व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 123 के तहत यह शक्ति प्राप्त है।
व्याख्या: अनुच्छेद 176 के अनुसार, राज्यपाल विधानसभा के प्रत्येक आम चुनाव के पश्चात प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में विधानसभा में विशेष अभिभाषण देते हैं।
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 333 के तहत, यदि राज्यपाल की राय है कि राज्य की विधानसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, तो वह उस समुदाय के एक सदस्य को विधानसभा में मनोनीत कर सकता था। (नोट: 104वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इस आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया गया है)।
1. अनुच्छेद 157 राज्यपाल के पद के लिये दो योग्यता निर्धारित करता है।
2. राज्यपाल राज्य व्यवस्थापिका का सदस्य होना चाहिए।
3. नियुक्ति से पूर्व राज्यपाल को 40 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेनी चाहिए।
ऊपर दिये गये कौन सा/से विवरण सही है –
व्याख्या: अनुच्छेद 157 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति के लिए दो योग्यताएं हैं: (1) वह भारत का नागरिक हो, और (2) उसने 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो। कथन 2 गलत है क्योंकि राज्यपाल संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं होना चाहिए। कथन 3 गलत है क्योंकि आयु सीमा 35 वर्ष है, न कि 40 वर्ष।
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
व्याख्या: राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। जबकि मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) और राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों (अनुच्छेद 316) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
व्याख्या: अनुच्छेद 153 के अनुसार, ‘प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा’। परन्तु एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है (7वां संविधान संशोधन, 1956)।
व्याख्या: अनुच्छेद 165 के अनुसार राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। उसकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त पद धारण करता है।
व्याख्या: राजस्थान में पूर्व-सैन्यकर्मियों के कल्याण के लिए गठित ‘समेकित निधि’ (Amalgamated Fund) की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पदेन राज्यपाल होते हैं।
व्याख्या: राज्यपाल केंद्र सरकार (राष्ट्रपति) का प्रतिनिधि होता है और राज्य में संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है। अनुच्छेद 156 के अनुसार वह राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद धारण करता है।