1. प्रस्तावना
प्रत्येक समृद्ध भाषा की अपनी एक सुव्यवस्थित ध्वनि-व्यवस्था, शब्द-रचना और वाक्य का एक निश्चित संरचनात्मक ढाँचा (Syntactical Structure) होता है। भाषा केवल भावों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि एक तार्किक अर्थ-प्रणाली भी है। इस प्रणाली में ‘शब्द’ एक सेतु का कार्य करता है, जो अमूर्त ध्वनियों को मूर्त अर्थ में परिवर्तित करता है।
व्याकरणिक दृष्टि से, भाषा की सबसे छोटी मौखिक इकाई ‘ध्वनि’ (Sound) है और लिखित रूप में ‘वर्ण’ (Letter) है, किन्तु भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई ‘शब्द’ (Word) है। जब ध्वनियों का समूह एक निश्चित अर्थ का वोध कराता है, तो वह शब्द की संज्ञा प्राप्त करता है।
परिभाषा
“एक या एक से अधिक वर्णों के मेल से बनी हुई स्वतंत्र और सार्थक ध्वनि-इकाई को ‘शब्द’ कहते हैं।”
विशेष टिप्पणी (NCERT के अनुसार): जब तक कोई शब्द स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होता है, वह ‘शब्द’ कहलाता है, परन्तु जब वही शब्द व्याकरणिक नियमों (कारक, वचन, लिंग) में बंधकर किसी वाक्य में प्रयुक्त होता है, तो वह ‘पद’ (Term) बन जाता है।
2. शब्दों का वर्गीकरण (Classification of Words)
हिंदी भाषा का विकास-क्रम अत्यंत वैज्ञानिक है। इसने अपनी जननी ‘संस्कृत’ के विपुल शब्द-भंडार को विरासत में प्राप्त किया, साथ ही पाली, प्राकृत और अपभ्रंश के रास्ते होते हुए विकास के मार्ग पर अग्रसर हुई। अपनी ऐतिहासिक यात्रा में हिंदी ने विदेशी आक्रमणों, औपनिवेशिक काल और वैश्वीकरण के प्रभाव से अनेक भाषाओं के शब्दों को अपने आंचल में समेटा है।
अध्ययन की सुविधा और वैज्ञानिकता की दृष्टि से शब्दों का वर्गीकरण निम्नलिखित चार आधारों पर किया जाता है:
- उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Etymological Basis)
- रचना या बनावट के आधार पर (Structural Basis)
- प्रयोग या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर (Grammatical Basis)
- अर्थ के आधार पर (Semantic Basis)
(क) उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर (Based on Origin/Source)
हिंदी भाषा के शब्द-भंडार में ऐतिहासिक स्रोतों की विविधता है। उत्पत्ति के आधार पर शब्दों को पाँच मुख्य उपभेदों में वर्गीकृत किया गया है:
1. तत्सम शब्द (Tatsam Words)
व्युत्पत्ति: ‘तत्’ (उसके) + ‘सम’ (समान)। अर्थात् अपनी मूल भाषा (संस्कृत) के समान। परिभाषा: संस्कृत भाषा के वे शब्द जो बिना किसी ध्वनि-परिवर्तन के, अपने मूल रूप में ही हिंदी भाषा में प्रयुक्त होते हैं, ‘तत्सम’ कहलाते हैं। ये शब्द भाषा की शुद्धता और प्राचीनता के परिचायक हैं। उदाहरण: अट्टालिका, उष्ट्र, कर्ण, चंद्र, अग्नि, आम्र, गर्दभ, क्षेत्र, अद्य, कुपुत्र आदि।
2. तद्भव शब्द (Tadbhav Words)
