अध्याय XXVII

CrPC Section 353 in Hindi: निर्णय

New Law Update (2024)

धारा 398 बी.एन.एस.एस.

TRIAL COURT

मूल अधिकारिता वाला दांडिक न्यायालय

Punishment​

प्रक्रियात्मक – विचारण / आरोप

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

(1) मूल अधिकारिता वाले किसी दांडिक न्यायालय में प्रत्येक विचारण में निर्णय पीठासीन अधिकारी द्वारा खुले न्यायालय में सुनाया जाएगा,—
(क) विचारण की समाप्ति के तत्काल पश्चात् या किसी पश्चात् के ऐसे समय पर जिसकी सूचना पक्षकारों या उनके प्लीडरों को दी जाएगी;
(ख) निर्णय को पूरा सुनाकर; या
(ग) निर्णय को पूरा पढ़कर सुनाकर; या
(घ) निर्णय के प्रवर्तनशील भाग को पढ़कर सुनाकर और निर्णय का सार ऐसी भाषा में समझाकर जिसे अभियुक्त या उसका प्लीडर समझता है।
(2) जहां उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन निर्णय सुनाया जाता है, वहां पीठासीन अधिकारी उसे शीघ्रलिपि में लिखवाएगा, जैसे ही प्रतिलेख तैयार हो जाए उस पर और उसके हर पृष्ठ पर हस्ताक्षर करेगा और खुले न्यायालय में निर्णय सुनाए जाने की तारीख उस पर लिखेगा।
(3) जहां उपधारा (1) के खंड (ग) या खंड (घ) के अधीन, यथास्थिति, निर्णय या उसका प्रवर्तनशील भाग पढ़कर सुनाया जाता है, वहां उस पर खुले न्यायालय में पीठासीन अधिकारी द्वारा तारीख डाली जाएगी और हस्ताक्षर किए जाएंगे और यदि वह उसके अपने हाथ से नहीं लिखा गया है, तो निर्णय के हर पृष्ठ पर उसके हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(4) जहां निर्णय उपधारा (1) के खंड (घ) में विनिर्दिष्ट रीति से सुनाया जाता है, वहां संपूर्ण निर्णय या उसकी एक प्रति पक्षकारों या उनके प्लीडरों के परिशीलन के लिए निःशुल्क तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी।
(5) यदि अभियुक्त अभिरक्षा में है, तो निर्णय सुनाए जाने के लिए उसे हाजिर किया जाएगा।
(6) यदि अभियुक्त अभिरक्षा में नहीं है, तो न्यायालय द्वारा उसे निर्णय सुनाए जाने के लिए उपस्थित रहने की अपेक्षा की जाएगी, सिवाय जहां विचारण के दौरान उसकी व्यक्तिगत हाजिरी से अभिमुक्ति दे दी गई है और दंडादेश केवल जुर्माने का है या वह दोषमुक्त कर दिया जाता है;
परंतु जहां एक से अधिक अभियुक्त हैं और उनमें से एक या अधिक उस तारीख को न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं जिसको निर्णय सुनाया जाना है, वहां पीठासीन अधिकारी मामले के निपटारे में अनावश्यक विलंब से बचने के लिए, उनकी अनुपस्थिति के बावजूद निर्णय सुना सकेगा।
(7) किसी दांडिक न्यायालय द्वारा सुनाया गया कोई भी निर्णय केवल किसी पक्षकार या उसके प्लीडर की उस दिन या उस स्थान से अनुपस्थिति के कारण, जो उसके सुनाए जाने के लिए अधिसूचित किया गया है, या पक्षकारों या उनके प्लीडरों पर या उनमें से किसी पर ऐसे दिन और स्थान की सूचना की तामील करने में किसी लोप या त्रुटि के कारण, अविधिमान्य नहीं समझा जाएगा।
(8) इस धारा की कोई बात धारा 465 के उपबंधों के विस्तार को किसी भी प्रकार से सीमित करने वाली नहीं समझी जाएगी।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

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