अध्याय 4
CrPC Section 39 in Hindi: कुछ अपराधों की इत्तिला का जनता द्वारा दिया जाना (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
धारा 39 बीएनएसएस
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) हर व्यक्ति, जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय किसी अपराध के किए जाने या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ऐसे किसी अपराध को करने के आशय से अवगत है, अर्थात्:—
(i) धाराएं 121 से 126 तक, दोनों सहित, और धारा 130 (अर्थात्, उक्त संहिता के अध्याय 6 में विनिर्दिष्ट राज्य के विरुद्ध अपराध);
(ii) धाराएं 143, 144, 145, 147 और 148 (अर्थात्, उक्त संहिता के अध्याय 8 में विनिर्दिष्ट लोक शांति के विरुद्ध अपराध);
(iii) धाराएं 161 से 165क तक, दोनों सहित (अर्थात्, अवैध परितोषण से संबंधित अपराध);
(iv) धाराएं 272 से 278 तक, दोनों सहित (अर्थात्, खाद्य और औषधियों के अपमिश्रण आदि से संबंधित अपराध);
(v) धाराएं 302, 303 और 304 (अर्थात्, जीवन पर प्रभाव डालने वाले अपराध);
(vक) धारा 364क (अर्थात्, फिरौती आदि के लिए व्यपहरण से संबंधित अपराध);
(vi) धारा 382 (अर्थात्, चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी करके चोरी का अपराध);
(vii) धाराएं 392 से 399 तक, दोनों सहित, और धारा 402 (अर्थात्, लूट और डकैती के अपराध);
(viii) धारा 409 (अर्थात्, लोक सेवक आदि द्वारा आपराधिक न्यास भंग से संबंधित अपराध);
(ix) धाराएं 431 से 439 तक, दोनों सहित (अर्थात्, संपत्ति के विरुद्ध रिष्टि का अपराध);
(x) धाराएं 449 और 450 (अर्थात्, गृह-अतिचार का अपराध);
(xi) धाराएं 456 से 460 तक, दोनों सहित (अर्थात्, प्रच्छन्न गृह-अतिचार के अपराध); और
(xii) धाराएं 489क से 489ङ तक, दोनों सहित (अर्थात्, करंसी नोटों और बैंक नोटों से संबंधित अपराध),
किसी ऐसे उचित प्रतिहेतु के अभाव में, जिसका साबित करने का भार ऐसे अवगत व्यक्ति पर होगा, ऐसे किए जाने या आशय की इत्तिला तत्काल निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देगा।
(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ‘अपराध’ पद के अंतर्गत भारत के बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई कार्य भी है, जो यदि भारत में किया जाता तो अपराध होता।
Important Sub-Sections Explained
धारा 39(1)
यह महत्वपूर्ण उपधारा प्रत्येक व्यक्ति पर एक कानूनी बाध्यता अधिरोपित करती है कि यदि वह भारतीय दंड संहिता में सूचीबद्ध कुछ गंभीर अपराधों के किए जाने या उन्हें करने के आशय से अवगत होता है, तो वह तत्काल निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को सूचित करे, जब तक कि उसके पास ऐसा न करने का कोई वैध कारण न हो, जिसका साबित करने का भार उसी पर होगा।
धारा 39(2)
यह उपधारा यह उपबंधित करके रिपोर्टिंग कर्तव्य के प्रादेशिक दायरे को स्पष्ट करती है कि ‘अपराध’ पद भारत के बाहर किए गए कार्यों पर भी लागू होता है, बशर्ते ऐसे कार्य यदि भारतीय क्षेत्र के भीतर किए गए होते, तो अपराध होते।