प्रस्तावना
जनगणना किसी भी राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का दर्पण होती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों का विश्लेषण करने पर राजस्थान की जनसांख्यिकीय संरचना, नगरीकरण, साक्षरता और लिंगानुपात में महत्वपूर्ण परिवर्तन और प्रवृत्तियाँ देखने को मिलती हैं। प्रस्तुत अध्ययन में राजस्थान की जनगणना-2011 के आंकड़ों का विस्तृत और तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

1. कुल जनसंख्या एवं वितरण (Total Population and Distribution)
जनगणना 2011 के अनुसार, राजस्थान की कुल जनसंख्या 6,85,48,437 (छह करोड़ पचहत्तर लाख अड़तालीस हजार चार सौ सैंतीस) दर्ज की गई है। जनसंख्या के वितरण को समझने के लिए इसे ग्रामीण और शहरी परिप्रेक्ष्य में विभाजित करना आवश्यक है।
1.1 ग्रामीण बनाम शहरी विभाजन
राजस्थान मुख्य रूप से एक ग्रामीण प्रधान राज्य है, जहाँ तीन-चौथाई आबादी गांवों में निवास करती है।
- ग्रामीण जनसंख्या: राज्य की कुल आबादी का एक विशाल हिस्सा, यानी 5,15,00,352 व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। यह कुल जनसंख्या का 75.1 प्रतिशत है।
- ग्रामीण पुरुष जनसंख्या: 2,66,41,747 (74.9 प्रतिशत)
- ग्रामीण महिला जनसंख्या: 24,85,86,05 (75.3 प्रतिशत)
- शहरी जनसंख्या: राज्य में नगरीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप शहरी जनसंख्या 1,70,48,085 दर्ज की गई है, जो कुल जनसंख्या का 24.9 प्रतिशत है।
- शहरी पुरुष जनसंख्या: 89,09,250 (25.1 प्रतिशत)
- शहरी महिला जनसंख्या: 81,38,835 (24.7 प्रतिशत)
2. जिलावार जनसंख्या विश्लेषण (District-wise Population Analysis)
जनसंख्या का क्षेत्रीय वितरण समान नहीं है। कुछ जिलों में अत्यधिक जनसांद्रता है, जबकि मरुस्थलीय क्षेत्रों में विरलता पाई जाती है।
2.1 सर्वाधिक जनसंख्या वाले शीर्ष 5 जिले
राज्य की राजधानी और अन्य प्रमुख शहर जनसंख्या के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। आंकड़ों के अनुसार घटते क्रम में स्थिति निम्न प्रकार है:
| क्रमांक | जिला | जनसंख्या (लाख में) |
|---|---|---|
| 1. | जयपुर | 66.26 लाख |
| 2. | जोधपुर | 36.87 लाख |
| 3. | अलवर | 36.74 लाख |
| 4. | नागौर | 33.07 लाख |
| 5. | उदयपुर | 30.68 लाख |
2.2 न्यूनतम जनसंख्या वाले 5 जिले
भौगोलिक विषमताओं और दुर्गम क्षेत्रों के कारण इन जिलों में जनसंख्या का दबाव सबसे कम है:
| क्रमांक | जिला | जनसंख्या (लाख में) |
|---|---|---|
| 1. | जैसलमेर | 6.69 लाख |
| 2. | प्रतापगढ़ | 8.67 लाख |
| 3. | सिरोही | 10.36 लाख |
| 4. | बूंदी | 11.10 लाख |
| 5. | राजसमंद | 11.56 लाख |
2.3 विशिष्ट जनसांख्यिकीय तथ्य
- सबसे बड़ा जिला (जनसंख्या): जयपुर (6,626,178) राज्य का सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला है।
- सबसे छोटा जिला (जनसंख्या): जैसलमेर (669,919) सबसे कम जनसंख्या वाला जिला है।
- सर्वाधिक शहरीकरण: जयपुर जिले में सर्वाधिक शहरी जनसंख्या (34,71,847) निवास करती है।
- न्यूनतम शहरीकरण: प्रतापगढ़ में सबसे कम शहरी जनसंख्या (71,807) पाई गई है।
- सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या: जयपुर (31,54,331) संख्या के आधार पर सर्वाधिक ग्रामीण आबादी वाला जिला भी है।
- न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या: जैसलमेर (5,80,894) में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या है।
2.4 प्रतिशत के आधार पर निवास
- ग्रामीण बहुलता: डूंगरपुर जिला अपनी कुल जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत (93.6 प्रतिशत) ग्रामीण क्षेत्रों में रखता है, जो इसे राज्य का सबसे अधिक ‘ग्रामीण जिला’ बनाता है।
- शहरी बहुलता: कोटा जिला अपनी कुल जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत (60.3 प्रतिशत) शहरी क्षेत्रों में रखता है, जो इसे राज्य का सर्वाधिक ‘शहरीकृत जिला’ बनाता है।
3. दशकीय जनसंख्या वृद्धि (Decadal Growth: 2001-2011)
वर्ष 2001 से 2011 के दशक के मध्य जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन को दशकीय वृद्धि दर कहा जाता है।
- निरपेक्ष वृद्धि: इस दशक में कुल 1,20,41,249 लोगों की वृद्धि हुई।
- कुल वृद्धि दर: यह वृद्धि दर 21.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
- पुरुष संख्या में वृद्धि: 61,30,986 (20.8 प्रतिशत)
- महिला संख्या में वृद्धि: 59,10,263 (21.8 प्रतिशत)
3.1 ग्रामीण एवं शहरी वृद्धि दर
विकास और प्रवास के चलते शहरी और ग्रामीण वृद्धि दरों में भारी अंतर देखा गया है:
- शहरी दशकीय वृद्धि दर: 29 प्रतिशत (जो तीव्र शहरीकरण का संकेत है)।
- ग्रामीण दशकीय वृद्धि दर: 19 प्रतिशत।
3.2 दशकीय वृद्धि का जिलावार विश्लेषण
सर्वाधिक वृद्धि दर वाले 5 जिले: पश्चिमी राजस्थान के जिलों में वृद्धि दर आश्चर्यजनक रूप से उच्च रही है।
- बाड़मेर: 32.5 प्रतिशत (राज्य में सर्वाधिक)
- जैसलमेर: 31.8 प्रतिशत
- जोधपुर: 27.7 प्रतिशत
- बांसवाड़ा: 26.5 प्रतिशत
- जयपुर: 26.2 प्रतिशत
न्यूनतम वृद्धि दर वाले 5 जिले: उत्तरी और मध्य राजस्थान के कुछ जिलों में जनसंख्या नियंत्रण के सकारात्मक संकेत मिले हैं।
- गंगानगर: 10.0 प्रतिशत (राज्य में न्यूनतम)
- झुंझुनूं: 11.7 प्रतिशत
- पाली: 11.9 प्रतिशत
- बूंदी: 15.4 प्रतिशत
- चित्तौड़गढ़: 16.1 प्रतिशत
वृद्धि दर के विशिष्ट बिंदु:
- सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि: जैसलमेर (34.5 प्रतिशत)
- न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि: कोटा (6.1 प्रतिशत) – इसका कारण कोटा में शहरीकरण की तीव्र गति हो सकती है।
- सर्वाधिक शहरी जनसंख्या वृद्धि: अलवर (50.5 प्रतिशत) – यह एनसीआर (NCR) क्षेत्र के प्रभाव को दर्शाता है।
- न्यूनतम शहरी जनसंख्या वृद्धि: डूंगरपुर (9.8 प्रतिशत)
4. जनसंख्या घनत्व (Population Density)
जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों की औसत संख्या को दर्शाता है। 2011 में राजस्थान का जनघनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।
4.1 घनत्व का भौगोलिक वितरण
सर्वाधिक जनघनत्व वाले 5 जिले (पूर्वी राजस्थान): मैदानी भाग और औद्योगिक विकास के कारण यहाँ सघनता अधिक है।
