अध्याय V
CrPC Section 43 in Hindi: प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी और ऐसी गिरफ्तारी पर प्रक्रिया (नियम, सजा और Bare Act PDF)
New Law Update (2024)
धारा 37 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
संज्ञेय
Bailable?
अजमानतीय
Compoundable?
Bare Act Text
(1) कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उसकी उपस्थिति में अजमानतीय और संज्ञेय अपराध करता है या कोई उद्घोषित अपराधी है, गिरफ्तार कर सकेगा या गिरफ्तार करवा सकेगा और ऐसे गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना किसी पुलिस अधिकारी के हवाले करेगा या करवाएगा अथवा पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में ऐसे व्यक्ति को अभिरक्षा में निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या ले जाने का कारण बनेगा।
(2) यदि यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसा व्यक्ति धारा 41 के उपबंधों के अधीन आता है तो पुलिस अधिकारी उसे पुनः गिरफ्तार करेगा।
(3) यदि यह विश्वास करने का कारण है कि उसने असंज्ञेय अपराध किया है और वह पुलिस अधिकारी की मांग पर अपना नाम और निवास बताने से इनकार करता है या ऐसा नाम या निवास बताता है जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का उस अधिकारी के पास कारण है, तो उसके संबंध में धारा 42 के उपबंधों के अधीन कार्यवाही की जाएगी; किंतु यदि यह विश्वास करने का पर्याप्त कारण नहीं है कि उसने कोई अपराध किया है, तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाएगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 43(1)
यह उपधारा किसी भी प्राइवेट व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है जो उसकी तत्काल उपस्थिति में एक गंभीर अजमानतीय और संज्ञेय अपराध करता है, या एक उद्घोषित अपराधी है। यह यह भी अधिदेशित करती है कि गिरफ्तार व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना पुलिस को सौंपा जाना चाहिए या निकटतम पुलिस थाने ले जाया जाना चाहिए।
धारा 43(3)
यह महत्वपूर्ण उपधारा उस प्रक्रिया का वर्णन करती है जब किसी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किया गया व्यक्ति केवल एक असंज्ञेय अपराध करने वाला पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 42 के तहत कार्यवाही की जाएगी यदि वे अपना नाम और पता देने से इनकार करते हैं या गलत जानकारी देते हैं; अन्यथा, यदि अपराध किए जाने का विश्वास करने का कोई पर्याप्त कारण मौजूद नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाना चाहिए।
Landmark Judgements
ओम प्रकाश बनाम हरियाणा राज्य, AIR 1991 SC 1475:
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 43 के तहत एक “उद्घोषित अपराधी” को गिरफ्तार करने की एक प्राइवेट व्यक्ति की शक्ति, उसकी उपस्थिति में किए गए अजमानतीय और संज्ञेय अपराध के लिए गिरफ्तारी की शक्ति से भिन्न है। एक उद्घोषित अपराधी की एक प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी वैध है, भले ही वह अपराध जिसके लिए उसे उद्घोषित किया गया है, जमानतीय या असंज्ञेय हो, बशर्ते कि व्यक्ति वास्तव में एक उद्घोषित अपराधी हो।
कानू अंबु विश्वास बनाम गुजरात राज्य, (1993) 3 SCC 476:
इस मामले ने उन शर्तों को सुदृढ़ किया जिनके तहत एक प्राइवेट व्यक्ति गिरफ्तारी कर सकता है, विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि गिरफ्तारी वैध होने के लिए अजमानतीय और संज्ञेय अपराध “उसकी उपस्थिति में” किया जाना चाहिए। इसने प्राइवेट व्यक्ति के बाद के कर्तव्य पर भी प्रकाश डाला कि वह गिरफ्तार व्यक्ति को अनावश्यक विलंब के बिना एक पुलिस अधिकारी के हवाले करे।