व्युत्पत्ति: ‘तत्’ (उससे) + ‘भव’ (उत्पन्न/विकसित)। परिभाषा: संस्कृत के वे मूल शब्द, जो हजारों वर्षों की यात्रा में पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं के घिसने-पिटने की प्रक्रिया से गुजरकर हिंदी में आए हैं और जिनका उच्चारण और वर्तनी परिवर्तित हो गई है, ‘तद्भव’ कहलाते हैं। ये आम बोलचाल की भाषा के शब्द हैं। उदाहरण: अटारी (अट्टालिका से), ऊँट (उष्ट्र से), कान (कर्ण से), खेत (क्षेत्र से)।
विस्तृत तत्सम-तद्भव तालिका (Reference List)
विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण तत्सम-तद्भव शब्दों की प्रामाणिक सूची नीचे दी गई है:
| तत्सम (मूल रूप) | तद्भव (परिवर्तित रूप) | तत्सम (मूल रूप) | तद्भव (परिवर्तित रूप) |
|---|---|---|---|
| अ-वर्ग | क-वर्ग | ||
| अकार्य | अकाज | कर्पास | कपास |
| अगम्य | अगम | कटु | कड़वा |
| आश्चर्य | अचरज | कपाट | किवाड़ |
| अक्षत | अच्छत | कंटक | काँटा |
| अट्टालिका | अटारी | काष्ठ | काठ |
| अज्ञानी | अनजाना | काक | कौवा / कौआ |
| अंधकार | अँधेरा | किरण | किरन |
| अमावस्या | अमावस | कुकुर | कुत्ता |
| अक्षर | आखर | कुपुत्र | कपूत |
| अमूल्य | अमोल | कोण | कोना |
| आम्रचूर्ण | अमचूर | कृषक | किसान |
| अंगुष्ठ | अँगूठा | कर्म | काम |
| अष्टादश | अठारह | कदली | केला |
| अर्द्ध | आधा | कर्पूर | कपूर |
| अश्रु | आँसू | कपोत | कबूतर |
| अग्नि | आग | कार्य | काज |
| अन्न | अनाज | कार्तिक | कातिक |
| अमृत | अमिय | कास | खाँसी |
| आम्र | आम | कुंभकार | कुम्हार |
| अर्पण | अरपन | कुष्ठ | कोढ़ |
| आखेट | अहेर | कोकिल | कोयल |
| अगणित | अनगिनत | कृष्ण | किसन / कान्ह |
| आश्विन | आसोज | कंकण | कंगन |
| आलस्य | आलस | कच्छप | कछुआ |
| असीस | आशिष | क्लेश | कलेस |
| आश्रय | आसरा | कज्जल | काजल |
| उ-वर्ग | कर्ण | कान | |
| उज्ज्वल | उजला | कर्तरी | कतरनी |
| उच्च | ऊँचा | ख, ग, घ-वर्ग | |
| उष्ट्र | ऊँट | गर्त | गड्ढा |
| ए-वर्ग | स्तम्भ | खंबा | |
| एकत्र | इकट्ठा | क्षत्रिय | खत्री |
| इक्षु | ईख | खट्वा | खाट |
| उलूक | उल्लू | क्षीर | खीर |
| एला | इलायची | क्षेत्र | खेत |
| अंचल | आँचल | ग्रंथि | गाँठ |
| ग-वर्ग (क्रमशः) | त-वर्ग | ||
| गायक | गवैया | तप्त | तपन |
| ग्रामीण | गँवार | तीक्ष्ण | तीखा |
| गोस्वामी | गुसाईं | तैल | तेल |
| गृह | घर | तपस्वी | तपसी |
| गोमय | गोबर | ताम्र | तांबा |
| गौर | गोरा | तीर्थ | तीरथ |
| गौ | गाय | तुंद | तोंद |
| गुहा | गुफा | त्वरित | तुरंत |
| ग्राम | गाँव | तृण | तिनका |
| गम्भीर | गहरा | द, ध-वर्ग | |
| गोपालक | ग्वाला | दधि | दही |
| गोधूम | गेहूँ | दंत | दाँत |
| ग्रीष्म | गर्मी | दीपशलाका | दीयासलाई |
| घट | घड़ा | दीप | दीया |
| घटिका | घड़ी | दीपावली | दीवाली |
| घोटक | घोड़ा | दुर्बल | दुबला |
| घृत | घी | द्विपट | दुपट्टा |
| गहन | घना | द्वितीय | दूजा |
