राजस्थान के मेले एवं उत्सव

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प्रस्तावना

राजस्थान, जिसे ‘रंगीला राजस्थान’ के नाम से जाना जाता है, अपनी जीवंत संस्कृति, लोक परंपराओं और मेलों के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ के मेले केवल वाणिज्यिक केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक मिलन, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के सशक्त माध्यम हैं। राज्य में पशु मेलों का आर्थिक महत्व अत्यधिक है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

प्रस्तुत अध्ययन में राजस्थान के प्रमुख पशु मेलों, लोक मेलों और उर्स का विस्तृत, अद्यतन और विश्लेषणात्मक विवरण दिया गया है।

(अ) राजस्थान के राज्य स्तरीय पशु मेले (State Level Cattle Fairs)

राजस्थान के पशु मेले अपनी नस्लों (Breeds) और आर्थिक योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका आयोजन मुख्य रूप से पशुपालन विभाग द्वारा किया जाता है।

1. श्री बलदेव पशु मेला (Shri Baldeo Cattle Fair)

  • स्थान: मेड़ता सिटी (ज़िला: नागौर)।
  • समय: चैत्र मास, शुक्ल पक्ष (सुदी) प्रतिपदा से पूर्णिमा तक।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: यह मेला प्रसिद्ध किसान नेता और स्वतंत्रता सेनानी श्री बलदेव राम मिर्धा की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
  • नस्ल व विशेषता: यह मेला मुख्य रूप से नागौरी नस्ल के बैलों के लिए प्रसिद्ध है। नागौरी बैल अपनी कृषि क्षमता और दौड़ने की शक्ति के लिए जाने जाते हैं। यहाँ बैलों की रस्सा-कशी और अन्य प्रतियोगिताएँ भी आयोजित होती हैं।

2. श्री वीर तेजाजी पशु मेला (Shri Veer Tejaji Cattle Fair)

  • स्थान: परबतसर (ज़िला: डीडवाना-कुचामन) [पूर्व में नागौर]।
  • समय: श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक।
  • महत्व: लोक देवता वीर तेजाजी की स्मृति में आयोजित यह मेला राजस्थान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पशु मेला है।
  • आर्थिक पक्ष: राजस्व की दृष्टि से (राज्य सरकार को होने वाली आय के आधार पर) यह लंबे समय तक राजस्थान का सबसे बड़ा मेला रहा है। यहाँ उत्तम किस्म के नागौरी बैल और बीकानेरी ऊंटों का क्रय-विक्रय होता है।

3. श्री रामदेव पशु मेला (Shri Ramdev Cattle Fair)

  • स्थान: मानासर (ज़िला: डीडवाना-कुचामन) [पूर्व में नागौर]।
  • समय: मार्गशीर्ष (अगहन) माह। यह मेला प्रतिपदा से शुरू होकर लगभग 15 दिनों तक चलता है।
  • नस्ल: यहाँ नागौरी किस्म के बैलों की सर्वाधिक बिक्री होती है। इस मेले का नामकरण लोक देवता बाबा रामदेव जी के नाम पर किया गया है।

4. गोमती सागर पशु मेला (Gomti Sagar Cattle Fair)

  • स्थान: झालरापाटन (ज़िला: झालावाड़)।
  • समय: वैशाख माह (सुदी पक्ष)।
  • नस्ल: यह मेला मालवी नस्ल के गोवंश के लिए प्रसिद्ध है।
  • क्षेत्रीय महत्व: यह हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा पशु मेला है। यह मेला गोमती सागर तालाब के किनारे आयोजित होता है, जो इसे प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करता है।

5. चन्द्रभागा पशु मेला (Chandrabhaga Cattle Fair)

  • स्थान: झालरापाटन (ज़िला: झालावाड़)।
  • समय: कार्तिक माह (कार्तिक पूर्णिमा के आस-पास)।
  • सांस्कृतिक व आर्थिक महत्व: यह मेला चंद्रभागा नदी के किनारे आयोजित होता है। यहाँ दीपदान की परंपरा भी है। पशु मेले के रूप में यह मालवी नस्ल के बैलों, गायों और ऊंटों के व्यापार का प्रमुख केंद्र है।

6. श्री कार्तिक (पुष्कर) पशु मेला (Pushkar Cattle Fair)

  • स्थान: पुष्कर (ज़िला: अजमेर)।
  • समय: कार्तिक माह (शुक्ल अष्टमी से मार्गशीर्ष दूज तक, मुख्य स्नान कार्तिक पूर्णिमा को)।
  • नस्ल: यह मेला गिर नस्ल (रेंडा/अजमेरा) की गायों और ऊंटों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ख्याति: यह राजस्थान का सबसे रंगीन और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मेला है। इसे ‘ऊंटों का मेला’ भी कहा जाता है। यह पर्यटन और संस्कृति का अद्भुत संगम है।