- जयपुर: 595 व्यक्ति/वर्ग किमी
- भरतपुर: 503 व्यक्ति/वर्ग किमी
- दौसा: 476 व्यक्ति/वर्ग किमी
- अलवर: 438 व्यक्ति/वर्ग किमी
- धौलपुर: 398 व्यक्ति/वर्ग किमी
न्यूनतम जनघनत्व वाले 5 जिले (पश्चिमी राजस्थान): मरुस्थलीय परिस्थितियों के कारण यहाँ जनसंख्या अत्यंत विरल है।
- जैसलमेर: 17 व्यक्ति/वर्ग किमी (राज्य में सबसे कम)
- बीकानेर: 78 व्यक्ति/वर्ग किमी
- बाड़मेर: 92 व्यक्ति/वर्ग किमी
- चूरू: 147 व्यक्ति/वर्ग किमी
- जोधपुर: 161 व्यक्ति/वर्ग किमी
5. लिंगानुपात विश्लेषण (Sex Ratio Analysis)
लिंगानुपात समाज में महिलाओं की स्थिति का एक महत्वपूर्ण सूचक है। इसे प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में मापा जाता है।
- राज्य का औसत लिंगानुपात: 928
- शहरी लिंगानुपात: 914 (यह चिंताजनक रूप से कम है)
- ग्रामीण लिंगानुपात: 933
5.1 जिलावार लिंगानुपात की स्थिति
सर्वाधिक लिंगानुपात वाले 5 जिले: दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में लिंगानुपात अपेक्षाकृत बेहतर है।
- डूंगरपुर: 994 (राज्य में सर्वोच्च)
- राजसमंद: 990
- पाली: 987
- प्रतापगढ़: 983
- बांसवाड़ा: 980
न्यूनतम लिंगानुपात वाले 5 जिले: पूर्वी और उत्तरी राजस्थान के जिलों में स्थिति विचारणीय है।
- धौलपुर: 846 (राज्य में सबसे कम)
- जैसलमेर: 852
- करौली: 861
- भरतपुर: 880
- गंगानगर: 887
5.2 क्षेत्र-विशिष्ट लिंगानुपात
- ग्रामीण क्षेत्र: सर्वाधिक लिंगानुपात पाली (1003) में है, जो एक सकारात्मक आंकड़ा है। वहीं, न्यूनतम धौलपुर (841) में है।
- शहरी क्षेत्र: सर्वाधिक लिंगानुपात टोंक (985) में है, जबकि न्यूनतम जैसलमेर (807) में दर्ज किया गया है।
6. शिशु जनसंख्या (0-6 आयु वर्ग) – (Child Population Demographics)
भविष्य की जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक स्वास्थ्य को समझने के लिए 0-6 आयु वर्ग के आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- कुल शिशु जनसंख्या: 1,06,49,504 (कुल आबादी का 15.5 प्रतिशत)
- ग्रामीण: 84,14,883 (16.3 प्रतिशत) – पुरुष: 16.7%, महिला: 16.0%
- शहरी: 22,34,621 (13.1 प्रतिशत) – पुरुष: 13.4%, महिला: 12.8%
6.1 तुलनात्मक परिवर्तन (2001 बनाम 2011)
कुल जनसंख्या में बच्चों (0-6 वर्ष) के अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है, जो प्रजनन दर में कमी का संकेत है।
| विवरण | 2001 में प्रतिशत | 2011 में प्रतिशत | परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| कुल | 18.85% | 15.5% | (-) 3.35% |
| पुरुष | 18.97% | 15.9% | (-) 3.07% |
| महिला | 18.72% | 15.2% | (-) 3.52% |
- सर्वाधिक शिशु जनसंख्या: जयपुर (9,29,926)
- न्यूनतम शिशु जनसंख्या: जैसलमेर (1,30,463)
6.2 शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष)
यह एक अत्यंत संवेदनशील सामाजिक मुद्दा है।
- राज्य का औसत शिशु लिंगानुपात: 888 (बालिकाएं प्रति 1000 बालक)
- शहरी शिशु लिंगानुपात: 874
- ग्रामीण शिशु लिंगानुपात: 892
सर्वाधिक शिशु लिंगानुपात वाले 5 जिले:
