अध्याय बत्तीस

CrPC Section 446A in Hindi: बंधपत्र और जमानत बंधपत्र का रद्दकरण

New Law Update (2024)

धारा 505 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

Punishment​

प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) ऐसे व्यक्ति द्वारा निष्पादित बंधपत्र तथा उस मामले में उसके एक या अधिक प्रतिभुओं द्वारा, यदि कोई हो, निष्पादित बंधपत्र रद्द हो जाएगा; और (2) तत्पश्चात् ऐसे किसी व्यक्ति को उस मामले में केवल उसके अपने बंधपत्र पर तब तक निर्मुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि पुलिस अधिकारी या न्यायालय, यथास्थिति, जिसके समक्ष बंधपत्र निष्पादित किया गया था, का यह समाधान न हो जाए कि बंधपत्र द्वारा आबद्ध व्यक्ति की उसकी शर्त का अनुपालन करने में असफलता के लिए कोई पर्याप्त कारण नहीं था; परंतु इस संहिता के किसी अन्य उपबंध के अधीन रहते हुए, वह उस मामले में उतनी धनराशि के लिए नया वैयक्तिक बंधपत्र और ऐसे एक या अधिक प्रतिभुओं द्वारा बंधपत्र निष्पादित करने पर निर्मुक्त किया जा सकेगा जितनी पुलिस अधिकारी या न्यायालय, यथास्थिति, पर्याप्त समझे।

Important Sub-Sections Explained

धारा 446A(1)

यह उपधारा वैयक्तिक बंधपत्र और किसी भी प्रतिभू बंधपत्र के रद्दकरण को अनिवार्य करती है, यदि कोई व्यक्ति बंधपत्र की शर्तों का अनुपालन करने में विफल रहता है और प्राधिकारी ऐसी विफलता के कारण से संतुष्ट नहीं होते हैं।

धारा 446A(2) और परंतुक

रद्दकरण के पश्चात्, किसी व्यक्ति को केवल उसके अपने बंधपत्र पर निर्मुक्त नहीं किया जा सकता है। तथापि, उसे उतनी पर्याप्त धनराशि के लिए नया वैयक्तिक बंधपत्र और नए प्रतिभू बंधपत्र निष्पादित करने पर निर्मुक्त किया जा सकेगा, जैसा कि पुलिस अधिकारी या न्यायालय द्वारा अवधारित किया जाए।

Landmark Judgements

श्रीमती मीनाक्षी बाला बनाम हरियाणा राज्य और अन्य (2018):

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 446A के अधीन बंधपत्र को रद्द करने का विवेकाधिकार उस न्यायालय या पुलिस अधिकारी के पास निहित है जिसने बंधपत्र निष्पादित किया था, और ऐसे विवेकाधिकार का प्रयोग अपालन के लिए ‘पर्याप्त कारण’ पर विचार करने के बाद न्यायपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।

सुरेंद्र नाथ बनाम राजस्थान राज्य (2001):

राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि यदि बंधपत्र की शर्तों का अनुपालन करने में विफलता के लिए कोई पर्याप्त कारण स्थापित नहीं होता है, तो धारा 446A(1) के अधीन बंधपत्र का रद्दकरण एक अनिवार्य परिणाम है। तत्पश्चात, धारा 446A(2) के परंतुक के अनुसार, व्यक्ति को नए बंधपत्र और प्रतिभुओं के बिना अपने स्वयं के वैयक्तिक बंधपत्र पर निर्मुक्त नहीं किया जा सकता है।

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