| च-वर्ग | दूर्वा | दूब | |
| चर्म | चाम | दुग्ध | दूध |
| चंद्र | चाँद | दुःख | दुख |
| चतुष्कोण | चौकोर | दक्षिण | दाहिना |
| चतुर्दश | चौदह | देव | दई / दैव |
| चित्रकार | चितेरा | धर्म | धरम |
| चैत्र | चैत | धरित्री | धरती |
| छत्र | छाता | धूम | धुआँ |
| चर्मकार | चमार | धर्त्तूर | धतूरा |
| चर्वण | चबाना | धैर्य | धीरज |
| चंद्रिका | चाँदनी | धनश्रेष्ठि | धन्नासेठ |
| चतुर्थ | चौथा | धान्य | धान |
| चतुष्पद | चौपाया | न, प-वर्ग | |
| चंचु | चोंच | नग्न | नंगा |
| चतुर्विंश | चौबीस | नक्षत्र | नखत |
| चौर | चोर | नव्य | नया |
| चित्रक | चीता | नापित | नाई |
| चुंबन | चूमना | नृत्य | नाच |
| चक्र | चक्कर | नकुल | नेवला |
| छाया | छाँह | नव | नौ |
| छिद्र | छेद | नयन | नैन |
| ज-वर्ग | निंब | नीम | |
| जन्म | जनम | निद्रा | नींद |
| ज्योति | जोत | नासिका | नाक |
| जिह्वा | जीभ | निम्बुक | नींबू |
| जंघा | जाँघ | निष्ठुर | निठुर |
| ज्येष्ठ | जेठ | पक्ष | पंख |
| जामाता | जमाई | पथ | पंथ |
| जीर्ण | झीना | पक्षी | पंछी |
| झरण | झरना | पद्म | पदम |
| त-वर्ग (क्रमशः) | पट्टिका | पाटी/पट्टी | |
| पर्यंक | पलंग | फाल्गुन | फागुन |
| परीक्षा | परख | परशु | फरसा |
| पर्पट | पापड़ | ब, भ, म-वर्ग | |
| पवन | पौन | बधिर | बहरा |
| पत्र | पत्ता | बलीवर्द | बैल |
| पाश | फंदा | वंध्या | बाँझ |
| पाद | पैर | बर्कर | बकरा |
| पाषाण | पाहन | बालुका | बालू |
| पुच्छ | पूँछ | बुभुक्षु | भूखा |
| पुष्कर | पोखर | वंशी | बाँसुरी |
| पिपासा | प्यास | विकार | बिगाड़ |
| पीत | पीला | भक्त | भगत |
| पुत्र | पूत | भल्लुक | भालू |
| पुष्प | पुहुप | भागिनेय | भांजा |
| पंक्ति | पंगत | भिक्षा | भीख |
| प्रहर | पहर | भद्र | भला |
| पानीय | पानी | भगिनी | बहिन |
| पूर्ण | पूरा | भाद्रपद | भादों |
| पंचम | पाँचवाँ | भ्रमर | भौंरा |
| पूर्व | पूरब | भ्रातृ | भाई |
| प्रिय | पिय | बाष्प | भाप |
| प्रस्तर | पत्थर | मशक | मच्छर |
| पितृ | पितर | मत्स्य | मछली |
| प्रकट | प्रगट | मल | मैल |
| पृष्ठ | पीठ | मक्षिका | मक्खी |
| पौत्र | पोता | मस्तक | माथा |
| प्रतिच्छाया | परछाँई | मयूर | मोर |
| मद्य | मद | मनुष्य | मानुस |
| मातृ | माता | मास | महीना |
| मातुल | मामा | मित्र | मीत |
| मुक्ता | मोती | मुख | मुँह |
| मेघ | मेह | मृत्यु | मौत |
| श्मशान | मसान | य, र, ल, व-वर्ग | |
| यति | जती | यजमान | जजमान |
| यमुना | जमुना | यम | जम |
| यश | जस | योगी | जोगी |
| युवा | जवान | यंत्र-मंत्र | जंतर-मंतर |
| यशोदा | जसोदा | रज्जु | रस्सी |
| राजपुत्र | राजपूत | रक्षा | राखी |
| यज्ञोपवीत | जनेऊ | यूथ | जत्था |
| राशि | रास | रिक्त | रीता |
| रोदन | रोना | रात्रि | रात |
| राज्ञी | रानी | लक्ष्मण | लखन |
| लज्जा | लाज | लवंग | लौंग |
