अध्याय XXXVI

CrPC Section 475 in Hindi: कोर्ट-मार्शल द्वारा विचारणीय व्यक्तियों की कमान आफिसरों को सुपुर्दगी

New Law Update (2024)

धारा 527 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

दंड न्यायालय या कोर्ट-मार्शल

Punishment​

प्रक्रियात्मक – विचारण / आरोप

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) केन्द्रीय सरकार, इस संहिता और सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46), नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) और वायुसेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) तथा संघ के सशस्त्र बलों से संबंधित किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के संगत ऐसे मामलों के बारे में नियम बना सकेगी जिनमें सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक विधि के या ऐसी अन्य विधि के अधीन व्यक्ति, ऐसे न्यायालय द्वारा, जिसको यह संहिता लागू होती है, या कोर्ट-मार्शल द्वारा विचारणीय होंगे और जब कोई व्यक्ति किसी मजिस्ट्रेट के सामने लाया जाता है और उस पर ऐसे अपराध का आरोप है जिसके लिए वह ऐसे न्यायालय द्वारा, जिसको यह संहिता लागू होती है, या कोर्ट-मार्शल द्वारा विचारणीय है, तब ऐसा मजिस्ट्रेट उन नियमों का ध्यान रखेगा और उचित मामलों में उसे, उस अपराध के कथन के साथ जिसका उस पर आरोप है, उस यूनिट के कमान आफिसर को, जिससे वह संबंधित है, या यथास्थिति, निकटतम सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक स्टेशन के कमान आफिसर को, कोर्ट-मार्शल द्वारा विचारित किए जाने के प्रयोजन के लिए, सुपुर्द कर देगा।
(2) हर मजिस्ट्रेट, किसी यूनिट के या ऐसे किसी स्थान पर तैनात या नियोजित सैनिकों, नाविकों या वायुसैनिकों के किसी निकाय के कमान आफिसर से उस प्रयोजन के लिए लिखित आवेदन प्राप्त होने पर, ऐसे अपराध के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और सुरक्षित रखने के लिए अपने भरसक प्रयास करेगा।
(3) उच्च न्यायालय, यदि वह ठीक समझे, यह निदेश दे सकता है कि राज्य के भीतर स्थित किसी जेल में निरुद्ध किसी बंदी को कोर्ट-मार्शल के सामने विचारण के लिए या कोर्ट-मार्शल के सामने लंबित किसी बात के बारे में परीक्षा किए जाने के लिए लाया जाए।

Important Sub-Sections Explained

धारा 475(1)

यह उपधारा केंद्रीय सरकार को नियम बनाने का अधिकार देती है यह निर्धारित करने के लिए कि सैन्य विधि के अधीन किसी व्यक्ति का विचारण किसी साधारण दंड न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए या कोर्ट-मार्शल द्वारा। यह अनिवार्य करती है कि एक मजिस्ट्रेट, जब ऐसे मामले का सामना करे, तो इन नियमों पर विचार करे और, यदि उचित हो, तो अभियुक्त को उसके कमान अधिकारी को कोर्ट-मार्शल द्वारा विचारण के लिए सौंप दे।

धारा 475(2)

यह उपधारा हर मजिस्ट्रेट पर एक स्पष्ट कर्तव्य अधिरोपित करती है कि वह किसी अपराध के अभियुक्त किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और सुरक्षित रखने के लिए सावधानीपूर्वक प्रयास करे, जब उसे उस यूनिट के कमान अधिकारी से, जिससे व्यक्ति संबंधित है, ऐसी कार्रवाई के लिए लिखित अनुरोध प्राप्त होता है।

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