अध्याय 6
CrPC Section 62 in Hindi: समनों की तामील कैसे की जाएगी
New Law Update (2024)
धारा 64 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) प्रत्येक समन की तामील पुलिस अधिकारी द्वारा या ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो राज्य सरकार इस निमित्त बनाए, उसे जारी करने वाले न्यायालय के किसी अधिकारी या अन्य लोक सेवक द्वारा की जाएगी।
(2) समन की तामील, यदि साध्य हो, तो समन किए गए व्यक्ति पर वैयक्तिक रूप से की जाएगी और उसमें समन की दो प्रतियों में से एक को उस व्यक्ति को परिदत्त या निविदित करके तामील की जाएगी।
(3) प्रत्येक व्यक्ति, जिस पर समन की ऐसे तामील की गई है, यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है तो दूसरी प्रति की पीठ पर उसके लिए एक रसीद पर हस्ताक्षर करेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 62(2) – वैयक्तिक तामील का अधिदेश
यह उप-धारा अधिदेशित करती है कि समन की प्राथमिक रूप से समन किए गए व्यक्ति पर वैयक्तिक रूप से तामील की जानी चाहिए, जहाँ भी यह साध्य हो। यह तामील करने वाले अधिकारी को समन की दो प्रतियों में से एक को सीधे संबंधित व्यक्ति को परिदत्त या निविदित करने की अपेक्षा करती है, जिससे न्यायालय के निर्देश का सीधा संचार सुनिश्चित हो सके।
धारा 62(3) – तामील की अभिस्वीकृति
यह महत्वपूर्ण उप-धारा निर्धारित करती है कि समन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को, यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा अनुरोध किया जाता है, तो दूसरी प्रति की पीठ पर एक रसीद पर हस्ताक्षर करना होगा। यह हस्ताक्षर तामील के आधिकारिक प्रमाण के रूप में कार्य करता है, यह दस्तावेजित करता है कि समन इच्छित पक्ष द्वारा विधिवत प्राप्त कर लिया गया है और उचित प्रक्रिया स्थापित करने में सहायता करता है।
Landmark Judgements
एस.पी. गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 1991 दं.वि.प. 1361 (इलाहाबाद):
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बल दिया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 62 की उप-धाराएँ (2) और (3) अनिवार्य प्रावधान हैं। इसने निर्णय दिया कि समन किए गए व्यक्ति पर वैयक्तिक तामील, यदि साध्य हो, और ऐसी तामील के लिए हस्ताक्षरित रसीद प्राप्त करना समन की सुपुर्दगी की वैधता और प्रमाण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम हैं।
सैमसन बनाम केरल राज्य, 1999 दं.वि.प. 4272 (केरल):
केरल उच्च न्यायालय ने दोहराया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 62(2) स्पष्ट रूप से समन किए गए व्यक्ति पर समन की वैयक्तिक तामील अनिवार्य करती है, जहाँ ऐसी तामील साध्य हो। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तामील के इस प्राथमिक तरीके का पालन न करने से तामील अनियमित और संभावित रूप से अमान्य हो सकती है, जिससे बाद की कार्यवाहियां प्रभावित हो सकती हैं।