अध्याय XX

CrPC Section 252 in Hindi: दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि

New Law Update (2024)

धारा 263 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

मजिस्ट्रेट न्यायालय

Punishment​

प्रक्रियात्मक – विनिश्चय / दंडादेश

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

यदि अभियुक्त दोष स्वीकार करता है, तो मजिस्ट्रेट उस अभिवचन को, जहां तक साध्य हो, उन्हीं शब्दों में अभिलिखित करेगा जो अभियुक्त ने प्रयोग किए हों, और वह स्वविवेकानुसार उस पर उसे सिद्धदोष ठहरा सकता है।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

स्टेट ऑफ यू.पी. बनाम चंद्रिका (2000):

उच्चतम न्यायालय ने जोर दिया कि केवल दोष स्वीकारोक्ति को अभिलिखित करना अपर्याप्त है; मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोष स्वीकारोक्ति स्वैच्छिक, स्पष्ट और उसके निहितार्थों की स्पष्ट समझ के साथ की गई है, इससे पहले कि वह दोषसिद्धि के विवेक का प्रयोग करे।

शोरन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यू.पी. (1993):

इस निर्णय ने मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त के दोष स्वीकार करने को उसके ठीक उन्हीं शब्दों में अभिलिखित करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को दोहराया कि अभियुक्त आरोप की प्रकृति और ऐसे अभिवचन से उत्पन्न होने वाले परिणामों को समझता है।

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