अध्याय 10
CrPC Section 142 in Hindi: जांच लंबित रहने तक व्यादेश
New Law Update (2024)
धारा 159 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
परिभाषात्मक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) धारा 133 के अधीन आदेश करने वाला कोई मजिस्ट्रेट यदि यह समझता है कि जनता को आसन्न खतरे या गंभीर प्रकार की क्षति को रोकने के लिए तत्काल उपाय किए जाने चाहिए तो वह उस व्यक्ति को जिसके विरुद्ध आदेश किया गया था, ऐसा व्यादेश दे सकता है जो मामले के अवधारण लंबित रहने तक ऐसे खतरे या क्षति को टालने या रोकने के लिए अपेक्षित हो।
(2) यदि ऐसा व्यक्ति ऐसे व्यादेश का तुरंत पालन करने में चूक करता है तो मजिस्ट्रेट ऐसे खतरे को टालने या ऐसी क्षति को रोकने के लिए स्वयं ऐसे साधनों का प्रयोग कर सकता है या करवा सकता है जिन्हें वह ठीक समझता है।
(3) इस धारा के अधीन किसी मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक की गई किसी भी बात के बारे में कोई वाद नहीं चलेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 142(1)
यह उप-धारा एक मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल व्यादेश जारी करने का अधिकार देती है, यदि जनता को आसन्न खतरा या गंभीर क्षति हो, जो धारा 133 दं.प्र.सं. के तहत शुरू की गई लोक न्यूसेंस मामले की पूर्ण जांच लंबित रहने तक आवश्यक हो। यह लोक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप की तत्काल प्रकृति को उजागर करती है।
धारा 142(3)
यह उप-धारा एक मजिस्ट्रेट को विधिक संरक्षण प्रदान करती है, जिसमें कहा गया है कि धारा 142 के अधीन सद्भावपूर्वक की गई किसी भी कार्रवाई के लिए उनके विरुद्ध कोई वाद दायर नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि मजिस्ट्रेट बाद में होने वाले मुकदमे के डर के बिना खतरे को रोकने के लिए निर्णायक रूप से कार्य कर सकें, बशर्ते उनके कार्य सद्भावपूर्ण हों।