7. श्री गोगामेड़ी पशु मेला (Gogamedi Cattle Fair)

  • स्थान: गोगामेड़ी, नोहर (ज़िला: हनुमानगढ़)।
  • समय: भाद्रपद माह (गोगा नवमी के अवसर पर)।
  • नस्ल: यहाँ हरियाणवी नस्ल के गोवंश का प्रमुखता से व्यापार होता है, क्योंकि यह क्षेत्र हरियाणा सीमा के निकट है।
  • विशेषता: यह राजस्थान का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पशु मेला है।

8. महाशिवरात्रि पशु मेला (Mahashivratri Cattle Fair)

  • स्थान: करौली।
  • समय: फाल्गुन मास (कृष्ण पक्ष, शिवरात्रि के अवसर पर)।
  • नस्ल: यह मेला हरियाणवी नस्ल और स्थानीय गोवंश के लिए जाना जाता है। करौली रियासत के समय से ही इसका विशेष महत्व रहा है।

9. श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला (Shri Jaswant Exhibition and Cattle Fair)

  • स्थान: भरतपुर।
  • समय: आश्विन मास (शुक्ल पक्ष)।
  • नस्ल: यहाँ हरियाणवी नस्ल का क्रय-विक्रय सर्वाधिक होता है। यह मेला रियासतकालीन शासक महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में आयोजित होता है।

10. श्री मल्लीनाथ पशु मेला (Shri Mallinath Cattle Fair)

  • स्थान: तिलवाड़ा (ज़िला: बालोतरा) [पूर्व में बाड़मेर]।
  • समय: चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक।
  • भौगोलिक स्थिति: यह मेला लूनी नदी के तट पर आयोजित होता है।
  • ऐतिहासिकता: यह राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला माना जाता है। देशी महीनों (हिंदी कैलेंडर) के अनुसार यह वर्ष का सबसे पहला प्रमुख पशु मेला है।
  • नस्ल: यहाँ मुख्य रूप से थारपारकर (जिसे मालाणी नस्ल भी कहते हैं) और कांकरेज नस्ल के पशुओं का व्यापार होता है। घोड़ों (काठियावाड़ी/सिंधी) का व्यापार भी यहाँ प्रमुख है।
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11. बहरोड़ पशु मेला (Behror Cattle Fair)

  • स्थान: बहरोड़ (ज़िला: कोटपूतली-बहरोड़) [पूर्व में अलवर]।
  • नस्ल: यह मेला मुर्रा नस्ल की भैंस के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। इसे भैंसों का प्रमुख मेला भी कहा जा सकता है।

12. बाबा रघुनाथ पुरी पशु मेला

  • स्थान: सांचौर [पूर्व में जालौर जिला]।
  • महत्व: यह सांचौर क्षेत्र का प्रमुख मेला है, जहाँ स्थानीय नस्ल के पशुओं (मुख्यतः कांकरेज) का व्यापार होता है।

13. सेवड़िया पशु मेला

  • स्थान: रानीवाड़ा (ज़िला: सांचौर) [पूर्व में जालौर]।
  • विशेष संदर्भ: रानीवाड़ा में राज्य की सबसे बड़ी दुग्ध डेयरी (Dairy) स्थापित है, जो इस क्षेत्र में पशुपालन की समृद्धि को दर्शाती है। यहाँ कांकरेज नस्ल के बैलों और मुर्रा भैंसों का व्यापार होता है।

(ब) राजस्थान के प्रमुख लोक व धार्मिक मेले (Folk & Religious Fairs)

राजस्थान के लोक मेले यहाँ की जनजातीय संस्कृति, भक्ति आंदोलन और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक हैं।

1. बेणेश्वर धाम मेला (Beneshwar Dham Fair)

  • स्थान: नवाटापरा गाँव (ज़िला: डूंगरपुर)।
  • संगम: सोम, माही और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर।
  • समय: माघ पूर्णिमा।
  • उपनाम: इसे “आदिवासियों का कुंभ”, “वागड़ का पुष्कर” तथा “भीलों का कुंभ” कहा जाता है।
  • विशेषता: यहाँ खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है। यह स्थल संत मावजी की तपोभूमि है, जिन्हें यहाँ ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

2. घोटिया अम्बा मेला (Ghotia Amba Fair)

  • स्थान: बारीगामा (ज़िला: बांसवाड़ा)।
  • समय: चैत्र अमावस्या।
  • उपनाम: इसे भी “भीलों का कुंभ” कहा जाता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहाँ रुके थे।

3. भूरिया बाबा / गौतमेश्वर मेला (Gautameshwar Fair)

