अध्याय बारह
CrPC Section 164A in Hindi: बलात्संग पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण
New Law Update (2024)
धारा 192 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – अन्वेषण / जाँच
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) जहां, उस प्रक्रम के दौरान, जब बलात्संग करने या बलात्संग करने के प्रयत्न का कोई अपराध अन्वेषणाधीन है, और जिस स्त्री के संबंध में यह अभिकथन किया गया है या जिसका बलात्संग करने का प्रयत्न किया गया है, उसके शरीर का किसी चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा परीक्षण कराना प्रस्तावित है, वहां ऐसा परीक्षण, सरकार द्वारा चलाए जा रहे या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे किसी अस्पताल में नियोजित किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक द्वारा, और ऐसे चिकित्सक के अभाव में, किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक द्वारा, ऐसी स्त्री की या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने में सक्षम किसी व्यक्ति की सहमति से किया जाएगा और ऐसी स्त्री को ऐसे अपराध के किए जाने से संबंधित सूचना की प्राप्ति के समय से चौबीस घंटे के भीतर ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक के पास भेजा जाएगा।
(2) जिस रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक के पास ऐसी स्त्री को भेजा जाता है, वह अविलंब उसके शरीर का परीक्षण करेगा और अपने परीक्षण की एक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें निम्नलिखित विशिष्टियाँ दी जाएंगी, अर्थात् :—
(i) स्त्री का नाम और पता और उस व्यक्ति का नाम और पता, जिसके द्वारा उसे लाया गया है;
(ii) स्त्री की आयु;
(iii) डी.एन.ए. प्रोफाइलिंग के लिए स्त्री के शरीर से लिए गए सामग्री का विवरण;
(iv) स्त्री के शरीर पर यदि कोई क्षतिकारी चिह्न है;
(v) स्त्री की सामान्य मानसिक दशा; और
(vi) अन्य तात्विक विशिष्टियाँ उचित विस्तार से।
(3) रिपोर्ट में प्रत्येक निकाले गए निष्कर्ष के कारण यथार्थतः बताए जाएंगे।
(4) रिपोर्ट में विशिष्टतया यह अभिलिखित किया जाएगा कि स्त्री की या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने में सक्षम व्यक्ति की ऐसी परीक्षा के लिए सहमति अभिप्राप्त कर ली गई थी।
(5) परीक्षण के आरंभ और पूरा होने का ठीक समय भी रिपोर्ट में नोट किया जाएगा।
(6) रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक अविलंब रिपोर्ट अन्वेषण अधिकारी को अग्रसारित करेगा, जो उसे धारा 173 में निर्दिष्ट मजिस्ट्रेट को उस धारा की उपधारा (5) के खंड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों के भाग के रूप में अग्रसारित करेगा।
(7) इस धारा की कोई बात स्त्री की या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने में सक्षम किसी व्यक्ति की सहमति के बिना किसी परीक्षण को विधिपूर्ण बनाने वाली नहीं समझी जाएगी।
Important Sub-Sections Explained
धारा 164क(1)
यह उपधारा अधिदेशित करती है कि बलात्संग पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण एक रजिस्ट्रीकृत चिकित्सक द्वारा, स्पष्ट सहमति से, और महत्वपूर्ण रूप से, अपराध के संबंध में जानकारी प्राप्त होने के चौबीस घंटे के भीतर किया जाना चाहिए।
धारा 164क(2)
यह भाग उन आवश्यक विशिष्टियों को निर्दिष्ट करता है जो चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट में होनी चाहिए, जिसमें पीड़िता की व्यक्तिगत जानकारी, डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए ली गई सामग्री का विवरण, देखे गए कोई भी क्षतिकारी चिह्न और उसकी सामान्य मानसिक स्थिति शामिल है।
Landmark Judgements
लिलु रजक और अन्य बनाम बिहार राज्य (2019):
उच्चतम न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164क के तहत बलात्संग पीड़िता की त्वरित और संवेदनशील चिकित्सा जांच के अनिवार्य स्वरूप और महत्वपूर्ण महत्व पर जोर दिया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किसी भी देरी या विफलता से अभियोजन के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ (2018):
यद्यपि यह मुख्य रूप से पॉक्सो के तहत बाल पीड़ितों से संबंधित था, इस उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने यौन उत्पीड़न के मामलों में चिकित्सा जांच के संवेदनशील और बाल-मैत्रीपूर्ण आचरण के लिए व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित किए, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164क से संबंधित सिद्धांतों जैसे सहमति और समय पर रिपोर्टिंग को सुदृढ़ किया गया।
पंजाब राज्य बनाम रामदेव सिंह (2004):
यह मामला, हालांकि धारा 164क के निवेशन से पहले का है, यौन उत्पीड़न के मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र करने और उसके विनाश को रोकने के लिए पीड़ित और आरोपी की तत्काल चिकित्सा जांच की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है, जिसमें चिकित्सा पेशेवरों द्वारा सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण पर जोर दिया गया है।