अध्याय XVI
CrPC Section 206 in Hindi: छोटे अपराधों के मामलों में विशेष समन
New Law Update (2024)
धारा 204 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
मजिस्ट्रेट का न्यायालय
Punishment
3 मास तक का साधारण कारावास + जुर्माना
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) यदि किसी मजिस्ट्रेट की, जो किसी छोटे अपराध का संज्ञान करता है, राय में मामले का धारा 260 या धारा 261 के अधीन संक्षेपतः निपटारा किया जा सकता है, तो मजिस्ट्रेट, सिवाय ऐसे मामले के जहां वह प्रतिकूल राय का है और जिसके कारण वह लेखबद्ध करेगा, अभियुक्त को समन जारी करेगा, जिसमें उससे अपेक्षा की जाएगी कि वह विनिर्दिष्ट तारीख को मजिस्ट्रेट के समक्ष या तो स्वयं उपस्थित हो या प्लीडर द्वारा उपस्थित हो, अथवा यदि वह मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हुए बिना आरोप स्वीकार करना चाहता है तो विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व डाकमार्ग से या संदेशवाहक द्वारा मजिस्ट्रेट को लिखित में उक्त अभिवाक् और समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम भेजे, अथवा यदि वह प्लीडर द्वारा उपस्थित होना चाहता है और ऐसे प्लीडर के माध्यम से आरोप स्वीकार करना चाहता है तो प्लीडर को अपनी ओर से आरोप स्वीकार करने और ऐसे प्लीडर के माध्यम से जुर्माना चुकाने के लिए लिखित में प्राधिकृत करे; परंतु ऐसे समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की रकम एक हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “छोटा अपराध” से कोई ऐसा अपराध अभिप्रेत है जो केवल जुर्माने से दंडनीय है जो एक हजार रुपए से अधिक नहीं है, किंतु इसके अंतर्गत मोटर यान अधिनियम, 1931 के अधीन या किसी अन्य विधि के अधीन, जो दोषी के अभिवाक् पर अभियुक्त व्यक्ति को उसकी अनुपस्थिति में दोषसिद्ध करने का उपबंध करती है, इस प्रकार दंडनीय कोई अपराध नहीं है।
(3) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी मजिस्ट्रेट को उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किसी ऐसे अपराध के संबंध में करने के लिए विशेष रूप से सशक्त कर सकती है जो धारा 320 के अधीन शमनीय है या किसी ऐसे अपराध के संबंध में करने के लिए जो तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास से, या जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय है, जहां मजिस्ट्रेट की राय है कि, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, केवल जुर्माना अधिरोपित करना न्याय के उद्देश्यों को पूरा करेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 206(1)
यह उपधारा छोटे अपराधों के लिए विशेष समन प्रक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसमें एक मजिस्ट्रेट अभियुक्त को या तो न्यायालय में उपस्थित होने, डाक द्वारा जुर्माने के साथ लिखित दोषी अभिवाक् भेजने, या किसी प्लीडर को ऐसा करने के लिए प्राधिकृत करने का विकल्प देता है, बशर्ते जुर्माना एक हजार रुपये से अधिक न हो।
धारा 206(2)
यह महत्वपूर्ण उपधारा इस विशेष समन प्रक्रिया के आवेदन के लिए “छोटे अपराध” को परिभाषित करती है, यह स्पष्ट करते हुए कि यह केवल एक हजार रुपये से अधिक न होने वाले जुर्माने से दंडनीय अपराध है, जिसमें कुछ मोटर वाहन अपराधों या समान कानूनों के लिए विशिष्ट अपवाद शामिल हैं।