अध्याय 6

CrPC Section 87 in Hindi: समन के बदले या उसके अतिरिक्त वारंट जारी करना

New Law Update (2024)

धारा 70 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

Punishment​

प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) यदि ऐसे समन के जारी किए जाने के पहले या उसके जारी किए जाने के पश्चात् किन्तु उसके हाजिर होने के लिए नियत समय से पहले न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण प्रतीत होता है कि वह फरार हो गया है या समन का पालन नहीं करेगा; या
(2) यदि ऐसे समय पर वह हाजिर होने में असफल रहता है और यह साबित कर दिया जाता है कि समन की तामील सम्यक् रूप से ऐसे समय में कर दी गई थी कि तद्नुसार वह हाजिर हो सकता था और ऐसी असफलता के लिए कोई उचित प्रतिहेतु दर्शित नहीं किया जाता है।

Important Sub-Sections Explained

धारा 87(1) दं.प्र.सं.

यह उपधारा न्यायालय को किसी व्यक्ति के विरुद्ध समन जारी करने से पहले या तुरंत बाद भी वारंट जारी करने का अधिकार देती है, यदि न्यायालय को यह विश्वास करने का पुख्ता कारण प्रतीत होता है कि वह व्यक्ति फरार हो गया है या जानबूझकर समन का पालन नहीं करेगा।

धारा 87(2) दं.प्र.सं.

यह उपधारा न्यायालय को वारंट जारी करने की अनुमति देती है यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय पर हाजिर होने में असफल रहता है, भले ही उसे समन की सम्यक् तामील कर दी गई हो, और अपनी गैर-हाजिरी के लिए कोई उचित और वैध प्रतिहेतु प्रस्तुत नहीं कर पाता है।

Landmark Judgements

इंद्र मोहन गोस्वामी बनाम उत्तराखंड राज्य (2007):

सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि गैर-जमानती वारंट जारी करने की शक्ति का प्रयोग यांत्रिक रूप से नहीं किया जाना चाहिए। इसका प्रयोग विवेकपूर्ण और सावधानी से किया जाना चाहिए, सामान्यतः समन जारी होने और अभियुक्त के हाजिर न होने के बाद, या यदि यह विश्वास करने का पुख्ता कारण है कि अभियुक्त फरार हो गया है या समन का पालन नहीं करेगा। न्यायालय ने जोर दिया कि गिरफ्तारी वारंट सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी नहीं किया जाना चाहिए।

रघुवंश देवचंद भसीन बनाम महाराष्ट्र राज्य (2012):

इस निर्णय ने वारंट जारी करने वाले सिद्धांतों को दोहराया, इस बात पर जोर दिया कि ऐसी शक्ति, हालांकि धारा 87 दं.प्र.सं. के तहत उपलब्ध है, का प्रयोग सावधानी से और तभी किया जाना चाहिए जब बिल्कुल आवश्यक हो। इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि गैर-जमानती वारंट तभी जारी किए जाने चाहिए जब बाध्यकारी कारण मौजूद हों, जैसे कि अभियुक्त का फरार होना या जानबूझकर न्यायालय की प्रक्रिया से बचना, ताकि न्याय का निष्पक्ष प्रशासन सुनिश्चित हो सके।

Draft Format / Application

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