- बांसवाड़ा (934)
- प्रतापगढ़ (933)
- उदयपुर (924) (टंकण त्रुटि सुधार: 924 सही क्रम में)
- भीलवाड़ा (928)
- डूंगरपुर (922)
न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले 5 जिले: शेखावटी क्षेत्र में यह आंकड़ा चिंताजनक है।
- झुंझुनूं (837)
- सीकर (848)
- करौली (852)
- गंगानगर (854)
- धौलपुर (857)
7. सामाजिक वर्ग: अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC & ST Demographics)
सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के नियोजन हेतु इन वर्गों के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं।
7.1 अनुसूचित जाति (Scheduled Castes – SC)
- कुल जनसंख्या: 1,22,21,593
- प्रतिशत: राज्य की कुल जनसंख्या का 17.8 प्रतिशत।
- वितरण:
- ग्रामीण: 95,36,963 (18.5 प्रतिशत)
- शहरी: 26,84,630 (15.7 प्रतिशत)
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला: जयपुर (10,03,302)
- न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला: डूंगरपुर (52,267)
- दशकीय वृद्धि (सर्वाधिक): बाड़मेर (41.2 प्रतिशत)
- दशकीय वृद्धि (न्यूनतम): डूंगरपुर (13.7 प्रतिशत)
7.2 अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes – ST)
- कुल जनसंख्या: 92,38,534
- प्रतिशत: राज्य की कुल जनसंख्या का 13.5 प्रतिशत।
- वितरण:
- ग्रामीण: 86,93,123 (16.9 प्रतिशत) – जनजातीय आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण है।
- शहरी: 5,45,411 (3.2 प्रतिशत)
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला: उदयपुर (15,25,289)
- न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला: बीकानेर (7,779)
- दशकीय वृद्धि (सर्वाधिक): नागौर (60.4 प्रतिशत)
- दशकीय वृद्धि (न्यूनतम): गंगानगर (-8.6 प्रतिशत) – यहाँ ऋणात्मक वृद्धि देखी गई है।
8. साक्षरता परिदृश्य (Literacy Scenario)
शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है, लेकिन लैंगिक और क्षेत्रीय असमानताएँ अभी भी विद्यमान हैं।
- कुल साक्षरता: 66.1 प्रतिशत
- शहरी साक्षरता: 79.7 प्रतिशत
- ग्रामीण साक्षरता: 61.4 प्रतिशत
- पुरुष साक्षरता: 79.2 प्रतिशत
- शहरी पुरुष: 87.9 प्रतिशत
- ग्रामीण पुरुष: 76.2 प्रतिशत
- महिला साक्षरता: 52.1 प्रतिशत
- शहरी महिला: 70.7 प्रतिशत
- ग्रामीण महिला: 45.8 प्रतिशत (यह आंकड़ा विशेष ध्यान देने योग्य है)।
8.1 जिलावार साक्षरता विश्लेषण
सर्वाधिक साक्षरता वाले 5 जिले: शैक्षणिक हब होने के कारण कोटा शीर्ष पर है।
- कोटा: 76.6 प्रतिशत
- जयपुर: 75.5 प्रतिशत
- झुंझुनूं: 74.1 प्रतिशत
- सीकर: 71.9 प्रतिशत
- अलवर: 70.7 प्रतिशत
न्यूनतम साक्षरता वाले 5 जिले:
- जालौर: 54.9 प्रतिशत (राज्य में न्यूनतम)
- सिरोही: 55.3 प्रतिशत
- प्रतापगढ़: 56.0 प्रतिशत
- बांसवाड़ा: 56.3 प्रतिशत
- बाड़मेर: 56.5 प्रतिशत
8.2 साक्षरता के विशिष्ट आयाम
ग्रामीण एवं शहरी साक्षरता:
- सर्वाधिक ग्रामीण साक्षरता: झुंझुनूं (73.4 प्रतिशत) – यहाँ ग्रामीण शिक्षा का स्तर उत्कृष्ट है।
- न्यूनतम ग्रामीण साक्षरता: सिरोही (49.0 प्रतिशत)।
