राजस्थान की नदियाँ

राजस्थान की नदियाँ (बंगाल की खाड़ी तंत्र की नदियाँ)

राजस्थान की नदियाँ राजस्थान का एक महत्वपूर्ण भूभाग मरुस्थलीय होने के कारण, यहाँ नदियों का विशेष महत्व है। विशेष रूप से, पश्चिमी क्षेत्र में सिंचाई के संसाधनों की कमी के परिणामस्वरूप, इन जलधाराओं की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है। जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) प्रत्येक नदी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से अपने जल का […]

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How to Identify the Best NEET Coaching in Sikar Among Dozens of Options

How to Identify the Best NEET Coaching in Sikar Among Dozens of Options

Choosing the Best NEET Coaching in Sikar is no small task, especially when the city is brimming with institutes promising top results, experienced faculty, and state-of-the-art facilities. As the demand for quality NEET preparation grows, so does the number of coaching centers. But how can students and parents truly separate the wheat from the chaff?

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राजस्थान में मीठे और खारे, दोनों तरह की झीलें हैं, जिनमें सांभर (खारी), पुष्कर (मीठी), पिछोला (मीठी), जयसमंद (मीठी), नक्की (मीठी), आनासागर (मीठी) और पचपदरा (खारी) प्रमुख हैं, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं और कई ऐतिहासिक व प्राकृतिक महत्व रखती हैं।

राजस्थान की झीलें

राजस्थान की पवित्र झीलें राजस्थान प्रदेश में प्राचीन समय से ही अनेक प्राकृतिक झीलें अस्तित्व में रही हैं। इसके अतिरिक्त, मध्यकाल एवं आधुनिक युग में विभिन्न रियासतों के शासकों द्वारा भी कई जलाशयों का निर्माण करवाया गया। राजस्थान में मीठे एवं खारे पानी की दोनों प्रकार की झीलें पाई जाती हैं, जिनमें मीठे पानी की

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राजस्थान की विभिन्न इकाइयों के प्राचीन नाम/उपनाम

राजस्थान की विभिन्न इकाइयों के प्राचीन नाम/उपनाम

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम प्रचलित नाम क्षेत्र भोराठ/भोराट का पठार कुम्भलगढ़ (राजसमंद) और गोगुन्दा (उदयपुर) के मध्य में स्थित पठारी भूभाग को भोराठ के पठार के रूप में जाना जाता है। लासड़िया का पठार सलूंबर जिले में जयसमंद झील से आगे पूर्व की ओर फैला हुआ विच्छेदित एवं कटा-फटा पठारी क्षेत्र लासड़िया

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राजस्थान के भौतिक विभाग या भू आकृतिक प्रदेश

राजस्थान के भौतिक विभाग- RPSC

राजस्थान के भौतिक विभाग जर्मन विद्वान अल्फ्रेड वेगनर द्वारा 1912 में प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी अपनी संरचना के आरंभिक चरण में एक वृहत महाद्वीप, जिसे पैंजिया कहा गया, और एक विशाल महासागर, जिसे पैंथालासा के नाम से जाना गया, में विभाजित थी। समय के साथ, पैंजिया दो भागों में विखंडित हो गया, जिसका उत्तरी

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राजस्थान की जलवायु मुख्य रूप से शुष्क और उपोष्णकटिबंधीय (subtropical) है, जिसमें तापमान की अत्यधिक विविधता पाई जाती है; यहाँ गर्मियों में अत्यधिक गर्मी और सर्दियों में हल्की ठंड होती है, वर्षा कम और अनियमित होती है, और अरावली पर्वतमाला के कारण पश्चिमी भाग (थार मरुस्थल) सबसे शुष्क और पूर्वी भाग थोड़ा अधिक आर्द्र (humid) होता है, जहाँ कर्क रेखा का प्रभाव भी है।