  • स्थान: अरणोद (ज़िला: प्रतापगढ़)। (नोट: एक अन्य गौतमेश्वर मेला सिरोही में भी भरता है)।
  • समय: वैशाख पूर्णिमा।
  • उपनाम: इसे “मीणा जनजाति का कुंभ” कहा जाता है। मीणा जनजाति भूरिया बाबा की कभी झूठी कसम नहीं खाती।

4. चौथ माता का मेला (Chauth Mata Fair)

  • स्थान: चौथ का बरवाड़ा (ज़िला: सवाई माधोपुर)।
  • समय: माघ कृष्ण चतुर्थी (संकट चौथ/तिल चौथ)।
  • उपनाम: इसे “कंजर जनजाति का कुंभ” माना जाता है। चौथ माता कंजर समाज की कुलदेवी हैं।

5. गौर (सियावा) का मेला

  • स्थान: सियावा, आबू रोड (ज़िला: सिरोही)।
  • समय: वैशाख पूर्णिमा।
  • उपनाम: इसे “गरासिया जनजाति का कुंभ” कहते हैं। इस मेले में गरासिया युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी का चयन करते हैं।

6. सीताबाड़ी का मेला (Sitabari Fair)

  • स्थान: केलवाड़ा (ज़िला: बारां)।
  • समय: ज्येष्ठ अमावस्या।
  • उपनाम: इसे “सहरिया जनजाति का कुंभ” कहते हैं।
  • क्षेत्रीय महत्व: यह हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा लोक मेला है। यहाँ लक्ष्मण कुंड और सीता कुंड प्रमुख पवित्र स्थल हैं।

7. पुष्कर मेला (Pushkar Fair) – लोक पक्ष

  • स्थान: पुष्कर (अजमेर)।
  • समय: कार्तिक पूर्णिमा (मुख्य स्नान)।
  • महत्व:
    • यह मेरवाड़ा क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है।
    • इसे “तीर्थों का मामा” (कोकण तीर्थ) कहा जाता है। (तीर्थों का भांजा: मचकुंड, धौलपुर; तीर्थों की नानी: देवयानी, सांभर)।
    • यह राजस्थान का सबसे रंगीन मेला है, जहाँ विदेशी पर्यटक सर्वाधिक आते हैं।
    • यहाँ ब्रह्मा जी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है।

8. कपिल मुनि का मेला (Kapil Muni Fair)

  • स्थान: कोलायत (ज़िला: बीकानेर)।
  • समय: कार्तिक पूर्णिमा।
  • विशेषता: इस मेले का मुख्य आकर्षण कोलायत झील में “दीपदान” परंपरा है।
  • ऐतिहासिकता: कपिल मुनि ‘सांख्य दर्शन’ के प्रणेता थे। इसे “जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला” कहा जाता है। चारण जाति के लोग इस मेले में (कोलायत झील में) स्नान नहीं करते।

9. साहवा का मेला (Sahawa Fair)

  • स्थान: साहवा (ज़िला: चूरू)।
  • समय: कार्तिक पूर्णिमा।
  • महत्व: यह राजस्थान में सिख धर्म का सबसे बड़ा मेला है।

10. चन्द्रभागा मेला (धार्मिक)

  • स्थान: झालरापाटन (झालावाड़)।
  • समय: कार्तिक पूर्णिमा।
  • विवरण: चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित शिवालय में विशेष पूजन होता है। झालरापाटन को ‘घंटियों का शहर’ (City of Bells) कहा जाता है।

11. भर्तृहरि का मेला (Bhartrihari Fair)

  • स्थान: सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र (ज़िला: अलवर)।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल अष्टमी।
  • महत्व: यह उज्जैन के राजा और बाद में नाथ संप्रदाय के महान संत बने भर्तृहरि की तपोभूमि है।
  • उपनाम: इसे “कनफटे नाथों की तीर्थ स्थली” और “मत्स्य प्रदेश का सबसे बड़ा मेला” कहा जाता है।

12. रामदेवरा मेला (Ramdevra Fair)

  • स्थान: रामदेवरा/रुणेचा, पोकरण (ज़िला: जैसलमेर)।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से एकादशी तक।
  • महत्व: यह “सांप्रदायिक सद्भाव” का सबसे बड़ा मेला है, जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समान श्रद्धा से आते हैं।
  • आकर्षण: कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला “तेरहताली नृत्य” इसका मुख्य आकर्षण है। (तेरहताली नृत्य का उद्गम स्थल: पादरला गाँव, पाली)।
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13. बीजासणी माता का मेला

  • स्थान: लालसोट (ज़िला: दौसा)।
  • समय: चैत्र पूर्णिमा।

14. कजली तीज (सातूड़ी तीज) का मेला

  • स्थान: बूंदी।
  • समय: भाद्रपद कृष्ण तृतीया। (जबकि छोटी तीज जयपुर की श्रावण शुक्ल तृतीया को प्रसिद्ध है)।
  • विशेषता: बूंदी की कजली तीज की सवारी शाही ठाठ-बाट के लिए प्रसिद्ध है।

