धारा 308(1) BNS बनाम धारा 383 IPC: उद्यापन (Extortion)
सजा (Punishment)
परिभाषा
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 383
जो कोई साशय (Intentionally) किसी व्यक्ति को स्वयं उसी की या किसी अन्य व्यक्ति की कोई क्षति (Injury) करने के भय में डालता है, और ऐसे भय में डाले गए व्यक्ति को कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (Valuable security)… परिदत्त (Deliver) करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित (Induces) करता है, वह ‘उद्यापन’ या Extortion करता है।
BNS (नया कानून)
धारा 308(1)
308(1): जो कोई साशय किसी व्यक्ति को स्वयं उसी की या किसी अन्य व्यक्ति की कोई क्षति करने के भय में डालता है… उद्यापन करता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
एक्सटॉर्शन या हफ्ता वसूली! (Extortion)। चोरी (Theft) में चोर चुपके से सामान ले जाता है, लेकिन एक्सटॉर्शन में अपराधी आपको डरा-धमका कर (Threat of injury) आपसे ख़ुद सामान या पैसा (Property) वसूलता है। जैसे: 'मुझे 5 लाख रुपये दे, वरना मैं तेरी झूठी तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल कर दूंगा'। यह ब्लैकमेलिंग और हफ्ता वसूली, कानून में 'उद्यापन (Extortion)' कहलाती है (पुराना IPC 383 / नया BNS 308)।
तुलना
Extortion की परिभाषा (किसी को क्षति के भय में डालकर संपत्ति वसूलना) BNS में जस की तस रखी गई है।
Editor-in-Chief Pramod
Founder and Editor-in-Chief at StudyHub. Pramod has spent over 7 years tracking Indian government recruitments and analyzing exam trends. He oversees the StudyHub editorial board, managing a dedicated team of subject-matter experts across History, Polity, Geography, Geology, and General Sciences. His mission is to ensure that every job alert and study resource published on StudyHub is 100% verified, accurate, and helpful for competitive exam aspirants.