अध्याय बत्तीस
CrPC Section 421 in Hindi: जुर्माने की वसूली के लिए वारंट
New Law Update (2024)
धारा 465 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
दंडादेश पारित करने वाला न्यायालय
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जब किसी अपराधी को जुर्माना देने के लिए दंडादिष्ट किया गया है तब दंडादेश पारित करने वाला न्यायालय जुर्माने की वसूली के लिए निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों प्रकार से कार्यवाही कर सकेगा, अर्थात्:—
(क) वह अपराधी की किसी जंगम संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा रकम की वसूली के लिए वारंट निकाल सकेगा;
(ख) वह जिले के कलेक्टर को, उसे यह प्राधिकृत करते हुए, एक वारंट निकाल सकेगा कि वह उस रकम को व्यतिक्रमी की जंगम या स्थावर संपत्ति या दोनों में से भू-राजस्व के बकाए के रूप में वसूल करे:
परंतु यदि दंडादेश में यह निदेश दिया गया है कि जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम होने पर अपराधी कारावासित होगा, और यदि ऐसे अपराधी ने व्यतिक्रम के ऐसे संपूर्ण कारावास को भोग लिया है तो कोई न्यायालय ऐसा वारंट तब तक नहीं निकालेगा जब तक कि वह, लेखबद्ध किए जाने वाले विशेष कारणों से, ऐसा करना आवश्यक न समझे, या जब तक कि उसने धारा 357 के अधीन जुर्माने में से खर्चे या प्रतिकर के संदाय के लिए कोई आदेश न किया हो।
(2) राज्य सरकार यह विनियमित करने के लिए नियम बना सकेगी कि उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन वारंट किस रीति से निष्पादित किए जाएंगे और ऐसे वारंट के निष्पादन में कुर्क की गई किसी संपत्ति के संबंध में अपराधी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी दावे का संक्षिप्त अवधारण करने के लिए भी नियम बना सकेगी।
(3) जहां न्यायालय उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन कलेक्टर को वारंट निकालता है वहां कलेक्टर भू-राजस्व के बकायों की वसूली से संबंधित विधि के अनुसार रकम वसूल करेगा मानो ऐसा वारंट उस विधि के अधीन जारी किया गया कोई प्रमाणपत्र हो:
परंतु ऐसा कोई वारंट अपराधी की गिरफ्तारी या कारागार में निरुद्धि द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा।
Important Sub-Sections Explained
उपधारा (1) और उसका परंतुक
यह उपधारा उन दो मुख्य तरीकों का विवरण देती है जिनसे कोई न्यायालय अपराधी से जुर्माना वसूल कर सकता है: अर्थात् जंगम संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा, या कलेक्टर को भू-राजस्व के रूप में इसे वसूल करने के लिए प्राधिकृत करके। महत्वपूर्ण परंतुक जुर्माने की वसूली के लिए वारंट जारी करने पर प्रतिबंध लगाता है यदि अपराधी ने पहले ही व्यतिक्रम में पूरा कारावास भुगत लिया है, जब तक कि विशेष कारण न हों या धारा 357 के अधीन प्रतिकर के लिए कोई आदेश न हो।
उपधारा (3) और उसका परंतुक
यह उपधारा स्पष्ट करती है कि जब कोई न्यायालय कलेक्टर को भू-राजस्व के रूप में जुर्माना वसूल करने का निर्देश देता है, तो कलेक्टर को ऐसे बकायों की वसूली के लिए कानूनों का पालन करना होगा। महत्वपूर्ण रूप से, इसका परंतुक कहता है कि जब वसूली की इस पद्धति का उपयोग किया जाता है तो अपराधी को गैर-भुगतान के लिए गिरफ्तार या कारागार में निरुद्ध नहीं किया जा सकता है।
Landmark Judgements
पंजाब राज्य बनाम शिंगारा सिंह (1996):
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 421(1) का परंतुक जुर्माने की वसूली के लिए वारंट जारी करने पर प्रतिबंध लगाता है यदि अपराधी ने पहले ही व्यतिक्रम में संपूर्ण कारावास भुगत लिया है, जब तक कि विशेष कारण दर्ज न किए जाएं या धारा 357 के अधीन कोई आदेश न किया गया हो। यह दोहरे खतरे को रोकता है जहां एक अपराधी पूर्ण व्यतिक्रम कारावास भुगतता है और फिर भी संपत्ति कुर्की का सामना करता है।
श्रीमती नीरा सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006):
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धारा 421(1)(ख) के अधीन कलेक्टर की शक्तियों पर विस्तार से बताया, यह कहते हुए कि भू-राजस्व के बकाए के रूप में जुर्माने की वसूली संबंधित विधि का कड़ाई से पालन करना चाहिए, और उपधारा (3) का परंतुक ऐसी वसूली के लिए अपराधी की गिरफ्तारी या निरुद्धि को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है, इस पद्धति की गैर-बाध्यकारी प्रकृति को सुदृढ़ करता है।