अध्याय XII
CrPC Section 165 in Hindi: पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी
New Law Update (2024)
धारा 185 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – संज्ञान
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जब कभी किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को या अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी को यह विश्वास करने का उचित आधार है कि किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, आवश्यक कोई चीज उस पुलिस थाने की सीमाओं के अंदर किसी स्थान में पाई जा सकती है, जिसका वह भारसाधक है, या जिससे वह संलग्न है, और उसकी राय में ऐसी चीज अवांछित विलंब के बिना अन्यथा प्राप्त नहीं की जा सकती है, तब ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को लिखित रूप में अभिलिखित करने और ऐसी लिखित में, यथासंभव, उस चीज को विनिर्दिष्ट करने के पश्चात्, जिसकी तलाशी की जानी है, उस थाने की सीमाओं के भीतर किसी स्थान में ऐसी चीज की तलाशी ले सकता है या तलाशी करा सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य हो, तो स्वयं तलाशी लेगा।
(3) यदि वह स्वयं तलाशी लेने में असमर्थ है, और उस समय तलाशी लेने में सक्षम कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित नहीं है, तो वह ऐसा करने के अपने कारणों को लिखित रूप में अभिलिखित करने के पश्चात्, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से तलाशी लेने की अपेक्षा कर सकता है, और वह ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को एक लिखित आदेश देगा, जिसमें तलाशी लिए जाने वाले स्थान को और, यथासंभव, उस चीज को विनिर्दिष्ट किया जाएगा, जिसकी तलाशी की जानी है; और ऐसा अधीनस्थ अधिकारी तदुपरांत उस स्थान में ऐसी चीज की तलाशी ले सकता है।
(4) तलाशी वारंटों के बारे में इस संहिता के उपबंध और धारा 100 में अंतर्विष्ट तलाशी के बारे में साधारण उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा के अधीन की गई तलाशी को लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन किए गए किसी भी अभिलेख की प्रतियां अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त निकटतम मजिस्ट्रेट को तुरंत भेजी जाएंगी, और तलाशे गए स्थान के मालिक या अधिभोगी को, आवेदन करने पर, मजिस्ट्रेट द्वारा उसकी एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
Important Sub-Sections Explained
धारा 165(1)
यह उपधारा अन्वेषण के दौरान वारंट के बिना तलाशी लेने की पुलिस अधिकारी की प्राथमिक शक्ति को रेखांकित करती है। यह अनिवार्य करती है कि अधिकारी के पास यह विश्वास करने के उचित आधार होने चाहिए कि आवश्यक साक्ष्य मौजूद है और कार्यवाही करने से पहले इन आधारों को लिखित रूप में अभिलिखित करना होगा, जिसमें तलाशी की जाने वाली वस्तु को विनिर्दिष्ट किया जाएगा।
धारा 165(4)
यह महत्वपूर्ण उपधारा सुनिश्चित करती है कि धारा 165 के तहत की गई कोई भी तलाशी संहिता में अन्यत्र पाए जाने वाले तलाशी और तलाशी वारंटों के सामान्य प्रावधानों का पालन करे, विशेष रूप से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 का, जिससे तलाशी लिए गए व्यक्तियों और परिसरों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय शामिल किए जा सकें।
Landmark Judgements
पंजाब राज्य बनाम बलबीर सिंह (1994):
इस ऐतिहासिक मामले ने तलाशी और अभिग्रहण के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की अनिवार्य प्रकृति पर जोर दिया, भले ही वे विशेष कानूनों के तहत किए गए हों। इसने इस बात पर बल दिया कि धारा 165 जैसे प्रावधानों का कड़ाई से पालन व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और गैर-अनुपालन तलाशी की वैधता और साक्ष्य की स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकता है।
राजस्थान राज्य बनाम दौलत राम (1980):
इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्धारित किया कि किसी पुलिस अधिकारी के लिए वारंट के बिना तलाशी लेने से पहले अपने विश्वास के आधारों को लिखित रूप में अभिलिखित करने की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 165(1) के तहत आवश्यकता अनिवार्य है। ऐसे आधारों को अभिलिखित करने में विफलता तलाशी को अवैध और अनियमित बनाती है।