अध्याय 21क
CrPC Section 265I in Hindi: अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना
New Law Update (2024)
धारा 362 बीएनएनएस
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – निर्णय/दंडादेश
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
धारा 428 के उपबंध इस अध्याय के अधीन अधिरोपित कारावास के दंडादेश के विरुद्ध अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि को मुजरा करने के लिए उसी रीति से लागू होंगे जिस रीति से वे इस संहिता के अन्य उपबंधों के अधीन कारावास के संबंध में लागू होते हैं।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
भागीरथ बनाम दिल्ली प्रशासन (1985):
उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत मुजरा का लाभ अनिवार्य है और यह अभियुक्त द्वारा अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान भोगी गई निरोध की अवधि पर कारावास के दंडादेश के विरुद्ध लागू होता है। यह मूल सिद्धांत धारा 265झ द्वारा अभिवाक सौदाकारी के परिणामस्वरूप सुनाए गए दंडादेशों तक विस्तारित किया गया है।
कस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2000):
इस निर्णय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 की अनिवार्य प्रकृति को दोहराया, जिसमें यह पुष्टि की गई कि विचाराधीन निरोध की अवधि को अंतिम कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना चाहिए, भले ही दंडादेश आजीवन कारावास हो या एक निश्चित अवधि का। यह सिद्धांत धारा 265झ के माध्यम से अभिवाक सौदाकारी के बाद पारित दंडादेशों पर सीधे लागू होता है।