अध्याय XIV
CrPC Section 191 in Hindi: अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण
New Law Update (2024)
धारा 196 बीएनएसएस
TRIAL COURT
मजिस्ट्रेट
Punishment
प्रक्रियात्मक – संज्ञान
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
जब कोई मजिस्ट्रेट धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन किसी अपराध का संज्ञान करता है तब अभियुक्त को, कोई साक्ष्य लिए जाने से पहले, इत्तिला दी जाएगी कि वह मामले की जांच या उसका विचारण किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा कराने का हकदार है और यदि अभियुक्त या अभियुक्तों में से कोई (यदि एक से अधिक हों) संज्ञान करने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाहियों पर आक्षेप करता है तो मामला ऐसे अन्य मजिस्ट्रेट को अंतरित कर दिया जाएगा जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
Important Sub-Sections Explained
धारा 190(1)(ग) दं.प्र.सं.
यह उपधारा किसी मजिस्ट्रेट को किसी पुलिस रिपोर्ट या परिवाद पर ही नहीं, बल्कि अपने स्वयं के ज्ञान या संदेह पर भी कि कोई अपराध किया गया है, अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार देती है। यह संज्ञान लेने का यही विशिष्ट तरीका है जो दं.प्र.सं. की धारा 191 के अधीन अंतरण मांगने के अभियुक्त के अधिकार को सक्रिय करता है।
Landmark Judgements
Draft Format / Application
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 191 के अधीन मामले के अंतरण हेतु आवेदन
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में, [जिला का नाम]
वाद सं. ________ वर्ष 20_______
के मामले में:
[अभियुक्त/आवेदक का नाम]
पुत्र/पुत्री [पिता का नाम]
निवासी [पता]
… आवेदक/अभियुक्त
बनाम
[राज्य का नाम] राज्य
… प्रत्यर्थी
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 191 के अधीन आवेदन
अत्यंत विनम्रतापूर्वक निवेदन यह है कि:
1. यह कि आवेदक उपर्युक्त वाद में अभियुक्त/अभियुक्तों में से एक है जो विद्वान [संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट का नाम], [मजिस्ट्रेट का पदनाम], [न्यायालय/जिला] के समक्ष लंबित है।
2. यह कि विद्वान मजिस्ट्रेट ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (जिसे इसके पश्चात् “दं.प्र.सं.” कहा जाएगा) की धारा 190 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन, अर्थात्, अपने स्वयं के ज्ञान या संदेह के आधार पर, [दिनांक] को आवेदक/अभियुक्त के विरुद्ध धारा [प्रासंगिक भारतीय दंड संहिता की धाराएं] के अधीन कथित अपराध(अपराधों) का संज्ञान लिया।
3. यह कि दं.प्र.सं. की धारा 191 के प्रावधानों के अनुपालन में, [दिनांक] को विद्वान मजिस्ट्रेट द्वारा आवेदक को सूचित किया गया कि वह किसी साक्ष्य के लिए जाने से पहले, मामले की जांच या विचारण किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा कराने का हकदार है।
4. यह कि आवेदक, इस आशंका के चलते कि दं.प्र.सं. की धारा 190(1)(ग) के अधीन संज्ञान लेने वाले विद्वान मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाहियां पूर्ण निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित नहीं कर सकती हैं, एतद्द्वारा उक्त विद्वान मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे की कार्यवाहियों पर आपत्ति करता है।
5. यह कि आवेदक इसलिए दं.प्र.सं. की धारा 191 के अधीन प्रदत्त अधिकार का प्रयोग चाहता है ताकि मामले को जांच या विचारण के लिए किसी अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को अंतरित किया जा सके।
6. यह कि यह आवेदन सद्भावनापूर्वक और न्याय एवं निष्पक्षता के हित में किया गया है।
प्रार्थना:
अतः, अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है कि यह माननीय न्यायालय कृपापूर्वक निम्न आदेश पारित करने की कृपा करे:
a. वर्तमान वाद, जिसका वाद सं. ________ वर्ष 20_______ है और जो विद्वान [संज्ञान लेने वाले मजिस्ट्रेट का नाम] के समक्ष लंबित है, को किसी ऐसे अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को अंतरित करे जिसे यह माननीय न्यायालय विनिर्दिष्ट करना उचित समझे।
b. मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में इस माननीय न्यायालय द्वारा उचित समझे गए किसी अन्य आदेश या निर्देश को पारित करे।
और इस कृपा कार्य के लिए, आवेदक, जैसा कि कर्तव्यबद्ध है, सदैव प्रार्थना करेगा।
दिनांक: [दिनांक]
स्थान: [स्थान]
[आवेदक/अभियुक्त के हस्ताक्षर]
[आवेदक/अभियुक्त का नाम]
[आवेदक के अधिवक्ता के हस्ताक्षर (यदि कोई हों)]
[अधिवक्ता का नाम]
[पंजीकरण संख्या]
[पता]