15. मचकुंड तीर्थ मेला

  • स्थान: धौलपुर।
  • समय: आश्विन शुक्ल पंचमी (ऋषि पंचमी के आस-पास भी स्नान होता है)।
  • उपनाम: इसे “तीर्थों का भांजा” कहा जाता है।

16. वीरपुरी का मेला

  • स्थान: मंडोर (ज़िला: जोधपुर)।
  • समय: श्रावण कृष्ण पंचमी (नाग पंचमी)।
  • महत्व: यहाँ नाग देवताओं की स्मृति में मेला भरता है।

17. लोटियों का मेला

  • स्थान: मंडोर (ज़िला: जोधपुर)।
  • समय: श्रावण शुक्ल पंचमी।

18. डोल मेला (Dol Mela)

  • स्थान: बारां।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (जलझूलनी एकादशी)।
  • उपनाम: इसे ‘श्रीजी का मेला’ भी कहते हैं। यहाँ देव विमानों की शोभायात्रा निकाली जाती है।

19. फूलडोल मेला (Phool Dol Fair)

  • स्थान: शाहपुरा (नवीन ज़िला: शाहपुरा) [पूर्व में भीलवाड़ा]।
  • समय: चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक।
  • महत्व: यह रामस्नेही संप्रदाय का सबसे प्रमुख मेला है। शाहपुरा रामस्नेही संप्रदाय की प्रधान पीठ (अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय) है।

20. अन्नकूट मेला

  • स्थान: नाथद्वारा (ज़िला: राजसमंद)।
  • समय: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (गोवर्धन पूजा)।
  • प्रसिद्धि: यहाँ श्रीनाथ जी के मंदिर में चावल और अनस का पहाड़ (अन्नकूट) बनाया जाता है। इसे “भीलों की लूट” की परंपरा के लिए भी जाना जाता है।

21. भोजन थाली परिक्रमा मेला

  • स्थान: कामां (ज़िला: डीग) [पूर्व में भरतपुर]।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल दूज।

22. श्री महावीर जी का मेला

  • स्थान: चंदनपुर (श्री महावीर जी), (ज़िला: करौली)।
  • समय: चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण द्वितीया तक। (मुख्य मेला: चैत्र शुक्ल त्रयोदशी)।
  • महत्व: यह जैन धर्म का सबसे बड़ा मेला है।
  • आकर्षण: मेले के दौरान निकलने वाली ‘जिनेन्द्र रथ यात्रा’ मुख्य आकर्षण होती है, जिसमें सभी समुदायों (विशेषकर मीणा और गुर्जर) की भागीदारी होती है।

23. ऋषभदेव जी (केसरिया नाथ जी) का मेला

  • स्थान: धुलेव (ज़िला: उदयपुर)।
  • समय: चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतला अष्टमी)।
  • सांप्रदायिक सद्भाव: इन्हें जैन ‘ऋषभदेव/आदिनाथ’ मानते हैं, भील आदिवासी ‘काला जी’ कहते हैं और वैष्णव ‘विष्णु का अवतार’ मानते हैं। यहाँ केसर का चढ़ावा अत्यधिक चढ़ाया जाता है, इसलिए इन्हें केसरिया नाथ जी कहते हैं।

24. चन्द्रप्रभु जी का मेला

  • स्थान: तिजारा (ज़िला: खैरथल-तिजारा) [पूर्व में अलवर]।
  • समय: फाल्गुन शुक्ल सप्तमी और श्रावण शुक्ल दशमी।
  • धर्म: यह प्रमुख जैन मेला है।

25. बाड़ा पद्मपुरा का मेला

  • स्थान: शिवदासपुरा (ज़िला: जयपुर ग्रामीण)।
  • धर्म: दिगंबर जैन संप्रदाय का अतिशय क्षेत्र।

26. रंगीन फव्वारों का मेला

  • स्थान: डीग (ज़िला: डीग) [पूर्व में भरतपुर]।
  • समय: फाल्गुन पूर्णिमा।
  • विशेषता: डीग अपने जल महलों (Water Palaces) के लिए प्रसिद्ध है।

27. डाडा पम्पाराम का मेला

  • स्थान: विजयनगर (ज़िला: अनूपगढ़) [पूर्व में श्रीगंगानगर]।
  • समय: फाल्गुन माह (7 दिवसीय मेला)।
  • समाज: यह सिंधी और सिख समुदाय की आस्था का केंद्र है।

28. बुड्ढा जोहड़ का मेला

  • स्थान: डाबला, रायसिंहनगर (ज़िला: अनूपगढ़) [पूर्व में श्रीगंगानगर]।
  • समय: श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या)।
  • महत्व: यह सिखों का प्रमुख तीर्थ स्थल और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है।

