अध्याय आठ
CrPC Section 109 in Hindi: संदिग्ध व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति
New Law Update (2024)
धारा 127 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक / प्रशासनिक
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
जब किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट को यह इत्तिला मिलती है कि उसकी स्थानीय अधिकारिता के अंदर कोई ऐसा व्यक्ति है जो अपनी उपस्थिति छिपाने के लिए पूर्वावधानी कर रहा है और यह विश्वास करने का कारण है कि वह संज्ञेय अपराध करने की दृष्टि से ऐसा कर रहा है, तब मजिस्ट्रेट इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति से ऐसे व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह हेतुक दर्शित करे कि उसे अपने सदाचार के लिए उतनी अवधि के लिए जो एक वर्ष से अधिक न होगी, जितनी मजिस्ट्रेट ठीक समझे, प्रतिभू सहित या रहित बंद-पत्र निष्पादित करने का आदेश क्यों न दिया जाए।
Important Sub-Sections Explained
Landmark Judgements
बालबीर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1993):
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 के तहत की गई कार्यवाही प्रकृति में निवारक है न कि दंडात्मक। इसका प्राथमिक उद्देश्य भविष्य में संज्ञेय अपराधों को होने से रोकना और सार्वजनिक शांति बनाए रखना है।
रामेश्वर सिंह बनाम बिहार राज्य (1957):
उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 109 में उल्लिखित ‘विश्वास करने का कारण’ निश्चित और विश्वसनीय जानकारी पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल संदेह पर। व्यक्ति के कार्य स्पष्ट रूप से अपराध करने के इरादे का संकेत देने चाहिए।
गोपी चंद बनाम दिल्ली राज्य (1960):
उच्चतम न्यायालय ने दोहराया कि इस धारा के प्रावधानों का उद्देश्य अपराधों की रोकथाम और लोक व्यवस्था बनाए रखना है, न कि पिछले उल्लंघनों के लिए दंडित करना।