अध्याय उनतीस
CrPC Section 380 in Hindi: कुछ मामलों में अपील का विशेष अधिकार
New Law Update (2024)
धारा 415 बी.एन.एस.एस.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – विचारण / आरोप
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, जब एक ही विचारण में एक से अधिक व्यक्ति सिद्धदोष ठहराए जाते हैं और ऐसे किसी व्यक्ति के संबंध में अपील योग्य निर्णय या आदेश पारित किया गया है, तब ऐसे विचारण में सिद्धदोष ठहराए गए सभी या कोई भी व्यक्ति अपील का अधिकार रखेंगे।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
हरधन मैती बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, 1978 एस.सी.सी. (क्रिमिनल) 166:
उच्चतम न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 380 के अधिरोही स्वरूप की पुष्टि करते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि यह संयुक्त विचारण में सिद्धदोष ठहराए गए सभी सह-अभियुक्तों को अपील का एक स्वतंत्र अधिकार प्रदान करती है, भले ही अपील योग्य निर्णय तकनीकी रूप से उनमें से केवल एक या कुछ के विरुद्ध पारित किया गया हो। यह व्यापक अपीलीय पुनरीक्षण सुनिश्चित करता है।
करम सिंह बनाम पंजाब राज्य, 1997 एस.सी.सी. (क्रिमिनल) 1162:
इस मामले ने धारा 380 के व्यापक दायरे को दोहराया, यह स्पष्ट करते हुए कि ‘अपील का विशेष अधिकार’ अन्य प्रावधानों के तहत सह-अभियुक्त के स्वतंत्र अपील के अधिकार पर निर्भर नहीं है। यह उस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि जहां एक के लिए अपील योग्य आदेश मौजूद है, वहीं एक ही विचारण में सभी सह-दोषी अपील के अधिकार से लाभान्वित होते हैं।