29. वृक्ष मेला (Khejarli Fair)

  • स्थान: खेजड़ली (ज़िला: जोधपुर ग्रामीण)।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी के दिन)।
  • महत्व: यह विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला है। यह 1730 ई. में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों द्वारा वृक्षों (खेजड़ी) की रक्षार्थ दिए गए बलिदान की स्मृति में भरता है।

30. डिग्गी कल्याण जी का मेला

  • स्थान: डिग्गी, मालपुरा (ज़िला: टोंक)।
  • आस्था: कल्याण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। मुस्लिम इन्हें ‘कलह पीर’ मानते हैं।
  • समय: श्रावण अमावस्या, वैशाख पूर्णिमा और भाद्रपद शुक्ल एकादशी (जलझूलनी) को लक्खी मेले भरते हैं।

31. गलता तीर्थ का मेला

  • स्थान: गलता जी (जयपुर)।
  • समय: मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा।
  • महत्व: यह रामानुज संप्रदाय की प्रधान पीठ है। इसे ‘उत्तर तोताद्री’ और ‘मंकी वैली’ (Monkey Valley) के नाम से जाना जाता है।

32. मातृकुण्डिया का मेला

  • स्थान: राश्मि (ज़िला: चित्तौड़गढ़)।
  • समय: वैशाख पूर्णिमा।
  • उपनाम: इस स्थान को “राजस्थान का हरिद्वार” कहा जाता है क्योंकि यहाँ लक्ष्मण झूला और अस्थि विसर्जन की परंपरा है।

33. गणगौर मेला (Gangaur Fair)

  • स्थान: जयपुर (सर्वाधिक प्रसिद्ध)।
  • समय: चैत्र शुक्ल तृतीया।
  • विवरण:
    • जयपुर की गणगौर सवारी विश्व प्रसिद्ध है।
    • जैसलमेर: यहाँ बिना ईसर (शिव) की गवर (पार्वती) पूजी जाती है और सवारी चैत्र शुक्ल चतुर्थी को निकलती है।
    • उदयपुर: कर्नल जेम्स टॉड ने उदयपुर की गणगौर का वर्णन किया है। यहाँ ‘धींगा गवर’ का मेला (वैशाख कृष्ण तृतीया) प्रसिद्ध है।

34. राणी सती का मेला

  • स्थान: झुंझुनू।
  • पूर्व स्थिति: यह मेला भाद्रपद अमावस्या को भरता था।
  • वर्तमान स्थिति: सती प्रथा निवारण अधिनियम-1987 के तहत 1988 से इस मेले के महिमामंडन पर रोक लगा दी गई है। राणी सती को ‘दादी जी’ के नाम से पूजा जाता है (मूल नाम: नारायणी देवी)।
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35. त्रिनेत्र गणेश मेला

  • स्थान: रणथम्भौर दुर्ग (ज़िला: सवाई माधोपुर)।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी)।
  • विशेषता: यह भारत का एकमात्र मंदिर है जहाँ गणेश जी के मात्र मुख की पूजा होती है और वे त्रिनेत्र (तीन आँखों वाले) रूप में विराजमान हैं।

36. चुंधी तीर्थ मेला

  • स्थान: जैसलमेर।
  • समय: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी।
  • संदर्भ: यह गणेश जी का मेला है।
  • अतिरिक्त जानकारी: ‘हेरम्ब गणपति’ मंदिर बीकानेर में है, जहाँ गणेश जी को मूषक के बजाय शेर (सिंह) पर सवार दिखाया गया है।

37. मानगढ़ धाम का मेला

  • स्थान: मानगढ़ पहाड़ी (ज़िला: बांसवाड़ा)।
  • समय: आश्विन पूर्णिमा।
  • ऐतिहासिक महत्व: यह मेला महान समाज सुधारक गोविंद गिरी और 1913 में हुए आदिवासी नरसंहार (जिसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है) की स्मृति में भरता है।

38. सोनाणा खेतलाजी का मेला

  • स्थान: सोनाणा (ज़िला: पाली)।
  • समय: चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (धुलंडी के बाद)।
  • समाज: हकलाने वाले बच्चों का यहाँ इलाज माना जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण मेले (संक्षिप्त सूची)

  1. गोगाजी का मेला: ददरेवा (चूरू) और गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) में भाद्रपद कृष्ण नवमी को।
  2. तेजाजी का मेला: परबतसर (डीडवाना-कुचामन), सुरसुरा (अजमेर), खरनाल (नागौर) में भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) को।
  3. करणी माता का मेला: देशनोक (बीकानेर)। वर्ष में दो बार (चैत्र और आश्विन) नवरात्रों के दौरान। यहाँ सफेद चूहों (काबा) का दर्शन शुभ माना जाता है।
  4. शीतला माता का मेला: सील की डूंगरी, चाकसू (जयपुर ग्रामीण)। चैत्र कृष्ण अष्टमी (बास्योड़ा)। यह एकमात्र देवी हैं जिनकी खंडित मूर्ति की पूजा होती है।
  5. जीण माता का मेला: रेवासा (सीकर)। वर्ष में दो बार नवरात्रों में।

