अध्याय XIX

CrPC Section 241 in Hindi: दोष स्वीकार के अभिवाक् पर दोषसिद्धि

New Law Update (2024)

धारा 234 बी.एन.एस.एस.

TRIAL COURT

मजिस्ट्रेट

Punishment​

प्रक्रियात्मक – विनिर्णय / दंडादेश

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

यदि अभियुक्त दोष स्वीकार करता है, तो मजिस्ट्रेट अभिवाक् को अभिलिखित करेगा और अपने विवेकानुसार उस पर उसे दोषसिद्ध कर सकेगा।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

किशोर कुमार बनाम राजस्थान राज्य (1993):

इस ऐतिहासिक निर्णय में इस बात पर जोर दिया गया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 241 के अधीन मजिस्ट्रेट का विवेकाधिकार न्यायिक है न कि मनमाना। इसमें यह अभिनिर्धारित किया गया कि दोष स्वीकार का अभिवाक् सुस्पष्ट, स्वेच्छा से किया गया होना चाहिए और मजिस्ट्रेट द्वारा उस पर कार्रवाई करने से पहले अभियुक्त को उसके निहितार्थों को पूरी तरह समझना चाहिए।

अब्दुल कादिर बनाम बिहार राज्य (1973):

इस मामले में इस सिद्धांत को दोहराया गया कि दोष स्वीकार का अभिवाक् स्पष्ट, असंदिग्ध और स्वैच्छिक होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि मजिस्ट्रेट केवल दोष स्वीकार के अभिवाक् पर दोषसिद्ध करने के लिए यांत्रिक रूप से बाध्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक विवेक का प्रयोग करना चाहिए कि अभिवाक् वास्तविक है और बिना किसी दबाव या गलतफहमी के किया गया है।

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