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भारतीय संविधान सभा की समितियाँ (Committees of Indian Constituent Assembly)

संविधान सभा की समितियाँ कोन-कोन सी है?

Table of Contents

संविधान सभा ने संविधान से सम्बंधित प्रावधानों को शामिल करने लिये समितियों के माध्यम से कार्य किया। कुछ प्रमुख समितियाँ निम्नलिखित हैं-

समिति का नामअध्यक्ष
प्रक्रिया विषयक नियम सम्बंधी समितिराजेन्द्र प्रसाद
संचालन समितिराजेन्द्र प्रसाद
वित्त एवं स्टाफ समितिराजेन्द्र प्रसाद
प्रत्यय-पत्र सम्बंधी समितिअलादि कृष्णास्वामी अय्यर
आवास समितिबी. पट्टाभि सीतारमैय्या
कार्य संचालन सम्बंधी समितिके.एम. मुन्शी
राष्ट्रीय ध्वज सम्बंधित तदर्थ समितिराजेन्द्र प्रसाद
राज्यों सम्बंधी समितिजवाहर लाल नेहरू
संविधान सभा के कार्य करण सम्बंधी समितिजी.वी. मावलंकर
मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यकों एवं जनजातीय और अपवर्जित क्षेत्रों सम्बंधी सलाहकारी समितिसरदार वल्लभ भाई पटेल
मौलिक अधिकारों सम्बंधी उप-समितिजे.बी. कृपलानी
पूर्वोत्तर सीमांत जनजातीय क्षेत्रों और आसाम के अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों सम्बंधी उपसमितिगोपीनाथ बारदोलोई
अपवर्जित और आंशिक रूप से अपवर्जित क्षेत्रों (असम के क्षेत्रों को छोड़कर) सम्बंधी उपसमितिए.वी. ठक्कर
संघीय शक्तियों सम्बंधी समितिजवाहर लाल नेहरू
संघीय संविधान समितिजवाहर लाल नेहरू
प्रारूप समितिबी. आर. अम्बेडकर

प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन कब हुआ था?

प्रारूप समिति संविधान सभा की सबसे महत्त्वपूर्ण समिति थी। इस समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ था। नए संविधान का प्रारूप बनाने की जिम्मेदारी इसी समिति के पास थी। इस समिति के निम्नलिखित सदस्य थे—

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर (अध्यक्ष)
  • एन. गोपाल स्वामी आयंगर
  • अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
  • कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी
  • एन. माधव राव
  • टी.टी. कृष्णामचारी
  • सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला
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नोट—दो सदस्यों, बी.एल. मित्र तथा डी.पी. खेतान के निधन के पश्चात उनकी जगह क्रमशः एन. माधवराव और टी.टी. कृष्णामचारी को सदस्य नियुक्त किया गया था।


प्रारूप समिति के प्रमुख कार्य क्या थे? (Functions of Drafting Committee)

  • प्रारूप समिति ने विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के उपरांत फरवरी 1948 में पहला प्रारूप प्रकाशित किया।
  • भारतीय नागरिकों को संविधान के प्रारूप पर परामर्श तथा संशोधन या अपने सुझाव देने हेतु 8 महीने का समय दिया गया।
  • नागरिकों की राय एवं सुझावों को सम्मिलित करने के पश्चात प्रारूप समिति ने दूसरा मसौदा 6 माह बाद, अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया।

संविधान की स्वीकृति (Adoption of Constitution)

  • डॉ. अम्बेडकर ने 4 नवम्बर 1948 को संविधान सभा में संविधान का अंतिम मसौदा प्रस्तुत किया। मसौदा के प्रावधानों पर 17 नवम्बर 1949 तक अध्यायवार विचार-विमर्श किया गया, इस दौरान कई प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हुई।
  • संविधान के मसौदे पर तीसरी बार विचार 14 नवम्बर 1949 को प्रारंभ हुआ तथा 26 नवम्बर 1949 को समाप्त हुआ। इसी दिन सभा के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए।
  • संविधान सभा में कुल 299 सदस्यों में से 284 सदस्य उपस्थित थे और उन्होंने हस्ताक्षर कर संविधान के मसौदे को स्वीकृति प्रदान की।
  • 26 नवम्बर 1949 को संविधान अंगीकृत किए जाने के कारण वर्तमान में इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • संविधान के मूल प्रावधानों में 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ सम्मिलित थीं।
  • संविधान अंगीकृत किए जाने के दिन अर्थात 26 नवम्बर 1949 से ही कई प्रावधान, जैसे नागरिकता, निर्वाचन, अंतरिम संसद आदि प्रभावी हो गए थे।
  • 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन संपन्न हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया।
  • 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान पूर्णतः प्रभावी हुआ।
  • संविधान निर्माण हेतु 60 देशों के संविधान का अध्ययन किया गया तथा इसके निर्माण में 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
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संविधान सभा के अन्य कार्य क्या थे?(Other Functions of Constituent Assembly)