| लेपन | लीपना | लोहकार | लुहार |
| लक्षण | लच्छन | लक्ष | लाख |
| लवण | नोन/लोन | लक्ष्मी | लिछमी |
| लोह | लोहा | लोमशा | लोमड़ी |
| वणिक् | बनिया | वत्स | बच्चा/बछड़ा |
| वट | बड़ | वर यात्रा | बरात |
| वचन | बचन | वाणी | बैन |
| विवाह | ब्याह | वर्षा | बरखा |
| वक | बगुला | वानर | बंदर |
| विष्टा | बीट | विद्युत | बिजली |
| वृद्ध | बूढ़ा | व्याघ्र | बाघ |
| श, ष, स, ह-वर्ग | |||
| शैया | सेज | शाप | सराप |
| शीतल | सीतल | शुष्क | सूखा |
| शर्करा | शक्कर | शत | सौ |
| शाक | साग | शिक्षा | सीख |
| शुक | सुआ | शुण्ड | सूँड |
| श्यामल | साँवला | श्वास | साँस |
| शृंगार | सिंगार | शृंग | सींग |
| श्रेष्ठि | सेठ | सरोवर | सरवर |
| शृगाल | सियार | श्रावण | सावन |
| षोडश | सोलह | सप्तशती | सतसई |
| संध्या | साँझ | सपत्नी | सौत |
| सर्प | साँप | सर्षप | सरसों |
| सत्य | सच | सूत्र | सूत |
| सूर्य | सूरज | स्वर्णकार | सुनार |
| साक्षी | साखी | स्वप्न | सपना |
| स्थल | थल | स्थान | थान |
| स्नेह | नेह | स्पर्श | परस |
| हरित | हरा | हस्तिनी | हथनी |
| हट्ट | हाट | हरिद्रा | हल्दी |
| हंडी | हाँडी | हस्त | हाथ |
| हरिण | हिरन | हास्य | हँसी |
| हीरक | हीरा | होलिका | होली |
| हिंदोलना | हिंडोला | हृदय | हिय |
| क्षण | छिन | क्षति | छति |
| क्षीण | छीन | क्षार | खार |
| त्रयोदश | तेरह |
3. देशज शब्द (Indigenous/Deshaj Words)
परिभाषा: ‘देशज’ का अर्थ है ‘देश में जन्मा’। ऐसे शब्द जिनकी उत्पत्ति का कोई लिखित संस्कृत स्रोत नहीं मिलता, अपितु जो क्षेत्रीय प्रभाव, लोक-जीवन की आवश्यकताओं और परिस्थितियों के कारण स्वतः गढ़ लिए गए हैं, वे देशज शब्द कहलाते हैं। इन्हें ‘अज्ञात-व्युत्पत्ति’ (Unknown origin) वाले शब्द भी कहा जाता है।
देशज शब्दों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में रखा जा सकता है:
(अ) अनुकरणात्मक या मनगढ़ंत शब्द: ये वे शब्द हैं जो मनुष्यों ने ध्वनियों के अनुकरण (Imitation) या अपने अंतर्मन के भावों (आवेश, क्रोध, खुशी) को व्यक्त करने के लिए गढ़ लिए।
- उदाहरण: ऊधम, अंगोछा, खुरपा, ढोर, लपलपाना, बुद्धू, लोटा, परात, चुटकी, चाट, ठठेरा, खटपट, भड़भड़ाना, हिचकिचाना आदि।
(आ) विभिन्न भारतीय भाषाई परिवारों से गृहीत शब्द: हिंदी ने अपने विकास क्रम में भारत की अन्य मूल जातियों और भाषाई परिवारों से भी शब्द ग्रहण किए हैं।
- द्रविड़ परिवार (Dravidian origin): अनल, कटी, चिकना, ताला, लूँगी, इडली, डोसा, मीन (मछली) आदि।
- ऑस्ट्रिक परिवार (कोल, संथाल, मुंडा आदि): कपास, कोड़ी, पान, परवल, बाजरा, सरसों, भिंडी, तांबूल आदि।
4. विदेशी या आगत शब्द (Foreign Words)
भारत के इतिहास में विदेशी संपर्क, व्यापार और शासन का गहरा प्रभाव रहा है। राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से हिंदी ने विदेशी भाषाओं के शब्दों को इतनी सहजता से आत्मसात कर लिया है कि वे अब हिंदी के अपने प्रतीत होते हैं। इन्हें ‘आगत शब्द’ भी कहा जाता है।
