1. प्रस्तावना
भारत के प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी भाग में स्थित ‘मध्य प्रदेश’, अपनी विशिष्ट भौगोलिक अवस्थिति के कारण वस्तुतः भारत का ‘हृदय स्थल’ (Heartland) कहलाता है। यह राज्य न केवल भौगोलिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी भारत का केंद्र बिंदु है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने इस राज्य की केंद्रीय स्थिति को देखते हुए इसे ‘हृदय प्रदेश’ की संज्ञा दी थी। यह एक पूर्णतः भू-आवेष्ठित (Land-locked) राज्य है, जिसका तात्पर्य यह है कि इसकी सीमा न तो किसी अंतर्राष्ट्रीय सीमा को स्पर्श करती है और न ही किसी समुद्री तट को।
क्षेत्रफल एवं विस्तार (Area and Expansion)
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 3,08,252 वर्ग किलोमीटर है।
- राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: यह भारत के कुल क्षेत्रफल (32,87,263 वर्ग किमी) का लगभग 9.38% भाग कवर करता है।
- स्थान: क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान के पश्चात मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। (वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के विभाजन से पूर्व यह प्रथम स्थान पर था)।
- विवादित तथ्य: किरार घाटी (अमरकंटक क्षेत्र) विवाद के कारण कभी-कभी क्षेत्रफल 3,08,245 वर्ग किमी भी उल्लेखित मिलता है, परंतु म.प्र. सरकार 3,08,252 वर्ग किमी को ही मान्य करती है।
अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार (Latitudinal and Longitudinal Extension)
मध्य प्रदेश का विस्तार उत्तरी गोलार्ध और पूर्वी गोलार्ध में स्थित है। इसका सटीक विस्तार निम्नलिखित है:
- अक्षांशीय विस्तार (Latitude): 21° 6′ उत्तरी अक्षांश (बुरहानपुर) से 26° 30′ उत्तरी अक्षांश (मुरैना) तक।
- देशांतरीय विस्तार (Longitude): 74° 9′ पूर्वी देशांतर (अलीराजपुर) से 82° 48′ पूर्वी देशांतर (सिंगरौली) तक।
राज्य का ज्यामितीय विस्तार
- उत्तर से दक्षिण की लंबाई: 605 किलोमीटर (मुरैना से बुरहानपुर)।
- पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई: 870 किलोमीटर (सिंगरौली से अलीराजपुर)।
- समय मानक: राज्य के सबसे पूर्वी बिंदु (सिंगरौली) और सबसे पश्चिमी बिंदु (अलीराजपुर) के मध्य लगभग 34 मिनट का समयांतर पाया जाता है। भारत की मानक समय रेखा (82.5°) एकमात्र जिले सिंगरौली से होकर गुजरती है।
कर्क रेखा (Tropic of Cancer)
कर्क रेखा (23° 30′ उत्तरी अक्षांश) मध्य प्रदेश को लगभग दो बराबर भागों में विभाजित करती है। यह रेखा मालवा के पठार के ठीक मध्य से और नर्मदा नदी के लगभग समानांतर गुजरती है। कर्क रेखा पर स्थित 14 जिले (पश्चिम से पूर्व के क्रम में): रतलाम → उज्जैन → आगर-मालवा → राजगढ़ → सीहोर → भोपाल → विदिशा → रायसेन → सागर → दमोह → कटनी → जबलपुर → उमरिया → शहडोल।
2. सीमावर्ती प्रदेश एवं प्रशासनिक भूगोल
मध्य प्रदेश की सीमाएं 5 राज्यों को स्पर्श करती हैं। इसे याद रखने के लिए एक रोचक सूत्र (Mnemonic) प्रचलित है: “उत्तर मच्छर (MCHHR) गुरू” (अर्थात् उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात)।
सीमा विस्तार एवं पड़ोसी राज्यों के साथ अंतर्संबंध
मध्य प्रदेश की सीमा रेखा सर्वाधिक लंबी उत्तर प्रदेश के साथ और सबसे कम (न्यूनतम) गुजरात के साथ लगती है।
(A) पड़ोसी राज्यों से स्पर्श करने वाले मध्य प्रदेश के जिले
