अध्याय VI
CrPC Section 65 in Hindi: जब तामील का पहले उपबंधित रीति से न किया जा सकना
New Law Update (2024)
धारा 72 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
यदि समन की तामील धारा 62, धारा 63 या धारा 64 में यथा उपबंधित रीति से सम्यक् तत्परता बरतने पर भी न की जा सके, तब तामील करने वाला अधिकारी समन की दो प्रतियों में से एक उस घर या गृहस्थी के किसी सहजदृश्य भाग पर लगाएगा जिसमें समन किया गया व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है; और तब न्यायालय, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, या तो यह घोषित कर सकता है कि समन की सम्यक् तामील हो गई है या ऐसी रीति से नई तामील का आदेश दे सकता है जो वह उचित समझे।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
पी. सारथी बनाम भारतीय स्टेट बैंक (2000):
यह उच्चतम न्यायालय का मामला, यद्यपि मुख्य रूप से सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत था, इस मौलिक सिद्धांत को प्रतिपादित करता है कि प्रतिस्थापित तामील एक असाधारण तरीका है और इसे तभी अपनाया जा सकता है जब सम्यक् तत्परता के बावजूद सामान्य तरीके संभव न हों। यह तामील के अप्रत्यक्ष तरीकों को अपनाने से पहले वास्तविक प्रयास करने की आवश्यकता पर बल देता है।
श्रीमती नीरजा पत्नी श्री बलबीर सिंह बनाम बलबीर सिंह पुत्र श्री रामफल (2018):
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दोहराया कि पिछले अनुभागों के अनुसार व्यक्तिगत तामील करने के लिए सम्यक् तत्परता बरते बिना केवल समन चिपकाना अपर्याप्त है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि न्यायालय को यह संतुष्टि होनी चाहिए कि तामील को वैध घोषित करने से पहले वास्तव में उचित प्रयास किए गए थे, जिससे धारा 65 के तहत ‘सम्यक् तत्परता’ और न्यायिक जांच की महत्वपूर्ण भूमिका पुष्ट होती है।