प्रमुख विदेशी भाषाओं के शब्द निम्नवत हैं:
- (अ) अँगरेजी (English): औपनिवेशिक काल और आधुनिक शिक्षा के प्रभाव से सर्वाधिक शब्द अँगरेजी के हैं।
- प्रशासनिक/सामान्य: अफसर, एजेंट, क्लास, क्लर्क, नर्स, टीचर, गार्ड, टेलर।
- वस्तुएं: कार, कॉपी, कोट, चेक, ट्रक, टैक्सी, स्कूल, पेन, पेपर, बस, रेडियो, रजिस्टर, रेल, शर्ट, सूट, स्वेटर, टिकट, रेडीमेड आदि।
- (आ) अरबी (Arabic): (मुख्यतः कानून और प्रशासन से संबंधित)
- अक्ल, अदालत, आजाद, इंतजार, इनाम, इलाज, इस्तीफा, कमाल, कब्जा, कानून, कुर्सी, किताब, किस्मत, कबीला, कीमत, जनाब, जलसा, जिला, तहसील, नशा, तारीख, ताकत, तमाशा, दुनिया, दौलत, नतीजा, फकीर, फैसला, बहस, मदद, मतलब, लिफाफा, हलवाई, हुक्म, हिम्मत।
- (इ) फ़ारसी (Persian): (मुगलकालीन दरबारी भाषा का प्रभाव)
- अख़बार, अमरूद, आराम, आवारा, आसमान, आतिशबाज़ी, आमदनी, कमर, कारीगर, कुश्ती, खजाना, खर्च, खून, गुलाब, गुब्बारा, जानवर, जेब, जगह, जमीन, दवा, जलेबी, जुकाम, तनख्वाह, तबाह, दर्जी, दीवार, नमक, बीमार, नेक, मजदूर, लगाम, शेर, सूखा, सौदागर, सुल्तान, सुल्फा, सरकार।
- (ई) पुर्तगाली (Portuguese): (घरेलू सामान से संबंधित)
- अचार, अगस्त, आलपिन, आलू, आया, अनन्नास, इस्पात, कनस्तर, कार्बन, कमीज, कमरा, गोभी, गोदाम, गमला, चाबी, पीपा, पादरी, फीता, बस्ता, बटन, बाल्टी, पपीता, पतलून, मेज, लबादा, संतरा, साबुन।
- (उ) तुर्की (Turkish):
- आका, उर्दू, काबू, कैंची, कुर्की, कुली, कलंगी, कालीन, चाक, चिक, चेचक, चुगली, चोगा, चम्मच, तमगा, तमाशा, तोप, बारूद, बावर्ची, बीबी, बेगम, बहादुर, मुगल, लाश, सराय।
- (ऊ) अन्य भाषाएँ:
- फ्रेन्च (French): अंग्रेज, काजू, कारतूस, कूपन, टेबुल, मेयर, मार्शल, मीनू, रेस्त्रां, सूप।
- चीनी (Chinese): चाय, लीची, लोकाट, तूफान।
- डच (Dutch): तुरुप, चिड़िया, ड्रिल।
- जर्मनी (German): नात्सी, नाजीवाद, किंडरगार्टन।
- तिब्बती (Tibetan): लामा, डांडी।
- रूसी (Russian): जार, सोवियत, रूबल, स्पूतनिक, बुजुर्ग, लूना।
- यूनानी (Greek): एकेडमी, एटम, एटलस, टेलीफोन, बाइबिल।
5. संकर शब्द (Hybrid Words)
दो भिन्न-भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने नए शब्द ‘संकर शब्द’ कहलाते हैं। यह हिंदी की समन्वयवादी प्रकृति का परिचायक है।
| शब्द | संरचना (स्रोत) |
|---|---|
| वर्षगाँठ | वर्ष (संस्कृत) + गाँठ (हिंदी) |
| उद्योगपति | उद्योग (संस्कृत) + पति (हिंदी) |
| रेलयात्री | रेल (अँगरेजी) + यात्री (संस्कृत) |
| टिकटघर | टिकट (अँगरेजी) + घर (हिंदी) |
| नेकनीयत | नेक (फ़ारसी) + नीयत (अरबी) |
| जाँचकर्ता | जाँच (फ़ारसी) + कर्ता (हिंदी) |
| बेढंगा | बे (फ़ारसी) + ढंगा (हिंदी) |
| बेआब | बे (फ़ारसी) + आब (अरबी) |
