अध्याय 5
CrPC Section 55 in Hindi: जब पुलिस अधिकारी अधीनस्थ को वारंट के बिना गिरफ्तार करने के लिए प्रतिनियुक्त करे, तब प्रक्रिया
New Law Update (2024)
धारा 62 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट/समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जब कोई पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी या अध्याय 12 के अधीन अन्वेषण करने वाला कोई पुलिस अधिकारी अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से वारंट के बिना (अपनी उपस्थिति से अन्यथा) किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अपेक्षा करता है जिसे वारंट के बिना विधिपूर्वक गिरफ्तार किया जा सकता है, तब वह गिरफ्तार करने की अपेक्षा किए गए अधिकारी को लिखित आदेश देगा, जिसमें गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति और अपराध या अन्य कारण का विनिर्देश होगा जिसके लिए गिरफ्तारी की जानी है। इस प्रकार अपेक्षित अधिकारी, गिरफ्तारी करने से पहले, गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को आदेश का सार सूचित करेगा और यदि ऐसे व्यक्ति द्वारा अपेक्षित हो, तो उसे आदेश दिखाएगा।
(2) उपधारा (1) की कोई बात किसी पुलिस अधिकारी की धारा 41 के अधीन किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
Important Sub-Sections Explained
धारा 55(1)
यह उपधारा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा अधीनस्थ को वारंट रहित गिरफ्तारी की शक्ति प्रत्यायोजित करने की मुख्य प्रक्रिया को रेखांकित करती है। यह व्यक्ति और अपराध को निर्दिष्ट करने वाले एक लिखित आदेश को अनिवार्य करती है, और अधीनस्थ को गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को आदेश का सार सूचित करने और अनुरोध किए जाने पर उसे दिखाने की आवश्यकता होती है।
धारा 55(2)
यह उपधारा स्पष्ट करती है कि उपधारा (1) के प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के तहत वारंट के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की किसी भी पुलिस अधिकारी की स्वतंत्र शक्ति को कम नहीं करते हैं।
Landmark Judgements
संकट कुमार यादव बनाम बिहार राज्य (1995):
इस उच्च न्यायालय के निर्णय ने धारा 55 की अधिदेशात्मक प्रकृति पर जोर दिया, यह माना कि किसी व्यक्ति और गिरफ्तारी के कारण को निर्दिष्ट करने वाले लिखित आदेश की आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन करना, और उसके सार को सूचित करना, एक विधिपूर्ण गिरफ्तारी के लिए आवश्यक है।
डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997):
हालांकि धारा 55 की सीधी व्याख्या नहीं करते हुए, इस ऐतिहासिक उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने गिरफ्तारी और निरोध के लिए विस्तृत दिशानिर्देश निर्धारित किए, जिसमें गिरफ्तारी की वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों, जिसमें धारा 55 भी शामिल है, का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रकाश डाला गया।