- सर्वाधिक शहरी साक्षरता: उदयपुर (87.5 प्रतिशत)।
- न्यूनतम शहरी साक्षरता: नागौर (70.6 प्रतिशत)।
पुरुष साक्षरता:
- शीर्ष जिला: झुंझुनूं (86.9 प्रतिशत) – यह जिला पुरुष साक्षरता में राज्य में प्रथम है।
- न्यूनतम जिला: प्रतापगढ़ व बांसवाड़ा (संयुक्त रूप से 69.5 प्रतिशत)।
- सर्वाधिक ग्रामीण पुरुष साक्षरता: झुंझुनूं (86.8 प्रतिशत)।
- न्यूनतम ग्रामीण पुरुष साक्षरता: सिरोही (64.6 प्रतिशत)।
महिला साक्षरता: महिला साक्षरता राज्य के विकास की सबसे बड़ी चुनौती है।
- शीर्ष जिला: कोटा (65.9 प्रतिशत)।
- न्यूनतम जिला: जालौर (38.5 प्रतिशत) – यह आंकड़ा अत्यंत निम्न है।
- सर्वाधिक शहरी महिला साक्षरता: उदयपुर (उल्लेखनीय प्रगति)।
- न्यूनतम शहरी महिला साक्षरता: धौलपुर।
निष्कर्ष:
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े राजस्थान के जनसांख्यिकीय संक्रमण के दौर को स्पष्ट करते हैं। जहाँ एक ओर साक्षरता और शहरीकरण में वृद्धि एक प्रगतिशील समाज का संकेत देती है, वहीं गिरता हुआ बाल लिंगानुपात (विशेषकर झुंझुनूं और सीकर जैसे साक्षर जिलों में) एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देना और जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को समान रूप से लागू करना राज्य के समावेशी विकास के लिए अनिवार्य प्रतीत होता है।
2011 के अनुसार राजस्थान की कुल जनसंख्या कितनी थी?
जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान की कुल जनसंख्या 6,85,48,437 (छह करोड़ पचहत्तर लाख अड़तालीस हजार चार सौ सैंतीस) थी। इसमें पुरुषों की संख्या 89,09,250 और महिलाओं की संख्या 81,38,835 थी।
राजस्थान में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला जिला कौन सा है?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जयपुर राजस्थान का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है। इसकी कुल जनसंख्या 66.26 लाख (6,626,178) दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, यह सर्वाधिक शहरी (34,71,847) और सर्वाधिक ग्रामीण (31,54,331) जनसंख्या वाला जिला भी है।
जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा जिला कौन सा है?
जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान का सबसे छोटा जिला जैसलमेर है। वर्ष 2011 में इसकी कुल जनसंख्या मात्र 6.69 लाख (669,919) थी। साथ ही, यह न्यूनतम जनघनत्व (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) वाला जिला भी है।
राजस्थान में कौन से जिले में सबसे कम जनसंख्या है?
जैसलमेर जिले में सबसे कम जनसंख्या है। यहाँ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मरुस्थलीय भू-भाग के कारण आबादी का बसाव कम है, जो कि 2011 में 6,69,919 व्यक्तियों तक सीमित था।
राजस्थान का सबसे शिक्षित जिला कौन सा है?
साक्षरता दर के आंकड़ों के अनुसार, कोटा राजस्थान का सबसे शिक्षित जिला है। यहाँ की कुल साक्षरता दर 76.6 प्रतिशत है।
नोट: यदि केवल ‘पुरुष साक्षरता’ की बात करें, तो झुंझुनूं (86.9%) सबसे आगे है, लेकिन कुल साक्षरता में कोटा शीर्ष पर है।