अध्याय उनतीस
CrPC Section 375 in Hindi: कतिपय मामलों में जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है तब कोई अपील नहीं
New Law Update (2024)
धारा 406 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
उच्च न्यायालय, सेशन न्यायालय, महानगर मजिस्ट्रेट, प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
Punishment
प्रक्रियात्मक – निर्णय / दंडादेश
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) यदि दोषसिद्धि उच्च न्यायालय द्वारा है; या
(2) यदि दोषसिद्धि सेशन न्यायालय, महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा है, सिवाय दंडादेश की मात्रा या विधिमान्यता के बारे में।
Important Sub-Sections Explained
धारा 375(1) और (2)
ये उपधाराएं संयुक्त रूप से निर्दिष्ट करती हैं कि यदि कोई अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है, तो वह आम तौर पर अपनी दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील नहीं कर सकता यदि वह उच्च न्यायालय, सेशन न्यायालय, महानगर मजिस्ट्रेट या किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी की गई है, जब तक कि अपील विशेष रूप से अधिरोपित दंडादेश की कठोरता या विधिक वैधता से संबंधित न हो।
Landmark Judgements
राजस्थान राज्य बनाम किशोर (2007):
उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि दोष स्वीकारोक्ति पर आधारित दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील केवल ‘दंडादेश की मात्रा या विधिमान्यता’ के संबंध में ही विचारणीय है, न कि दोषमुक्ति के निष्कर्ष के संबंध में। यह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 375 के तहत अपील के सीमित दायरे पर जोर देता है।
भगवान दास बनाम राजस्थान राज्य (2003):
इस निर्णय ने पुष्टि की कि जब कोई अभियुक्त व्यक्ति स्पष्ट दोष स्वीकारोक्ति करता है, तो दोषसिद्धि को अपील में चुनौती नहीं दी जा सकती, सिवाय न्यायालय द्वारा अधिरोपित दंडादेश की विधिमान्यता या आनुपातिकता से संबंधित विशिष्ट आधारों के।