राजस्थान की जलवायु का वर्गीकरण

राजस्थान (Rajasthan) की जलवायु राजस्थान की जलवायु का स्वरूप शुष्क से लेकर उप-आर्द्र मानसूनी प्रकार का है। अरावली पर्वतमाला के पश्चिमी भाग में वर्षा की कमी, ऊँचे दैनिक और वार्षिक तापमान का अंतर, कम नमी तथा तेज गति की हवाओं वाली जलवायु पाई जाती है। इसके विपरीत, अरावली के पूर्वी हिस्से में अर्द्ध-शुष्क तथा उप-आर्द्र

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राजस्थान (Rajasthan) के प्रतीक चिन्हों में राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य पुष्प रोहिड़ा, राज्य पक्षी गोडावण, राज्य पशु चिंकारा (वन्यजीव श्रेणी में) व ऊँट (पालतू श्रेणी में), राज्य नृत्य घूमर, राज्य खेल बास्केटबॉल, और राज्य गीत केसरिया बालम शामिल हैं, जो राज्य की समृद्ध संस्कृति, प्रकृति और परंपरा को दर्शाते हैं, जिसमें राज्य चिन्ह में अशोक का सिंह स्तंभ और देवनागरी में 'राजस्थान' लिखा होता है.

राजस्थान (Rajasthan) के प्रतीक चिन्ह- RPSC

राजस्थान के राज्य प्रतीक चिन्ह राजस्थान (Rajasthan) का राज्य वृक्ष – खेजड़ी खेजड़ी, जिसे “रेगिस्तान का गौरव” या “थार का कल्पवृक्ष” के नाम से जाना जाता है, का वैज्ञानिक नाम Prosopis cineraria है। इसे 1983 में राजस्थान का राज्य वृक्ष घोषित किया गया। 5 जून 1988, विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में, इस वृक्ष पर

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राजस्थान की सीमा Map:अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, कोटा, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, श्रीगंगानगर, टोंक, उदयपुर

राजस्थान के संभाग

राजस्थान में वर्तमान में 7 संभाग हैं (2025): जयपुर, अजमेर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा। इन संभागों में कुल 41 जिले शामिल हैं। जोधपुर संभाग में सबसे ज्यादा 8 जिले हैं, जबकि बीकानेर और कोटा में 4-4 जिले हैं।

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राजस्थान (Rajasthan) की स्थिति भौगोलिक दृष्टि से विशिष्ट है। यह राज्य भूमध्य रेखा के सापेक्ष उत्तरी गोलार्ध में स्थित है और ग्रीनविच रेखा के अनुसार पूर्वी गोलार्ध में आता है। इस प्रकार, भूमध्य रेखा और ग्रीनविच रेखा दोनों के सापेक्ष राजस्थान का स्थान उत्तरी तथा पूर्वी गोलार्ध में है, जो इसे भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित यह राज्य 23° 3' उत्तरी अक्षांश से लेकर 30° 12' उत्तरी अक्षांश (कुल विस्तार 7° 9') तथा 69° 30' पूर्वी देशांतर से लेकर 78° 17' पूर्वी देशांतर (कुल विस्तार 8° 47') के मध्य फैला हुआ है। यह अक्षांशीय एवं देशांतर स्थिति राजस्थान को भौगोलिक विविधता से परिपूर्ण बनाती है।

राजस्थान के 41 जिले 2025 – पूरी सूची, नाम व जानकारी

राजस्थान में वर्तमान में 41 जिले हैं (2025)। एकीकरण के समय 1956 में 26 जिले थे, जो धीरे-धीरे बढ़कर 2023 में 8 नए जिले जोड़े जाने से 41 हो गए। इनमें बालोतरा, डीग, फलोदी, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, सलूम्बर और डीडवाना-कुचामन शामिल हैं।

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राजस्थान की सीमा Map:अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, कोटा, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, श्रीगंगानगर, टोंक, उदयपुर

राजस्थान की सीमा

राजस्थान की कुल स्थलीय सीमा 5920 किलोमीटर है, जिसमें पाकिस्तान से 1070 किमी अंतर्राष्ट्रीय सीमा और भारत के 5 राज्यों (मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब) से 4850 किमी अंतर्राज्यीय सीमा शामिल है।

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