(स) राजस्थान के प्रमुख महोत्सव (Festivals)

पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित प्रमुख महोत्सव:

  1. थार महोत्सव: बाड़मेर (मार्च/चैत्र माह में)।
  2. मरू महोत्सव: जैसलमेर (जनवरी-फरवरी/माघ माह में)।
  3. हाथी महोत्सव: जयपुर (मार्च/होली के अवसर पर)।
  4. मेवाड़ महोत्सव: उदयपुर (अप्रैल/वैशाख में)।
  5. बृज महोत्सव: भरतपुर (फरवरी/फाल्गुन में)।
  6. मारवाड़ महोत्सव: जोधपुर (अक्टूबर/आश्विन में)।
  7. बूंदी महोत्सव (कजली तीज): बूंदी (जून/अगस्त)।
  8. ऊंट महोत्सव: बीकानेर (जनवरी)।
  9. मीरा महोत्सव: चित्तौड़गढ़ (अक्टूबर/आश्विन शरद पूर्णिमा)।
  10. पतंग महोत्सव: जयपुर (14 जनवरी – मकर संक्रांति)।
  11. गुब्बारा (Balloon) महोत्सव: बाड़मेर।
  12. ग्रीष्म व शरद महोत्सव: माउंट आबू, सिरोही (ग्रीष्म: मई-जून, शरद: दिसंबर)।

(द) प्रमुख उर्स एवं मुस्लिम धार्मिक स्थल

राजस्थान सांप्रदायिक सौहार्द की भूमि है, जहाँ सूफी संतों की दरगाहों पर भव्य उर्स आयोजित होते हैं।

1. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का उर्स (गरीब नवाज)

  • स्थान: अजमेर।
  • समय: रज्जब माह की 1 से 6 तारीख तक। (9 तारीख को बड़े कुल की रस्म होती है)।
  • महत्व: यह भारत में मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा उर्स है। ख्वाजा साहब को ‘गरीब नवाज’ कहा जाता है। भीलवाड़ा का गौरी परिवार उर्स का झंडा फहराने की रस्म निभाता है।

2. तारकीन का उर्स

  • स्थान: नागौर।
  • संत: संत हमीदुद्दीन नागौरी (सुल्ताने-तारीकीन – सन्यासियों का सुल्तान)।
  • महत्व: अजमेर के बाद यह राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा उर्स है।

3. गलियाकोट का उर्स

  • स्थान: गलियाकोट (ज़िला: डूंगरपुर), माही नदी के तट पर।
  • संत: पीर फखरुद्दीन।
  • विशेषता: यहाँ दाऊदी बोहरा संप्रदाय की प्रधान पीठ (मजार-ए-फकरी) स्थित है। यहाँ ‘मोहर्रम’ के 27वें दिन उर्स भरता है।

4. नरहड़ के पीर का उर्स

  • स्थान: चिड़ावा (ज़िला: झुंझुनू)।
  • संत: हजरत शक्कर बाबा (शक्कर बार पीर)।
  • उपनाम: इन्हें “बांगड़ का धणी” कहा जाता है।
  • समय: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (कृष्ण जन्माष्टमी)। यह सांप्रदायिक सद्भाव का अनूठा उदाहरण है कि एक मुस्लिम संत का उर्स हिंदू त्योहार के दिन भरता है।

अन्य प्रमुख मुस्लिम धार्मिक स्थल

  1. एक मीनार मस्जिद / प्रहरी मीनार: जोधपुर।
  2. गमता गाजी की मजार: जोधपुर।
  3. गुलाम कलंदर की मजार: जोधपुर।
  4. गुलाम खां का मकबरा: जोधपुर।
  5. भूरे खां की मजार: जोधपुर (मेहरानगढ़ दुर्ग में)।
  6. नेहरू खां की मजार: कोटा।
  7. अलाउद्दीन खिलजी की मस्जिद/तोपखाना: जालौर दुर्ग।
  8. अकबर का मकबरा/मस्जिद: आमेर (जयपुर)।
  9. जामा मस्जिद: भरतपुर।
  10. ऊषा मस्जिद: बयाना (ज़िला: डीग/भरतपुर)। यह पहले ऊषा मंदिर था।
  11. शेरखां की मजार: भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़)।
  12. खुदा बख्श बाबा की दरगाह: सादड़ी (पाली)।
  13. मीरान साहब (सैयद हुसैन खिंगसवार) की दरगाह: तारागढ़ दुर्ग (अजमेर)।
  14. पीर ढुलेशाह की दरगाह: चोटिला (पाली) – केरला स्टेशन के पास।
  15. कमरुद्दीन शाह की दरगाह: झुंझुनू।
  16. घोड़े की मजार: अजमेर (तारागढ़)। मान्यता है कि यहाँ दाल चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है।

