अध्याय XXXII

CrPC Section 417 in Hindi: कारावास का स्थान नियत करने की शक्ति

New Law Update (2024)

धारा 471 भा.ना.सु.सं.

TRIAL COURT

Punishment​

प्रक्रियात्मक – विचारण / आरोप

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) जब तक कि तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो, राज्य सरकार यह निदेश दे सकेगी कि इस संहिता के अधीन कारावासित किए जाने या अभिरक्षा में सुपुर्द किए जाने के लिए दायी कोई व्यक्ति किस स्थान में परिरुद्ध किया जाएगा।
(2) यदि इस संहिता के अधीन कारावासित किए जाने या अभिरक्षा में सुपुर्द किए जाने के लिए दायी कोई व्यक्ति किसी सिविल कारागार में परिरुद्ध है तो कारावास या सुपुर्दगी का आदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट यह निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति किसी दांडिक कारागार को हटा दिया जाए।
(3) जब कोई व्यक्ति उपधारा (2) के अधीन किसी दांडिक कारागार को हटा दिया जाता है तब वह उससे निर्मुक्त किए जाने पर सिविल कारागार को वापस भेज दिया जाएगा, जब तक कि —
(क) उसे दांडिक कारागार को हटाए जाने से तीन वर्ष समाप्त न हो गए हों, ऐसी दशा में यह समझा जाएगा कि वह सिविल कारागार से सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 58 के अधीन या प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) की धारा 23 के अधीन, यथास्थिति, निर्मुक्त हो गया है; या
(ख) उस न्यायालय ने, जिसने उसे सिविल कारागार में कारावासित किए जाने का आदेश दिया था, दांडिक कारागार के भारसाधक अधिकारी को यह प्रमाणित न कर दिया हो कि वह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 58 के अधीन या प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) की धारा 23 के अधीन, यथास्थिति, निर्मुक्त किए जाने का हकदार है।

Important Sub-Sections Explained

धारा 417(1)

यह उपधारा राज्य सरकार को दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन कारावासित किए जाने या अभिरक्षा में रखे जाने के लिए दायी किसी व्यक्ति के परिरोध का स्थान अवधारित करने के लिए सशक्त करती है, जब तक कि कोई विशिष्ट विधि अन्यथा उपबंध न करे।

धारा 417(2)

यह उपधारा किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति को सिविल कारागार से दांडिक कारागार में हटाने का निदेश देने की अनुज्ञा देती है, यदि वह व्यक्ति दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन कारावास या अभिरक्षा के लिए दायी है।

Landmark Judgements

Draft Format / Application

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