं को स्पष्ट किया, जिसमें धारा 105एच भी शामिल है। इसमें समपहरण का आदेश देने से पहले हेतुक-दर्शन सूचना जारी करने और प्रभावित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करने की अनिवार्य आवश्यकता पर बल दिया गया, जिससे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों को कायम रखा गया।
भारत संघ बनाम पदम नारायण गुप्ता (2008):
यद्यपि यह मुख्य रूप से SAFEMA से संबंधित था, इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के समपहरण के संबंध में महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित किए। इसने सबूत के बोझ और संपत्ति तथा उसके अवैध स्रोत के बीच एक स्पष्ट संबंध की आवश्यकता को स्पष्ट किया, जो धारा 105एच दंड प्रक्रिया संहिता के तहत ‘अपराध की आय’ पर सादृश्य से लागू होने वाली मूलभूत अवधारणाएं हैं।