निष्कर्ष:

राजस्थान के ये मेले और त्यौहार न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं, बल्कि यहाँ की मरूधरा में सांस्कृतिक रंगों की छटा भी बिखेरते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राजस्थानी लोक कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं का संरक्षण निरंतर हो रहा है।

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राजस्थान के मेले एवं उत्सव

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Master Rajasthan General Knowledge: The Ultimate Gateway to RPSC & RSMSSB Success

राजस्थान सामान्य ज्ञान (Rajasthan GK) में महारत: RPSC और RSMSSB परीक्षाओं में सफलता का मूल मंत्र

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Why Rajasthan GK is the Pillar of Your Preparation

Rajasthan GK आपकी तैयारी का आधार स्तंभ क्यों है?

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Comprehensive Coverage for All Rajasthan Government Exams

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RPSC RAS (Prelims & Mains) – Administrative Services

RPSC RAS (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) – प्रशासनिक सेवाएँ

For Civil Services aspirants, we offer an in-depth analysis of the curriculum. From the glorious Mewar, Marwar, and Kachwaha Dynasties to the vibrant Folk Culture of Rajasthan, our notes encompass the detailed syllabus of RAS General Studies. We emphasize high-scoring topics such as the Peasant Movements in Rajasthan and Integration of Rajasthan, which are frequently prioritized by examiners. सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए, हम पाठ्यक्रम का गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं। गौरवशाली मेवाड़, मारवाड़ और कछवाहा राजवंशों से लेकर राजस्थान की जीवंत लोक संस्कृति तक, हमारे नोट्स RAS सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को समाहित करते हैं। हम राजस्थान के किसान आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण जैसे उच्च अंकदायी विषयों पर विशेष बल देते हैं, जिन्हें परीक्षकों द्वारा अक्सर प्राथमिकता दी जाती है।

Rajasthan Police Constable & SI – Law Enforcement

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Rajasthan Patwari, VDO & REET Exams

राजस्थान पटवारी, VDO और REET परीक्षाएँ

The Patwari and VDO Examinations demand specialized knowledge of Geography and Local Self-Government. Our dedicated articles explain the Panchayati Raj System, land measurement units, and major irrigation projects. Additionally, we cover teaching exams like REET (Level 1 & 2) and Senior Teacher (Grade II) with a focus on Rajasthan’s cultural heritage. पटवारी और VDO परीक्षाओं में भूगोल और स्थानीय स्वशासन के विशेष ज्ञान की आवश्यकता होती है। हमारे समर्पित लेख पंचायती राज व्यवस्था, भूमि मापन इकाइयों और प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की व्याख्या करते हैं। इसके अतिरिक्त, हम REET (लेवल 1 और 2) और वरिष्ठ अध्यापक (ग्रेड II) जैसी शिक्षण परीक्षाओं को भी कवर करते हैं, जिसमें राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

Topic-Wise Mastery: A Deep Dive into the Royal State

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To optimize your study routine, we have categorized our vast database into logical segments. This structured approach facilitates the creation of a comprehensive mental map of the state. आपकी अध्ययन दिनचर्या को अनुकूलित करने के लिए, हमने अपने विशाल डेटाबेस को तार्किक खंडों में वर्गीकृत किया है। यह संरचित दृष्टिकोण राज्य का एक व्यापक मानसिक मानचित्र बनाने में सहायक है।

Geography of Rajasthan (Rajasthan Bhugol)

राजस्थान का भूगोल (Rajasthan Bhugol)

Geography is traditionally the highest-scoring section. Access detailed maps and analytical notes on: भूगोल पारंपरिक रूप से सर्वाधिक अंकदायी खंड है। इन विषयों पर विस्तृत मानचित्र और विश्लेषणात्मक नोट्स प्राप्त करें:

  • Physical Divisions: The Aravalli Range, The Great Thar Desert, and the Eastern Plains. (भौतिक विभाग: अरावली पर्वतमाला, थार का विशाल मरुस्थल और पूर्वी मैदान।)

  • Drainage System: The inland drainage (Luni, Ghaggar) and perennial rivers like Chambal and Mahi. (अपवाह तंत्र: अंतःप्रवाह (लूनी, घग्घर) और चंबल एवं माही जैसी बारहमासी नदियाँ।)

  • Biodiversity: Ranthambore & Sariska Tiger Reserves, and Keoladeo Ghana Bird Sanctuary (UNESCO site). (जैव विविधता: रणथंभौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व, और केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य (यूनेस्को स्थल)।)