| सजाप्राप्त | सजा (फ़ारसी) + प्राप्त (हिंदी) |
| उड़नतश्तरी | उड़न (हिंदी) + तश्तरी (फ़ारसी) |
| बेकायदा | बे (फ़ारसी) + कायदा (अरबी) |
| बमवर्षा | बम (अँगरेजी) + वर्षा (हिंदी) |
(ख) रचना या बनावट के आधार पर (Based on Structure/Composition)
नए शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को ‘व्युत्पत्ति’ या ‘रचना’ कहते हैं। शब्द के खंड किए जा सकते हैं या नहीं, और उन खंडों का अर्थ क्या निकलता है, इस आधार पर शब्दों के तीन भेद हैं:
1. रूढ़ शब्द (Simple/Root Words)
वे शब्द जो परंपरा से किसी विशिष्ट अर्थ में चले आ रहे हैं और जिनके सार्थक खंड (टुकड़े) नहीं किए जा सकते। यदि इनके टुकड़े किए जाएँ, तो उन टुकड़ों का कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं निकलता।
- उदाहरण: दूध (दू+ध = निरर्थक), गाय, रोटी, दीपक, पेड़, पत्थर, देवता, आकाश, मेंढक, स्त्री। ये शब्द अपने मूल रूप में ही पूर्ण हैं।
2. यौगिक शब्द (Compound Words)
‘यौगिक’ का अर्थ है – योग से बना हुआ। वे शब्द जो दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों या शब्दांशों (उपसर्ग/प्रत्यय) के मेल से बने होते हैं।
- विशेषता: इनके खंड सार्थक होते हैं और इन खंडों का अर्थ मिलकर ही मुख्य शब्द का अर्थ बनाते हैं।
- निर्माण प्रक्रिया: उपसर्ग, प्रत्यय, संधि और समास के द्वारा।
- उदाहरण:
- विद्यालय = विद्या + आलय (विद्या का घर)
- प्रेमसागर = प्रेम + सागर
- प्रतिदिन = प्रति + दिन
- दूधवाला = दूध + वाला
- राष्ट्रपति = राष्ट्र + पति
3. योगरूढ़ शब्द (Complex/Specialized Words)
ये शब्द संरचना की दृष्टि से तो ‘यौगिक’ होते हैं (अर्थात् दो शब्दों से मिलकर बनते हैं), किन्तु अर्थ की दृष्टि से ‘रूढ़’ हो जाते हैं। ये शब्द अपने सामान्य शाब्दिक अर्थ को छोड़कर किसी तीसरे ‘विशेष अर्थ’ (Specific Meaning) का बोध कराते हैं। बहुव्रीहि समास के अधिकांश उदाहरण इसी श्रेणी में आते हैं।
- उदाहरण:
- पीताम्बर: पीत (पीला) + अम्बर (वस्त्र) = पीला वस्त्र धारण करने वाले (अर्थात् भगवान विष्णु/कृष्ण)। यहाँ इसका अर्थ केवल ‘पीला कपड़ा’ नहीं है।
- जलज: जल + ज (जन्म लेने वाला) = कमल। (यद्यपि जल में मछली, सीप आदि भी जन्म लेते हैं, पर ‘जलज’ शब्द कमल के लिए रूढ़ हो गया है)।
- अन्य उदाहरण: दशानन (रावण), लंबोदर (गणेश), त्रिनेत्र (शिव), घनश्याम, रजनीचर, मुरारि, चक्रधर, षडानन आदि।
(ग) प्रयोग या व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर (Based on Usage/Grammar)
वाक्य में प्रयोग करते समय शब्दों के रूप में परिवर्तन होता है या नहीं, इस आधार पर शब्दों को दो वर्गों में बाँटा जाता है:
1. विकारी शब्द (Declinable Words)
‘विकार’ का अर्थ है – परिवर्तन। वे शब्द जिनमें लिंग (Gender), वचन (Number), कारक (Case) या काल (Tense) के कारण रूप-परिवर्तन (Modification) हो जाता है, विकारी शब्द कहलाते हैं। हिंदी में विकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं:
