अध्याय 6
CrPC Section 71 in Hindi: प्रतिभूति लिए जाने का निदेश देने की शक्ति
New Law Update (2024)
धारा 72 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
जमानतीय
Compoundable?
Bare Act Text
(1) किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने वाला कोई न्यायालय अपने विवेकानुसार वारंट पर पृष्ठांकन द्वारा निदेश दे सकता है कि यदि ऐसा व्यक्ति न्यायालय के समक्ष विनिर्दिष्ट समय पर और तत्पश्चात् जब तक न्यायालय द्वारा अन्यथा निदेश न दिया जाए, अपनी हाजिरी के लिए पर्याप्त प्रतिभुओं सहित बंधपत्र निष्पादित करता है तो वह अधिकारी जिसे वारंट निदिष्ट है, ऐसी प्रतिभूति लेगा और ऐसे व्यक्ति को अभिरक्षा से निर्मुक्त कर देगा।
(2) पृष्ठांकन में यह कथन होगा—
(क) प्रतिभुओं की संख्या;
(ख) वह रकम जिसके लिए वे और वह व्यक्ति जिसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाला गया है, क्रमशः आबद्ध होंगे;
(ग) वह समय जिस पर उसे न्यायालय के समक्ष हाजिर होना है।
(3) जब कभी इस धारा के अधीन प्रतिभूति ली जाती है, तब वह अधिकारी जिसे वारंट निदिष्ट है, बंधपत्र न्यायालय को भेजेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 71(1)
यह उपधारा किसी भी न्यायालय को, जो गिरफ्तारी वारंट जारी करता है, यह निर्देश देने के लिए सशक्त करती है कि यदि व्यक्ति पर्याप्त प्रतिभुओं के साथ एक बंधपत्र प्रदान करता है, जो एक निर्दिष्ट समय पर न्यायालय में उसकी उपस्थिति की गारंटी देता है, तो उसे अभिरक्षा से रिहा किया जा सकता है। यह अनिवार्य रूप से वारंट के माध्यम से ही सशर्त गिरफ्तारी-पूर्व रिहाई की अनुमति देता है।
धारा 71(2)
यह उपधारा अनिवार्य करती है कि वारंट पर न्यायालय के पृष्ठांकन में आवश्यक प्रतिभुओं की सटीक संख्या, वह मौद्रिक राशि जिसके लिए प्रतिभू और गिरफ्तार व्यक्ति दोनों आबद्ध होंगे, और व्यक्ति के न्यायालय में उपस्थित होने का सटीक समय स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट होना चाहिए। ये विवरण वारंट के उचित निष्पादन और उसके बाद की रिहाई के लिए महत्वपूर्ण हैं।