  • 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया गया।
  • 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गान को स्वीकार किया गया।
  • 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत को मान्यता प्रदान की गई।
  • मई 1949 में राष्ट्रमंडल की सदस्यता को स्वीकार किया गया।

संविधान सभा की आलोचना (Criticism of the Constituent Assembly)

संविधान सभा की संरचना एवं कार्यशैली को लेकर आलोचकों ने निम्नलिखित आक्षेप प्रस्तुत किए—

  • संविधान सभा संप्रभु निकाय नहीं थी, क्योंकि इसका गठन कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के आधार पर हुआ था। यह भी कहा जाता था कि बैठकों से पूर्व ब्रिटिश शासन की अनुमति लेनी पड़ती थी, किंतु इसके लिए कोई औपचारिक प्रावधान नहीं था। स्वतंत्रता अधिनियम प्रभावी हो जाने के पश्चात कैबिनेट मिशन की शर्तें स्वतः निष्प्रभावी हो गईं।
  • संविधान सभा भारतीय जनता का पूर्णतः प्रतिनिधित्व नहीं करती थी, क्योंकि इसका गठन सीमित मताधिकार के आधार पर हुआ था।
  • संविधान सभा में कांग्रेस का वर्चस्व था। संविधान विशेषज्ञ ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार— “संविधान सभा एक दलीय देश की एक दलीय निकाय थी। सभा ही कांग्रेस थी और कांग्रेस ही भारत।”
  • संविधान सभा में वकीलों एवं राजनीतिज्ञों का वर्चस्व था। आलोचकों के अनुसार, एक कृषि प्रधान देश का संविधान वकीलों द्वारा तैयार किया गया, जिसमें किसानों एवं मजदूरों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
  • संविधान सभा में हिंदू समुदाय का वर्चस्व था। विंस्टन चर्चिल के अनुसार, संविधान सभा ने “भारत के केवल एक विशिष्ट समुदाय का प्रतिनिधित्व किया।”
  • संविधान निर्माण में अत्यधिक समय व्यतीत हुआ। आलोचकों का मत था कि अन्य देशों के संविधान अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हुए, जबकि भारतीय संविधान निर्माण में अधिक समय लगा।
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FAQs

प्रारूप समिति में 7 सदस्य कौन-कौन थे

डॉ. भीमराव अम्बेडकर (अध्यक्ष), एन. गोपाल स्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी, एन. माधव राव, टी.टी. कृष्णामचारी, सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला

प्रारूप समिति का गठन कब और किसने किया था

प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा द्वारा किया गया।

झंडा समिति के अध्यक्ष कौन थे

राष्ट्रीय ध्वज सम्बंधित तदर्थ समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।

संविधान का मसौदा किसने तैयार किया था

प्रारूप समिति ने।

मसौदा समिति के सात सदस्य कौन हैं

डॉ. भीमराव अम्बेडकर, एन. गोपाल स्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी, एन. माधव राव, टी.टी. कृष्णामचारी, सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला

डीपी खेतान की जगह किसने ली

टी.टी. कृष्णामचारी

संविधान की स्वीकृति कब हुई थी

26 नवम्बर 1949 को

संविधान कब लागू हुआ और इसे किसने अंगीकृत किया था

26 जनवरी 1950 को यह पूरी तरह से प्रभावी हुआ। संविधान सभा द्वारा इसे 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया गया।

संविधान गौरव दिवस कब मनाया जाता है

26 नवम्बर को

भारतीय संविधान की आलोचना क्या है

संविधान सभा संप्रभु नहीं थी, पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं था, कांग्रेस का वर्चस्व था, किसानों-मजदूरों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, हिंदू समुदाय का वर्चस्व था, और संविधान निर्माण में अधिक समय लगा

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