अध्याय 8
CrPC Section 111 in Hindi: आदेश का दिया जाना
New Law Update (2024)
धारा 125 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
जब धारा 107, धारा 108, धारा 109 या धारा 110 के अधीन कार्य करने वाले किसी मजिस्ट्रेट को यह आवश्यक प्रतीत हो कि किसी व्यक्ति से ऐसी धारा के अधीन कारण दर्शित करने की अपेक्षा की जाए, तब वह लिखित आदेश देगा, जिसमें प्राप्त इत्तिला का सार, निष्पादित किए जाने वाले बंधपत्र की रकम, वह अवधि जिसके लिए वह प्रवर्तन में रहेगा, और यदि कोई प्रतिभू अपेक्षित हों तो उनकी संख्या, स्वरूप और वर्ग कथित होंगे।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
मधु लिमये बनाम एस.डी.एम., मुंगेर (1971):
उच्चतम न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने निवारक धाराओं (107-110) के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों को स्पष्ट किया, इस बात पर जोर देते हुए कि मजिस्ट्रेट को यांत्रिक रूप से कार्य नहीं करना चाहिए, बल्कि न्यायिक विवेक का प्रयोग करना चाहिए, निश्चित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कारण बताओ सूचना अस्पष्ट न हो। धारा 111 के अधीन आदेश में व्यक्ति को अपना बचाव तैयार करने में सक्षम बनाने के लिए ‘सूचना का सार’ होना चाहिए।
गोपाल चंद्र माझी बनाम राज्य (1978):
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दोहराया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 111 के अधीन एक आदेश में विशेष रूप से निष्पादित किए जाने वाले बंधपत्र की रकम, वह अवधि जिसके लिए वह प्रवर्तन में रहेगा, और यदि आवश्यक हो तो प्रतिभूतियों की संख्या, स्वरूप और वर्ग से संबंधित विवरण निर्दिष्ट होने चाहिए। इन विवरणों का कोई भी लोप आदेश को त्रुटिपूर्ण बना सकता है।