अध्याय XXIII
CrPC Section 273 in Hindi: अभियुक्त की उपस्थिति में साक्ष्य लिया जाना
New Law Update (2024)
धारा 326 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
कोई भी दांडिक न्यायालय जो मामले का विचारण कर रहा हो
Punishment
प्रक्रियात्मक – विचारण/आरोप
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
जैसा कि अन्यथा स्पष्ट रूप से उपबंधित है, विचारण के दौरान या अन्य कार्यवाही में लिया गया सब साक्ष्य अभियुक्त की उपस्थिति में, या जब उसकी वैयक्तिक हाजिरी माफ कर दी गई हो तब उसके प्लीडर की उपस्थिति में लिया जाएगा।
परन्तु जहाँ किसी अठारह वर्ष से कम आयु की ऐसी स्त्री का साक्ष्य, जिसके बारे में यह अभिकथित है कि उसे बलात्संग या कोई अन्य लैंगिक अपराध किया गया था, अभिलेखबद्ध किया जाना है वहाँ न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय कर सकेगा कि ऐसी स्त्री का अभियुक्त से आमना-सामना न हो तथा साथ ही अभियुक्त के प्रतिपरीक्षा के अधिकार को भी सुनिश्चित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण—इस धारा में, “अभियुक्त” के अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति भी है जिसके संबंध में इस संहिता के अधीन अध्याय 8 के अधीन कोई कार्यवाही प्रारंभ की गई है।
[आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा यथासंशोधित]
Important Sub-Sections Explained
मुख्य खंड
यह मौलिक भाग सुनिश्चित करता है कि अभियुक्त, या उसका कानूनी प्रतिनिधि, विचारण के दौरान साक्ष्य दर्ज करते समय उपस्थित रहे, जिससे निष्पक्ष विचारण और नैसर्गिक न्याय के मूलभूत सिद्धांत को कायम रखा जा सके।
परन्तुक
यह महत्वपूर्ण अतिरिक्त खंड न्यायालयों को संवेदनशील साक्षियों, विशेष रूप से यौन अपराधों की अवयस्क महिला पीड़ितों के लिए सुरक्षात्मक उपाय लागू करने का अधिकार देता है, जिससे अभियुक्त के साथ उनका सीधा आमना-सामना रोका जा सके और साथ ही अभियुक्त के प्रतिपरीक्षा के आवश्यक अधिकार को भी संरक्षित रखा जा सके।
Landmark Judgements
साक्षी बनाम भारत संघ (2004):
उच्चतम न्यायालय ने साक्ष्य देते समय यौन उत्पीड़न के बाल पीड़ितों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें इन-कैमरा कार्यवाही जैसे उपाय और अभियुक्त से सीधे आमने-सामने होने से बचना शामिल था। इस निर्णय का उद्देश्य अभियुक्त के अधिकारों को संतुलित करते हुए बाल-सुलभ कानूनी वातावरण बनाना था।
पंजाब राज्य बनाम गुरमीत सिंह (1996):
इस मामले ने यौन अपराधों, विशेषकर बलात्कार के पीड़ितों की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा के लिए इन-कैमरा विचारणों के महत्व को रेखांकित किया। न्यायालय ने माना कि ऐसी कार्यवाही पीड़ितों को बिना किसी डर या शर्मिंदगी के स्वतंत्र रूप से गवाही देने में सक्षम बनाने, पीड़ित और अभियुक्त दोनों के लिए निष्पक्ष विचारण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।