अध्याय III
CrPC Section 26 in Hindi: अपराधों का विचारण करने वाले न्यायालय (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
Section 20 BNSS
TRIAL COURT
उच्च न्यायालय, सेशन न्यायालय, या कोई अन्य न्यायालय जैसा कि प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376, 376क, 376कख, 376ख, 376ग, 376घ, 376घक, 376घख या 376ङ के अधीन अपराधों के लिए, यथासाध्य ऐसे न्यायालय द्वारा विचारण किया जाएगा जिसकी पीठासीन अधिकारी कोई महिला है। अन्य विधियों के अधीन अपराधों के लिए, उस विधि में उल्लिखित न्यायालय द्वारा, या यदि उल्लिखित नहीं है, तो उच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय द्वारा विचारण किया जाएगा जिसे प्रथम अनुसूची में विचारण योग्य दर्शाया गया है।
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के अधीन किसी अपराध का विचारण—
(i) उच्च न्यायालय द्वारा, या
(ii) सेशन न्यायालय द्वारा, या
(iii) किसी ऐसे अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा जिससे प्रथम अनुसूची में यह दर्शित किया गया है कि ऐसे अपराध का विचारण किया जा सकेगा:
परंतु भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376, धारा 376क, धारा 376कख, धारा 376ख, धारा 376ग, धारा 376घ, धारा 376घक, धारा 376घख या धारा 376ङ के अधीन किसी अपराध का विचारण यथासाध्य ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा जिसकी पीठासीन अधिकारी कोई महिला है।
(2) किसी अन्य विधि के अधीन किसी अपराध का विचारण, जब उस निमित्त ऐसी विधि में किसी न्यायालय का उल्लेख किया गया है, तब ऐसे न्यायालय द्वारा किया जाएगा और जब कोई न्यायालय इस प्रकार उल्लिखित नहीं किया गया है, तब उसका विचारण—
(i) उच्च न्यायालय द्वारा, या
(ii) किसी ऐसे अन्य न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा जिससे प्रथम अनुसूची में यह दर्शित किया गया है कि ऐसे अपराध का विचारण किया जा सकेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 26(1) का परंतुक
यह महत्वपूर्ण परंतुक अधिदेशित करता है कि गंभीर यौन अपराधों, जैसे कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376, 376क, 376कख, 376ख, 376ग, 376घ, 376घक, 376घख और 376ङ के तहत आने वाले अपराधों का विचारण, जहां भी संभव हो, एक महिला न्यायाधीश द्वारा पीठासीन न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए ताकि अधिक संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
धारा 26(2)
यह उपधारा भारतीय दण्ड संहिता के अलावा अन्य विधियों के तहत परिभाषित अपराधों के लिए क्षेत्राधिकार को स्पष्ट करती है। यह निर्दिष्ट करती है कि यदि कोई विशेष विधि विचारण के लिए किसी विशिष्ट न्यायालय का उल्लेख करती है, तो उस न्यायालय का क्षेत्राधिकार होगा; अन्यथा, उच्च न्यायालय या प्रथम अनुसूची में ऐसे अपराध के विचारण योग्य सूचीबद्ध कोई भी न्यायालय विचारण कर सकता है।
Landmark Judgements
श्रीमती नीरज मलिक बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2014):
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 26(1) के परंतुक में वाक्यांश ‘यथासाध्य’ की व्याख्या करते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि महिला न्यायाधीश द्वारा पीठासीन न्यायालय द्वारा यौन अपराधों के विचारण का अधिदेश निर्देशिकात्मक है, पूर्ण नहीं। न्यायालय ने ऐसे प्रत्येक मामले के लिए महिला न्यायाधीश सुनिश्चित करने में व्यावहारिक कठिनाइयों को स्वीकार किया, इस बात पर जोर दिया कि गैर-अनुपालन तब तक विचारण को दूषित नहीं करता जब तक कि पूर्वाग्रह प्रदर्शित न हो।
अब्दुल करीम बनाम कर्नाटक राज्य (2016):
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने विशिष्ट विधियों (जैसे पॉक्सो अधिनियम) के तहत गठित विशेष न्यायालयों के क्षेत्राधिकार की जांच करते हुए स्पष्ट किया कि दं.प्र.सं. की धारा 26(2) ‘किसी अन्य विधि’ के तहत अपराधों के विचारण का प्रावधान करती है। इसने पुष्टि की कि जहां कोई विशेष विधि विचारण के लिए किसी न्यायालय को निर्दिष्ट करती है, वहां उस न्यायालय का क्षेत्राधिकार प्रभावी होगा, जो इस सिद्धांत के अनुरूप है कि विशेष विधियां सामान्य प्रावधानों को अधिरोपित करती हैं।