अध्याय चौबीसवां

CrPC Section 316 in Hindi: प्रकटीकरण कराने के लिए कोई प्रभाव प्रयोग में न लाया जाना

New Law Update (2024)

धारा 183 बीएनएसएस

TRIAL COURT

Punishment​

परिभाषात्मक

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

धारा 306 और धारा 307 में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी अभियुक्त व्यक्ति पर किसी वचन या धमकी द्वारा या अन्यथा कोई ऐसा प्रभाव नहीं डाला जाएगा जिससे उसे कोई ऐसी बात प्रकट करने या छिपाने के लिए प्रेरित किया जाए जो उसकी जानकारी में है।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

नंदिनी सत्पथी बनाम पी.एल. दानी (1978):

हालांकि मुख्य रूप से संविधान के अनुच्छेद 20(3) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 से संबंधित है, सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने आत्म-अभिशंसा के विरुद्ध अधिकार और जबरदस्ती के खिलाफ संरक्षण की दृढ़ता से पुष्टि की, इस प्रकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 316 के अंतर्निहित सिद्धांत को मजबूत किया कि बयान स्वैच्छिक और प्रलोभन से मुक्त होने चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य बनाम देवमन उपाध्याय (1960):

इस सर्वोच्च न्यायालय के मामले ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (धारा 24-27) के तहत संस्वीकृतियों की स्वीकार्यता को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की। निर्णय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रलोभन, धमकी या वचन के माध्यम से प्राप्त संस्वीकृतियां स्वेच्छिक नहीं होतीं और अस्वीकार्य हैं, एक सिद्धांत जो सीधे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 316 के सुरक्षात्मक दायरे में प्रतिबिंबित होता है।

Draft Format / Application

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