- उत्तर प्रदेश (सर्वाधिक सीमा): वर्तमान में म.प्र. के 14 जिले उ.प्र. को स्पर्श करते हैं।
- जिले: मुरैना, भिण्ड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर (नया जिला), रीवा, मऊगंज (नया जिला), सिंगरौली।
- राजस्थान (10 जिले): झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना।
- महाराष्ट्र (9 जिले): अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खण्डवा, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना (नया जिला), सिवनी, बालाघाट।
- छत्तीसगढ़ (7 जिले): सिंगरौली, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट।
- गुजरात (2 जिले): झाबुआ तथा अलीराजपुर।
(B) मध्य प्रदेश की सीमा से लगे पड़ोसी राज्यों के जिले
- उत्तर प्रदेश के 12 जिले: आगरा, इटावा, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज (इलाहाबाद), मिर्जापुर, सोनभद्र।
- छत्तीसगढ़ के 7 जिले: बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, मुंगेली, बिलासपुर, कबीरधाम, राजनांदगांव।
- राजस्थान के 10 जिले: बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़, बारां, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर।
- गुजरात के 2 जिले: छोटा उदयपुर और दाहोद।
- महाराष्ट्र के 9 जिले: नंदुरबार, धुले, जलगांव, बुलढाना, अमरावती, नागपुर, भंडारा, गोंदिया।
3. मध्य प्रदेश का भौतिक/प्राकृतिक विभाजन (Physiographic Divisions)
भू-वैज्ञानिक दृष्टि से मध्य प्रदेश प्राचीनतम ‘गोंडवाना लैंड’ (Gondwana Land) का अभिन्न अंग है। ‘फिजियोग्राफी मैप ऑफ इंडिया’ और भौगोलिक संरचना के आधार पर मध्य प्रदेश को मुख्य रूप से 3 वृहद प्रदेशों में और उप-विभाजन के तौर पर 7 भौतिक भागों में वर्गीकृत किया गया है:
(I) मध्य उच्च प्रदेश (Central Highlands)
यह प्रदेश नर्मदा-सोन घाटी के उत्तर में स्थित है और प्रदेश का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घेरता है। इसका आकार त्रिभुजाकार है। इसके अंतर्गत 5 उप-विभाग आते हैं:
1. मालवा का पठार (Malwa Plateau)
- विस्तार: यह प्रदेश का सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्र (लगभग 28%) है। इसका विस्तार 20° 17′ से 25° 8′ उत्तरी अक्षांश तथा 74° 20′ से 79° 20′ पूर्वी देशांतर तक है।
- निर्माण: इसका निर्माण क्रिटेशियस काल में ज्वालामुखी उद्भेदन से निकले ‘दक्कन ट्रैप’ की बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है। इसी कारण यहाँ काली मिट्टी (Black Soil) की प्रचुरता है, जो कपास और सोयाबीन के लिए सर्वोत्तम है।
- जिले: इंदौर, उज्जैन, देवास, आगर, राजगढ़, धार, झाबुआ, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, गुना आदि।
- जलवायु: चीनी यात्री फाह्यान ने मालवा की जलवायु को “विश्व की सर्वश्रेष्ठ जलवायु” कहा था (सम जलवायु)।
- प्रमुख चोटियाँ:
- सिगार (881 मीटर) – सर्वोच्च चोटी।
- जानापाव (854 मीटर) – चंबल का उद्गम।
- धजारी (810 मीटर)।
- नदियाँ: चंबल, क्षिप्रा, कालीसिंध, पार्वती, बेतवा, माही। यह पठार नर्मदा और चंबल के मध्य एक स्पष्ट जल-विभाजक (Water Divide) का कार्य करता है।
2. मध्य भारत का पठार (Central India Plateau)
- अवस्थिति: यह राज्य के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है। इसे “चंबल का उपार्द्र प्रदेश” भी कहा जाता है।
- विशेषता: यह क्षेत्र जलोढ़ मिट्टी से निर्मित है, लेकिन चंबल नदी द्वारा निर्मित महाखड्डों (Ravines/Behads) के कारण मृदा अपरदन (Soil Erosion) से बुरी तरह प्रभावित है।
