अध्याय बाईस
CrPC Section 269 in Hindi: कारागार का भारसाधक अधिकारी कुछ आकस्मिकताओं में आदेश का निष्पादन करने से विरत रहेगा
New Law Update (2024)
धारा 314 बी.एन.एस.एस.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक - अन्वेषण / जांच
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
यदि धारा 267 के अधीन किसी आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष लाए जाने की अपेक्षा की गई है—
(1) वह बीमारी या अंग-शैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के लिए अयोग्य है; या
(2) वह विचारण के लिए सुपुर्द किया गया है अथवा विचारण के लम्बित रहने तक या प्रारंभिक अन्वेषण के लम्बित रहने तक रिमांड पर है; या
(3) वह इतनी अवधि के लिए अभिरक्षा में है जो आदेश का अनुपालन करने के लिए और उसे उस कारागार में, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध है, वापस ले जाने के लिए अपेक्षित समय की समाप्ति से पूर्व समाप्त हो जाएगी; या
(4) वह ऐसा व्यक्ति है जिसे धारा 268 के अधीन राज्य सरकार द्वारा किया गया आदेश लागू होता है,
तो कारागार का भारसाधक अधिकारी न्यायालय के आदेश का निष्पादन करने से विरत रहेगा और इस प्रकार विरत रहने के कारणों का कथन न्यायालय को भेजेगा:
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति की हाजिरी कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अधिक दूर न होने वाले स्थान पर साक्ष्य देने के लिए अपेक्षित है वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी खंड (2) में वर्णित कारण से इस प्रकार विरत नहीं रहेगा।
Important Sub-Sections Explained
विरत रहने की मुख्य शर्तें
धारा 269 कारागार अधिकारी को कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में, जैसे यदि कैदी चिकित्सकीय रूप से अयोग्य है, विचारण के लिए सुपुर्दगी या रिमांड पर है, या राज्य सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश के अधीन है, कैदी को न्यायालय में पेश करने से विरत रहने का अधिकार देती है।
निकटवर्ती साक्ष्य से संबंधित परंतुक
एक महत्वपूर्ण अपवाद यह है कि अधिकारी केवल इस आधार पर विरत नहीं रह सकता है कि कैदी सुपुर्दगी या रिमांड पर है, यदि उसकी उपस्थिति कारागार के पच्चीस किलोमीटर के दायरे में साक्ष्य देने के लिए आवश्यक है।