अध्याय VII
CrPC Section 94 in Hindi: चुराई हुई संपत्ति, कूटरचित दस्तावेजों आदि को रखने के लिए संदिग्ध स्थान की तलाशी।
New Law Update (2024)
बीएनएनएस की धारा 106
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
धारा 94: चुराई हुई संपत्ति, कूटरचित दस्तावेजों आदि को रखने के लिए संदिग्ध स्थान की तलाशी।
(1) यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को इत्तिला मिलने पर और ऐसी जांच के पश्चात्, जैसी वह आवश्यक समझे, यह विश्वास करने का कारण है कि कोई स्थान चुराई हुई संपत्ति के निक्षेप या विक्रय के लिए या किसी ऐसी आपत्तिजनक वस्तु के निक्षेप, विक्रय या उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है, जिसको यह धारा लागू होती है, या कि ऐसी कोई आपत्तिजनक वस्तु किसी स्थान में निक्षिप्त है, तो वह वारंट द्वारा किसी ऐसे पुलिस अधिकारी को, जो कांस्टेबल के पद से ऊपर का है, यह प्राधिकार दे सकेगा कि वह —
(क) ऐसे स्थान में ऐसी सहायता से प्रवेश करे, जैसी अपेक्षित हो;
(ख) उसकी वारंट में विनिर्दिष्ट रीति से तलाशी ले;
(ग) उसमें पाई गई किसी ऐसी संपत्ति या वस्तु पर कब्जा करे, जिसके बारे में उसे यह युक्तियुक्त संदेह है कि वह चुराई हुई संपत्ति है या ऐसी आपत्तिजनक वस्तु है जिसको यह धारा लागू होती है;
(घ) ऐसी संपत्ति या वस्तु को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए या अपराधी के मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए जाने तक उसकी घटनास्थल पर पहरेदारी करे, या अन्यथा किसी सुरक्षित स्थान में उसका व्ययन करे;
(ङ) ऐसे स्थान में पाए गए हर व्यक्ति को अभिरक्षा में ले और मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाए, जो किसी ऐसी संपत्ति या वस्तु के निक्षेप, विक्रय या उत्पादन से संसक्त रहा प्रतीत होता है और यह जानता है या उसे यह संदेह करने का युक्तियुक्त कारण है कि वह चुराई हुई संपत्ति है या यथास्थिति, ऐसी आपत्तिजनक वस्तु है जिसको यह धारा लागू होती है।
(2) आपत्तिजनक वस्तुएं, जिनको यह धारा लागू होती है, ये हैं—
(क) कूटरचित सिक्का;
(ख) धातु टोकन अधिनियम, 1889 (1889 का 1) के उल्लंघन में बनाई गई धातु के टुकड़े, या सीमा-शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 11 के अधीन तत्समय प्रवृत्त किसी अधिसूचना के उल्लंघन में भारत में लाए गए धातु के टुकड़े;
(ग) कूटरचित करेंसी नोट;
(घ) कूटरचित स्टांप;
(ङ) कूटरचित दस्तावेज;
(च) मिथ्या मुद्राएं;
(छ) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 292 में निर्दिष्ट अश्लील वस्तुएं;
(ज) खंड (क) से (च) में वर्णित किसी भी वस्तु के उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण या सामग्री।
Important Sub-Sections Explained
धारा 94(1)
यह उपधारा जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट, या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट को उन स्थानों की तलाशी के लिए वारंट जारी करने का अधिकार देती है जिन पर चुराई हुई संपत्ति या आपत्तिजनक वस्तुएं होने का संदेह है। यह एक पुलिस अधिकारी को, जो कांस्टेबल के पद से ऊपर का है, तलाशी लेने, अवैध वस्तुओं को जब्त करने और इसमें शामिल व्यक्तियों को अभिरक्षा में लेने के लिए दिए गए प्राधिकार को भी रेखांकित करती है।
धारा 94(2)
यह उपधारा स्पष्ट रूप से उन ‘आपत्तिजनक वस्तुओं’ को परिभाषित करती है जिनके लिए इस धारा के तहत तलाशी वारंट जारी किया जा सकता है। इसमें कूटरचित सिक्के, करेंसी नोट, स्टांप, कूटरचित दस्तावेज, मिथ्या मुद्राएं, अश्लील वस्तुएं (आईपीसी धारा 292 के अनुसार), और उनके उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण जैसी वस्तुएं शामिल हैं, जिससे तलाशी का दायरा निर्दिष्ट होता है।
Landmark Judgements
निज़ामुद्दीन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1977 क्रि.ला.ज. 1007 इलाहाबाद):
उच्च न्यायालय के इस निर्णय में इस बात पर जोर दिया गया कि मजिस्ट्रेट को धारा 94 सीआरपीसी के तहत वारंट जारी करने से पहले उचित जानकारी और जांच के आधार पर वास्तव में संतुष्ट होना चाहिए कि किसी स्थान में अवैध वस्तुएं होने का ‘विश्वास करने का कारण’ है। इस शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
पी. रामास्वामी बनाम पुलिस निरीक्षक (1998 (2) सीटीसी 580 मद्रास):
मद्रास उच्च न्यायालय ने धारा 94 सीआरपीसी के दायरे और अनुप्रयोग को स्पष्ट किया, यह दोहराते हुए कि यह मजिस्ट्रेटों को उन स्थानों के लिए तलाशी वारंट जारी करने का अधिकार देता है जिन पर धारा में परिभाषित चुराई हुई संपत्ति या आपत्तिजनक वस्तुएं होने का संदेह है, और ऐसी तलाशी और जब्ती के दौरान पुलिस अधिकारियों की संबंधित शक्तियों को रेखांकित करता है।