अध्याय XVI

CrPC Section 205 in Hindi: मजिस्ट्रेट अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकेगा

New Law Update (2024)

धारा 234 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

मजिस्ट्रेट का न्यायालय

Punishment​

प्रक्रियात्मक – वारंट/समन प्रक्रिया

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) जब कभी कोई मजिस्ट्रेट समन जारी करता है, वह, यदि ऐसा करने का कोई कारण देखता है तो, अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है और उसे अपने प्लीडर द्वारा हाजिर होने की अनुज्ञा दे सकता है।
(2) किंतु मामले की जांच या विचारण करने वाला मजिस्ट्रेट अपने विवेकानुसार, कार्यवाहियों के किसी भी प्रक्रम में, अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी का निदेश दे सकता है, और यदि आवश्यक हो तो ऐसी हाजिरी को इसमें इसके पूर्व उपबंधित रीति से प्रवृत्त करा सकता है।

Important Sub-Sections Explained

धारा 205(1)

यह उप-धारा एक मजिस्ट्रेट को, समन जारी करते समय, अभियुक्त को व्यक्तिगत हाजिरी से छूट देने और उन्हें अपने वकील (प्लीडर) के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति देने का अधिकार देती है, बशर्ते ऐसी छूट के लिए एक वैध कारण हो।

धारा 205(2)

किसी भी पिछली छूट के बावजूद, यह उप-धारा स्पष्ट करती है कि मामले की अध्यक्षता करने वाला मजिस्ट्रेट कार्यवाहियों के किसी भी चरण में अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी का बाद में निर्देश देने का विवेक रखता है और यदि मुकदमे के उचित संचालन के लिए आवश्यक समझा जाए तो ऐसी हाजिरी को प्रवृत्त करा सकता है।

Landmark Judgements

भास्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम भिवानी डेनिम एंड अपेरल लिमिटेड (2001):

उच्चतम न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 205 के तहत मजिस्ट्रेट की व्यापक विवेकाधीन शक्ति की पुष्टि की कि वह अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी से, विशेषकर समन मामलों में, अभिमुक्ति दे सकता है, जिससे प्लीडर के माध्यम से उपस्थिति की अनुमति मिल सके। निर्णय में इस बात पर जोर दिया गया कि इस विवेक का प्रयोग असुविधा को रोकने के लिए किया जाना चाहिए, बशर्ते अभियुक्त की पहचान विवादित न हो और अभियोजन या न्याय प्रशासन को कोई पूर्वाग्रह न हो। यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि बाद में व्यक्तिगत हाजिरी आवश्यक हो जाती है तो मजिस्ट्रेट छूट को वापस लेने की शक्ति रखता है।

एस.वी. मजूमदार बनाम महाराष्ट्र राज्य (2011):

बंबई उच्च न्यायालय ने दोहराया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 205 के तहत विवेक का प्रयोग न्यायिक रूप से किया जाना चाहिए, जिसमें अपराध की प्रकृति, अभियुक्त की आयु, स्वास्थ्य, व्यवसाय और कार्यवाही के चरण जैसे कारकों पर विचार किया जाए। न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राथमिक उद्देश्य अभियुक्त की सुविधा को मुकदमे के सुचारू संचालन के साथ संतुलित करना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि छूट कार्यवाही में बाधा न डाले या अभियोजन को पूर्वाग्रह न पहुंचाए।

Draft Format / Application

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय में, [शहर/जिला]

फौजदारी मामला संख्या [संख्या]/[वर्ष] / प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या [संख्या]/[वर्ष] पर [पुलिस थाना]

[परिवादी का नाम] / राज्य
बनाम
[अभियुक्त का नाम]

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 205 के तहत अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति हेतु आवेदन

अत्यंत विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि:

1. उपरोक्त वर्णित वाद वर्तमान में इस माननीय न्यायालय के समक्ष लंबित है।
2. आवेदक/अभियुक्त [अभियुक्त का नाम] को इस माननीय न्यायालय के समक्ष [दिनांक] को उपस्थित होने के लिए समन किया गया है।
3. आवेदक/अभियुक्त [छूट मांगने का कारण बताएं, जैसे: एक वरिष्ठ नागरिक है जिसकी आयु XX वर्ष है और वह चिकित्सीय स्थितियों से पीड़ित है; एक दूरस्थ स्थान का निवासी है, जिससे प्रत्येक सुनवाई के लिए यात्रा करने में अनुचित कठिनाई और खर्च होता है; एक कार्यरत पेशेवर है जिसकी अदालत में बार-बार उपस्थिति आजीविका को प्रभावित करती है; अपराध की प्रकृति ऐसी है कि इस स्तर पर पहचान या विचारण की प्रगति के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है]।
4. आवेदक/अभियुक्त अपने विधिवत नियुक्त प्लीडर, [प्लीडर का नाम] के माध्यम से उपस्थित होने का वचन देता है, जो सभी कार्यवाहियों में उसका प्रतिनिधित्व करेगा और उसकी पहचान पर विवाद नहीं करेगा। प्लीडर यह भी सुनिश्चित करेगा कि जब भी इस माननीय न्यायालय द्वारा विशेष रूप से निर्देशित किया जाए, अभियुक्त उपस्थित हो।
5. यदि इस स्तर पर आवेदक/अभियुक्त की व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दी जाती है, तो अभियोजन या न्याय प्रशासन को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा।

प्रार्थना:

अतः, अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है कि यह माननीय न्यायालय कृपया निम्नलिखित आदेश पारित करे:
क) दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 205 के तहत आवेदक/अभियुक्त [अभियुक्त का नाम] की व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति प्रदान करे।
ख) आवेदक/अभियुक्त को वर्तमान वाद की कार्यवाहियों के लिए अपने प्लीडर, [प्लीडर का नाम] के माध्यम से उपस्थित होने की अनुमति प्रदान करे।
ग) न्याय के हित में कोई अन्य आदेश या निर्देश पारित करे जो इस माननीय न्यायालय को उचित और उपयुक्त लगे।

और इस दयालु कार्य के लिए, आवेदक अपने कर्तव्य से बंधा हुआ सदा प्रार्थना करेगा।

दिनांक: [दिनांक]
स्थान: [स्थान]

(आवेदक/अभियुक्त के हस्ताक्षर)
[अभियुक्त का नाम]

माध्यम से अधिवक्ता:
(प्लीडर के हस्ताक्षर)
[प्लीडर का नाम]
अभियुक्त के अधिवक्ता
नामांकन संख्या: [प्लीडर का नामांकन संख्या]
[संपर्क विवरण]

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