- संज्ञा (Noun): जैसे – लड़का (लड़के, लड़कों)।
- सर्वनाम (Pronoun): जैसे – मैं (मुझे, मेरा, हम)।
- विशेषण (Adjective): जैसे – अच्छा (अच्छी, अच्छे)।
- क्रिया (Verb): जैसे – जाता है (जाती है, जाएंगे, गया)।
2. अविकारी या अव्यय शब्द (Indeclinable Words)
‘अ-विकारी’ अर्थात् जिनमें कोई विकार न हो। वे शब्द जिनका रूप सदैव एक सा रहता है और लिंग, वचन या काल के प्रभाव से उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता। इन्हें ‘अव्यय’ (जो व्यय/खर्च न हो) भी कहते हैं। अविकारी शब्द भी चार प्रकार के होते हैं:
- क्रिया-विशेषण (Adverb): धीरे-धीरे, आज, कल, यहाँ।
- संबंध बोधक (Preposition): के साथ, के बिना, के ऊपर।
- समुच्चय बोधक (Conjunction): और, किन्तु, परन्तु, इसलिए।
- विस्मयादि बोधक (Interjection): अरे!, वाह!, शाबाश!
(घ) अर्थ के आधार पर (Based on Meaning/Semantics)
अर्थ की स्पष्टता और विविधता के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण अत्यंत सूक्ष्म और विस्तृत है:
1. एकार्थी शब्द (Univocal Words)
जिन शब्दों का केवल एक ही निश्चित अर्थ होता है और उनका प्रयोग सामान्यतः उसी अर्थ में किया जाता है। व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ प्रायः इसी श्रेणी में आती हैं।
- उदाहरण: गंगा, पटना, जर्मन, दिन, धूप, लड़का, पहाड़, नदी (सामान्य संदर्भ में)।
2. अनेकार्थी शब्द (Polysemous Words)
जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं और प्रसंग (Context) के अनुसार उनका अर्थ बदल जाता है। भारतीय साहित्य में श्लेष अलंकार में इनका बहुधा प्रयोग होता है।
- उदाहरण:
- अज: बकरा, ब्रह्मा, दशरथ के पिता, अजन्मा।
- अमृत: सुधा, जल, दूध, पारा।
- कर: हाथ, टैक्स (Tax), हाथी की सूँड़, किरण।
- सारंग: मोर, सर्प, बादल, हरिण, पपीहा, दीपक।
- हरि: विष्णु, बंदर, इंद्र, सूर्य, तोता, सर्प।
3. पर्यायवाची शब्द (Synonyms)
वे शब्द जो ध्वनि और रूप में भिन्न होते हुए भी अर्थ में समानता रखते हैं। यद्यपि सूक्ष्म दृष्टि से देखा जाए तो कोई भी दो शब्द पूर्णतः समान नहीं होते, उनका प्रयोग संदर्भ पर निर्भर करता है (जैसे ‘जल’ पूजा के लिए और ‘पानी’ सामान्य प्रयोग के लिए), फिर भी अर्थ की निकटता के कारण इन्हें समानार्थी माना जाता है।
- उदाहरण:
- अमृत: पीयूष, सुधा, अमिय, सोम, सुरभोग।
- अग्नि: आग, पावक, अनल, हुताशन, कृशानु।
- आकाश: गगन, नभ, अम्बर, व्योम, शून्य।
4. विलोम या विपरीतार्थक शब्द (Antonyms)
जो शब्द एक-दूसरे का उल्टा या विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं।
- नियम: तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव का विलोम तद्भव होना चाहिए।
- उदाहरण:
- दिन – रात
- उर्वर – ऊसर
- आर्द्र – शुष्क
