अध्याय सत्ताईस
CrPC Section 358 in Hindi: निराधार गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को प्रतिकर
New Law Update (2024)
बीएनएसएस की धारा 420
TRIAL COURT
मजिस्ट्रेट न्यायालय
Punishment
जुर्माना
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जब कभी कोई व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी से किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कराता है और जिस मजिस्ट्रेट द्वारा मामले की सुनवाई की जाती है उसे यह प्रतीत होता है कि ऐसी गिरफ्तारी कराने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था, तो मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति द्वारा, जिसने गिरफ्तारी कराई थी, उस व्यक्ति को, जो गिरफ्तार किया गया था, उसके समय की हानि और मामले में हुए व्ययों के लिए ऐसी प्रतिकर राशि, जो एक हजार रुपए से अधिक न होगी, दिला सकता है, जो मजिस्ट्रेट उचित समझे।
(2) ऐसे मामलों में, यदि एक से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जाता है, तो मजिस्ट्रेट उसी रीति से उनमें से प्रत्येक को ऐसी प्रतिकर राशि, जो एक सौ रुपए से अधिक न होगी, दिला सकता है, जो ऐसा मजिस्ट्रेट उचित समझे।
(3) इस धारा के अधीन दिए गए सभी प्रतिकर ऐसे वसूल किए जा सकते हैं मानो वे जुर्माना हों, और यदि वे इस प्रकार वसूल नहीं किए जा सकते हैं, तो जिस व्यक्ति द्वारा वे देय हैं, उसे ऐसे कारावास की सादी अवधि के लिए, जो तीस दिन से अधिक न होगी, दंडादिष्ट किया जाएगा, जैसा मजिस्ट्रेट निदेश दे, जब तक कि ऐसी राशि पहले ही न चुका दी जाए।
Important Sub-Sections Explained
धारा 358(1) दं.प्र.सं.
यह उपधारा मजिस्ट्रेट को यह शक्ति देती है कि वह ऐसे व्यक्ति को, जिसे किसी अन्य व्यक्ति के उकसावे पर निराधार गिरफ्तार किया गया था, एक हजार रुपये तक का प्रतिकर दिलाए। प्रतिकर में समय की हानि और हुए व्यय शामिल हैं।
धारा 358(3) दं.प्र.सं.
यह उपधारा बताती है कि दिए गए प्रतिकर को जुर्माने के समान कैसे वसूल किया जाता है। यदि प्रतिकर वसूल नहीं किया जा सकता है, तो उत्तरदायी व्यक्ति को तीस दिन से अनधिक अवधि के लिए सादा कारावास हो सकता है।