History & Culture (Rajasthan Itihas aur Sanskriti)

इतिहास और संस्कृति (Rajasthan Itihas aur Sanskriti)

From the ancient civilization of Kalibangan to the valorous saga of Maharana Pratap, we cover the historical timeline comprehensively. कालीबंगा की प्राचीन सभ्यता से लेकर महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा तक, हम ऐतिहासिक कालक्रम को व्यापक रूप से कवर करते हैं।

  • Major Dynasties: The Guhil-Sisodia (Mewar), Rathores (Marwar/Bikaner), and Chauhans (Ajmer/Ranthambore). (प्रमुख राजवंश: गुहिल-सिसोदिया (मेवाड़), राठौड़ (मारवाड़/बीकानेर), और चौहान (अजमेर/रणथंभौर)।)

  • Art & Architecture: Hill Forts of Rajasthan (Chittorgarh, Kumbhalgarh), Haveli architecture, and Schools of Painting (Marwar, Kishangarh styles). (कला और वास्तुकला: राजस्थान के पहाड़ी किले (चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़), हवेली वास्तुकला, और चित्रकला शैलियाँ (मारवाड़, किशनगढ़ शैली)।)

  • Folk Culture: Lok Devta (Ramdevji, Tejaji), Folk Dances (Ghoomar, Kalbeliya), and Fairs. (लोक संस्कृति: लोक देवता (रामदेवजी, तेजाजी), लोक नृत्य (घूमर, कालबेलिया), और मेले।)

Polity & Economy (Rajvyavastha aur Arthvyavastha)

राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था (Rajvyavastha aur Arthvyavastha)

Stay aligned with the administrative and economic dynamics of the state. राज्य की प्रशासनिक और आर्थिक गतिशीलता के साथ संरेखित रहें।

  • Administrative Structure: Role of RPSC, State Human Rights Commission, and Vidhan Sabha analysis. (प्रशासनिक संरचना: RPSC, राज्य मानवाधिकार आयोग की भूमिका और विधानसभा विश्लेषण।)

  • Welfare Schemes: Flagship initiatives like Chiranjeevi Yojana (Health), Indira Gandhi Urban Employment Scheme, and Social Security Pensions. (कल्याणकारी योजनाएं: चिरंजीवी योजना (स्वास्थ्य), इंदिरा गांधी शहरी रोजगार योजना, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी प्रमुख पहल।)

  • Economic Resources: Mineral wealth (Zinc, Copper, Silver), Solar Energy potential, and Tourism economy. (आर्थिक संसाधन: खनिज संपदा (जस्ता, तांबा, चांदी), सौर ऊर्जा क्षमता और पर्यटन अर्थव्यवस्था।)

Evaluate Your Proficiency: Quizzes & Mock Tests

अपनी दक्षता का मूल्यांकन करें: क्विज़ और मॉक टेस्ट

Reading notes alone is insufficient; verifying your retention is essential. Passive reading often leads to the erosion of crucial facts during the examination. Therefore, we integrate Rajasthan GK Quizzes directly into our learning modules to ensure long-term memory retention. केवल नोट्स पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है; अपनी स्मरण शक्ति का सत्यापन करना भी अनिवार्य है। निष्क्रिय पठन अक्सर परीक्षा के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों के विस्मरण का कारण बनता है। इसलिए, हम दीर्घकालिक स्मृति सुनिश्चित करने के लिए अपने शिक्षण मॉड्यूल में सीधे Rajasthan GK क्विज़ को एकीकृत करते हैं।

  • Daily Live Quizzes: Challenge your intellect with fresh Multiple Choice Questions (MCQs) daily. (दैनिक लाइव क्विज़: प्रतिदिन नए बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के साथ अपनी बौद्धिकता को चुनौती दें।)

  • Topic-Wise Assessment: Completed the “Lakes of Rajasthan” chapter? Attempt a specific test to consolidate your knowledge. (विषय-वार मूल्यांकन: क्या “राजस्थान की झीलें” अध्याय पूरा कर लिया? अपने ज्ञान को सुदृढ़ करने के लिए एक विशिष्ट परीक्षण का प्रयास करें।)

  • Previous Year Papers (PYQ): Solve authentic questions from RAS Pre, Constable, and Patwari archives. (विगत वर्षों के प्रश्न पत्र (PYQ): RAS प्री, कांस्टेबल और पटवारी अभिलेखागार से प्रमाणिक प्रश्नों को हल करें।)


Why High-Achievers Choose StudyHub?

मेधावी छात्र StudyHub का चयन क्यों करते हैं?

We prioritize quality, accuracy, and relevance above all. Our content stands out because: हम गुणवत्ता, सटीकता और प्रासंगिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। हमारी सामग्री विशिष्ट है क्योंकि:

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