अध्याय पैंतीस

CrPC Section 466 in Hindi: त्रुटि या गलती से कुर्की अवैध नहीं होगी

New Law Update (2024)

धारा 504 बीएनएसएस

TRIAL COURT

Punishment​

प्रक्रियात्मक – वारंट / समन प्रक्रिया

Cognizable?

Bailable?

Compoundable?

Bare Act Text

इस संहिता के अधीन की गई कोई भी कुर्की अवैध नहीं समझी जाएगी, न ही इसे करने वाले किसी व्यक्ति को समन, दोषसिद्धि, कुर्की के वारंट या उससे संबंधित अन्य कार्यवाहियों में किसी त्रुटि या स्वरूप की कमी के कारण अतिचारी समझा जाएगा। इस अध्याय के प्रावधान कुछ आर्थिक अपराधों पर लागू नहीं होंगे; विवरण के लिए, आर्थिक अपराधों (परिसीमन अधिनियम, 1974 (1974 का 12) की अप्रयोज्यता) की धारा 2 और अनुसूची देखें।

Important Sub-Sections Explained

Landmark Judgements

कस्तूरीलाल हरलाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (1987):

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस मामले ने स्पष्ट किया कि किसी कुर्की को अवैध माने जाने के लिए, दोष सारभूत होना चाहिए, न कि केवल दस्तावेज़ीकरण के स्वरूप में एक मामूली अनियमितता या दोष। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 466 अन्यथा वैध कुर्कियों को तुच्छ प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण निरस्त होने से रोकती है।

एन.बी. बाबूलाल जैन बनाम महाराष्ट्र राज्य (1960):

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता (तब धारा 87, अब धारा 82) के तहत जारी एक उद्घोषणा में मामूली दोष, अपने आप में, बाद की कुर्की को अवैध नहीं बनाएंगे, धारा 466 के सिद्धांत को सुदृढ़ करते हुए कि स्वरूप में मात्र दोष कुर्की को दूषित नहीं करते हैं।

Draft Format / Application

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