अध्याय III
CrPC Section 30 in Hindi: जुर्माने के व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
धारा 30 बीएनएसएस
TRIAL COURT
मजिस्ट्रेट न्यायालय
Punishment
प्रक्रियात्मक – निर्णय / दंडादेश
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) मजिस्ट्रेट का न्यायालय जुर्माने का संदाय न करने पर इतनी अवधि का कारावास अधिनिर्णित कर सकेगा जितनी विधि द्वारा प्राधिकृत है: परन्तु यह कि ऐसी अवधि—
(क) धारा 29 के अधीन मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अधिक नहीं होगी;
(ख) जहां कारावास, तात्विक दंडादेश के भाग के रूप में अधिनिर्णित किया गया है, वहां उस कारावास की अवधि के एक-चौथाई से अधिक नहीं होगी जिसे मजिस्ट्रेट जुर्माने के संदाय के व्यतिक्रम होने पर कारावास से भिन्न रूप में अपराध के लिए दंड के तौर पर अधिरोपित करने के लिए सक्षम है।
(2) इस धारा के अधीन अधिनिर्णित कारावास धारा 29 के अधीन मजिस्ट्रेट द्वारा अधिनिर्णित किए जा सकने वाले अधिकतम अवधि के तात्विक कारावास के दंडादेश के अतिरिक्त हो सकेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 30(1)
यह उपधारा मजिस्ट्रेट को जुर्माना न चुकाए जाने पर कारावास अधिरोपित करने का अधिकार देती है, लेकिन महत्वपूर्ण रूप से इस व्यतिक्रम कारावास की अवधि पर कठोर सीमाएं निर्धारित करती है, यह सुनिश्चित करती है कि यह मजिस्ट्रेट की समग्र दंडादेश शक्तियों या अपराध के लिए मुख्य कारावास अवधि के एक-चौथाई से अधिक न हो।
धारा 30(2)
यह उपधारा स्पष्ट करती है कि जुर्माने में व्यतिक्रम के लिए अधिरोपित कारावास अपराध के लिए पहले ही अधिनिर्णित किसी अन्य प्राथमिक कारावास दंडादेश के अतिरिक्त हो सकता है, भले ही वह प्राथमिक दंडादेश मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमत अधिकतम हो।
Landmark Judgements
के. भास्करन बनाम शंकरन वैद्यन बालन और अन्य (1999):
उच्चतम न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने, यद्यपि यह मुख्य रूप से परक्राम्य लिखत अधिनियम से संबंधित था, इस सामान्य सिद्धांत को स्पष्ट किया कि जुर्माने के व्यतिक्रम होने पर कारावास की अवधि अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम दंडादेश से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 30 के तहत मजिस्ट्रेट की शक्तियों पर सीमाओं को रेखांकित करता है।
शैलेशकुमार बनाम गुजरात राज्य (2020):
इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने दोहराया कि जब कारावास का एक तात्विक दंडादेश पहले ही अधिरोपित किया जा चुका हो, तो जुर्माने के व्यतिक्रम में अतिरिक्त कारावास अपराध के लिए निर्धारित कारावास की अधिकतम अवधि के एक-चौथाई से अधिक नहीं हो सकता, जैसा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 30(1)(ख) में उपबंधित है। यह सांविधिक सीमाओं का कड़ाई से पालन करने पर बल देता है।