- जंगम – स्थावर
- आलोक – तिमिर
5. सम-उच्चरित या युग्म शब्द (Homophones)
ऐसे शब्द जिनका उच्चारण सुनने में लगभग समान लगता है, किन्तु उनकी वर्तनी में सूक्ष्म अंतर होता है और अर्थ में पूर्णतः भिन्नता होती है। इन्हें ‘श्रुतिसम-भिन्नार्थक शब्द’ भी कहते हैं।
- उदाहरण:
- आदि (प्रारंभ) – आदी (अभ्यस्त/लत होना)
- अनिल (हवा) – अनल (आग)
- कुल (वंश/सब) – कूल (किनारा)
- तरंग (लहर) – तुरंग (घोड़ा)
6. वाक्यांश के लिए एक शब्द (One Word Substitution)
भाषा में संक्षिप्तता और प्रभाव लाने के लिए जब शब्दों के समूह या पूरे वाक्यांश के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है।
- उदाहरण:
- जहाँ जाना संभव न हो = अगम्य
- जो अपनी बात से टले नहीं = अटल
- जिसका कोई शत्रु न जन्मा हो = अजातशत्रु
- जो कम बोलता हो = मितभाषी
7. समानार्थक प्रतीत होनेवाले भिन्नार्थक शब्द (Words with subtle distinctions)
ये शब्द पर्यायवाची जैसे लगते हैं, लेकिन इनके प्रयोग और अर्थ में सूक्ष्म अंतर होता है।
- अस्त्र: वह हथियार जिसे फेंककर चलाया जाता है। (जैसे–तीर, भाला, बम)।
- शस्त्र: वह हथियार जिसे हाथ में थामकर चलाया जाता है। (जैसे–तलवार, लाठी, गदा)।
- अहंकार: झूठा घमंड (नकारात्मक)।
- गर्व: उचित स्वाभिमान (सकारात्मक)।
8. समूहवाची शब्द (Collective Words)
हिंदी में समूह (Group) को व्यक्त करने के लिए वस्तु के अनुसार अलग-अलग शब्दों का प्रयोग होता है:
- गट्ठर: लकड़ी या पुस्तकों का।
- गुच्छा: चाबियों या अंगूरों का।
- गिरोह: डाकुओं या माफिया का (नकारात्मक अर्थ में)।
- रेवड़: भेड़-बकरियों का।
- काफिला: यात्रियों या सेना का।
- झुंड: पशुओं का।
- मंडली: गायकों या मित्रों की।
9. ध्वन्यार्थक शब्द (Onomatopoeic Words)
वे शब्द जिनका अर्थ उनकी ध्वनि पर आधारित होता है। यह भाषा की स्वाभाविकता को दर्शाते हैं।
- पशुओं की बोलियाँ:
- दहाड़ना (शेर), भौंकना (कुत्ता), हिनहिनाना (घोड़ा), चिंघाड़ना (हाथी), मिमियाना (भेड़, बकरी), रंभाना (गाय), फुँफकारना (साँप), टर्राना (मेंढक), गुर्राना (चीता), म्याऊँ (बिल्ली)।
- पक्षियों की बोलियाँ:
- चहचहाना (चिड़िया), पीऊ-पीऊ (पपीहा), काँव-काँव (कौआ), गुटर-गूँ (कबूतर), कुकड़ू-कूँ (मुर्गा), कुहकना (कोयल)।
- जड़ पदार्थों की ध्वनियाँ:
- कड़कना (बिजली), खटखटाना (दरवाजा), छुक-छुक (रेलगाड़ी), गरजना (बादल), खनखनाना (सिक्के/चूड़ियाँ), फड़फड़ाना (पंख)।
निष्कर्ष
शब्द-विचार हिंदी व्याकरण का वह आधारस्तंभ है जिस पर भाषा का भव्य भवन खड़ा है। शब्दों की उत्पत्ति, संरचना और अर्थ के सूक्ष्म भेदों को समझकर ही हम भाषा का शुद्ध, प्रभावशाली और सटीक प्रयोग कर सकते हैं। आधुनिक दौर में जब हिंदी वैश्विक पटल पर उभर रही है, तब तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों का यह समन्वय इसे और अधिक लोचदार (Flexible) और समृद्ध बनाता है।