अध्याय III
CrPC Section 27 in Hindi: किशोरों के मामले में अधिकारिता (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
धारा 22 बी.एन.एस.एस.
TRIAL COURT
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय, या बालक अधिनियम, 1960 के अधीन विशेष रूप से सशक्त कोई न्यायालय, या युवा अपराधियों के लिए कोई अन्य विधि
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
कोई भी अपराध जो मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है, जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो उस तारीख को जब वह न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, सोलह वर्ष से कम आयु का है, का विचारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा, या बालक अधिनियम, 1960 (1960 का 60) के अधीन विशेष रूप से सशक्त किसी न्यायालय द्वारा, या युवा अपराधियों के उपचार, प्रशिक्षण और पुनर्वास का उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा किया जा सकता है।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
प्रताप सिंह बनाम झारखंड राज्य (2005):
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किशोरावस्था की आयु निर्धारित करने की निर्णायक तिथि अपराध के घटित होने की तिथि है, न कि वह तिथि जब अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जिससे किशोर न्याय अधिनियम के आलोक में धारा 27 दं.प्र.सं. के अनुप्रयोग पर प्रभाव पड़ता है।
जितेंद्र सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2010):
इस निर्णय ने किशोर न्याय अधिनियम और नियमों के अनुसार किशोरावस्था का निर्धारण करने के महत्व को दोहराया, इस बात पर जोर दिया कि यदि विशेष कानून के अनुसार आयु स्थापित की जाती है तो किशोरावस्था का लाभ दिया जाना चाहिए।
कृष्ण भगवान बनाम बिहार राज्य (1989):
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि बालक अधिनियम, 1960 (या समान राज्य अधिनियमों) जैसे विशेष कानून, युवा अपराधियों के विचारण और उपचार से संबंधित मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता के सामान्य प्रावधानों, जिसमें धारा 27 भी शामिल है, पर अधिमानता रखते हैं।