- जिले: भिण्ड, मुरैना, श्योपुर, ग्वालियर, शिवपुरी।
3. बुंदेलखंड का पठार (Bundelkhand Plateau)
- भू-संरचना: यह अति प्राचीन नीस (Gneiss) और ग्रेनाइट चट्टानों (प्री-कैम्ब्रियन युग) से निर्मित है। यहाँ की स्थलाकृति उबड़-खाबड़ है।
- मिट्टी: लाल और पीली मिट्टी का मिश्रण यहाँ पाया जाता है, जो मोटे अनाजों के लिए उपयुक्त है।
- सर्वोच्च चोटी: सिद्धबाबा की पहाड़ी (1172 मीटर)।
- नदियाँ: बेतवा (बुंदेलखंड की जीवन रेखा), केन, धसान, सिंध।
4. रीवा-पन्ना का पठार (Rewa-Panna Plateau)
- अन्य नाम: इसे ‘विन्ध्यन कगारी क्षेत्र’ (Vindhyan Scarp Land) भी कहते हैं।
- संरचना: यह विन्ध्यन शैल समूह (कड़प्पा और विन्ध्यन) से बना है। यहाँ चूना पत्थर (Limestone) और हीरा (Diamond) के भंडार प्रचुर मात्रा में हैं।
- विस्तार: रीवा, पन्ना, सतना, दमोह, सागर जिले।
- नदियाँ: टोंस (तमसा), केन, बीहड़। चचाई, केवटी और बहुटी जैसे प्रमुख जलप्रपात इसी पठार की कगारों से गिरते हैं।
5. नर्मदा-सोन घाटी (Narmada-Son Valley)
- प्रकृति: यह भारत की सबसे बड़ी भ्रंश घाटी (Rift Valley) है। यह राज्य का सबसे निचला हिस्सा है, जो पूर्व से पश्चिम की ओर विस्तृत है।
- विस्तार: 22° 30′ से 23° 45′ उत्तरी अक्षांश तक। क्षेत्रफल लगभग 86,000 वर्ग किमी (26%) है।
- महत्व: इसे “मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़” कहा जाता है। यहाँ गहरी काली मिट्टी पाई जाती है।
- सीमा: इसके उत्तर में विंध्याचल पर्वत और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत स्थित हैं।
(II) सतपुड़ा-मैकल श्रेणी (Satpura-Maikal Range)
यह राज्य की दक्षिणी सीमा पर स्थित एक ‘ब्लॉक पर्वत’ (Block Mountain) है, जो नर्मदा और ताप्ती नदियों के मध्य जल विभाजक है। इसके तीन प्रमुख उप-विभाग हैं:
- पश्चिमी भाग (राजपीपला श्रेणी): यह गुजरात और बुरहानपुर दर्रे तक विस्तृत है। इसमें असीरगढ़ की पहाड़ियाँ, अखरानी, बड़वानी और बीजागढ़ की पहाड़ियाँ शामिल हैं।
- मध्य भाग (महादेव श्रेणी): यह खंडवा से सिवनी तक विस्तृत है। मध्य प्रदेश की सर्वोच्च चोटी धूपगढ़ (1350 मीटर) यहीं पचमढ़ी में स्थित है।
- पूर्वी भाग (मैकल श्रेणी): यह अर्द्धचंद्राकार (Crescent shaped) है। इसका विस्तार बालाघाट, डिंडोरी और अनूपपुर तक है। अमरकंटक (1065 मीटर) मैकल श्रेणी की प्रमुख गांठ है, जहाँ से नर्मदा, सोन और जोहिला नदियाँ निकलती हैं।
(III) पूर्वी पठार या बघेलखंड का पठार (Eastern Plateau)
- अवस्थिति: यह राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है।
- विशेषता: यह गोंडवाना शैल समूह और विन्ध्यन शैलों का मिलन स्थल है।
- संसाधन: यह क्षेत्र कोयला भंडारों (सिंगरौली-सुहागपुर) के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘ऊर्जा राजधानी’ (सिंगरौली) का घर कहा जाता है।
- प्रमुख नदियाँ: सोन, जोहिला, गोपद, बनास।
4. मध्य प्रदेश की भू-गर्भिक संरचना (Geological Structure & Rock Systems)
चट्टानों की प्रकृति और निर्माण काल के आधार पर मध्य प्रदेश की भू-गर्भिक संरचना को निम्नलिखित शैल समूहों में वर्गीकृत किया गया है:
| क्र. | शैल समूह (Rock System) | क्षेत्र एवं विस्तार | खनिज एवं विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1. | आद्य महाकल्प (Archaean) | बुंदेलखंड का पठार, बघेलखंड का पूर्वी भाग। | यह सबसे प्राचीन और आधारभूत चट्टानें हैं। इनमें जीवाश्म (Fossils) नहीं पाए जाते। प्रमुख रूप से ग्रेनाइट और नीस चट्टानें। |
| 2. | धारवाड़ क्रम (Dharwar) | बालाघाट और छिंदवाड़ा क्षेत्र। | यह आर्कियन चट्टानों के अपरदन से बनी हैं। चिल्पी श्रेणी: बालाघाट (मैंगनीज, तांबा)। सौंसर श्रेणी: छिंदवाड़ा (मैंगनीज)। |
| 3. | कड़प्पा/पुराना संघ (Cuddapah) | बिजावर (छतरपुर-पन्ना), ग्वालियर। | बिजावर श्रेणी: यहाँ हीरे (Diamonds) वाली कांग्लोमरेट चट्टानें पाई जाती हैं। |
| 4. | विन्ध्यन क्रम (Vindhyan) | रीवा से लेकर चंबल तक (विंध्य पर्वत क्षेत्र)। | भवन निर्माण सामग्री के लिए प्रसिद्ध। चूना पत्थर, बलुआ पत्थर। उपविभाग: भांडेर, कैमूर और रीवा श्रेणियाँ। सांची का स्तूप इसी पत्थर से बना है। |
| 5. | गोंडवाना क्रम (Gondwana) | सतपुड़ा और बघेलखंड क्षेत्र (पेंच, सोन घाटी)। | यह भारत का 98% कोयला प्रदान करने वाला शैल समूह है। श्रेणियाँ: तालचेर, पेंच घाटी, मोहपानी। |
| 6. | दक्कन ट्रैप (Deccan Trap) | संपूर्ण मालवा पठार और निमाड़ क्षेत्र। | ज्वालामुखी लावा (बेसाल्ट) के जमने से निर्मित। इसके क्षरण से काली मिट्टी (रेगुर) का निर्माण हुआ है। |
| 7. | तृतीयक (Tertiary) | दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के छिटपुट भाग। | नदी घाटियों में जलोढ़ निक्षेप। |
5. मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्वत (Major Mountain Ranges)
राज्य की स्थलाकृति में दो प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं का योगदान है:
(A) विंध्याचल पर्वत श्रेणी (Vindhyachal Range)
- प्रकृति: यह एक अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) है, जो उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करता है।
- विस्तार: यह पश्चिम में जोबट (गुजरात सीमा) से लेकर पूर्व में बिहार के सासाराम तक विस्तृत है।
- उप-विभाजन:
- विंध्यन श्रेणी (पश्चिमी भाग): मांडू की पहाड़ियाँ, जानापाव, काकरी-बर्डी।
- भांडेर श्रेणी (मध्य भाग): इसमें विंध्य पर्वत की सबसे ऊँची चोटी ‘सद्भावना शिखर’ (गुडविल पीक/कालुमार – 752 मी.) स्थित है जो दमोह जिले में है।
- कैमूर श्रेणी (पूर्वी भाग): यह यमुना और सोन नदी के बीच जल-द्विभाजक का कार्य करती है। त्रिकुटा पर्वत (मैहर) इसी का हिस्सा है।
(B) सतपुड़ा-मैकल श्रेणी (Satpura-Maikal Range)
- प्रकृति: यह एक ब्लॉक पर्वत है जो ग्रेनाइट और बेसाल्ट चट्टानों से बना है।
- महत्व:
- राजपीपला: पश्चिमी सीमा, ताप्ती नदी का उद्गम (मुलताई, बैतूल के पास)। असीरगढ़ का किला (दक्षिण का प्रवेश द्वार) यहीं है।
- महादेव श्रेणी: राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन ‘पचमढ़ी’ यहीं है। यहाँ जैव-विविधता सर्वाधिक है।
- मैकल श्रेणी: इसे ‘वाटरशेड’ (Watershed) कहा जाता है क्योंकि यहाँ से नदियाँ अलग-अलग दिशाओं में बहती हैं।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
मध्य प्रदेश की भौगोलिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है। यहाँ एक ओर मालवा का समतल उपजाऊ पठार है, तो दूसरी ओर सतपुड़ा और विंध्याचल की दुर्गम पर्वतमालाएं। नर्मदा और सोन जैसी नदियाँ न केवल भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण करती हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन रेखा भी हैं। भू-गर्भिक दृष्टि से यह राज्य खनिज संपदा (हीरा, तांबा, मैंगनीज, कोयला) से परिपूर्ण है, जो इसे भारत के आर्थिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाता है।