1. प्रस्तावना (Introduction)
ऊर्जा, किसी भी राज्य या राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। आधुनिक युग में विद्युत संसाधनों का विकास न केवल औद्योगिक प्रगति के लिए, बल्कि कृषि, आधारभूत संरचना और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए एक अनिवार्य शर्त है।
राजस्थान, जो अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मरुस्थलीय भू-भाग के लिए जाना जाता है, ने पिछले कुछ दशकों में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। पश्चिमी राजस्थान के भू-गर्भ में छिपे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार तथा थार के मरुस्थल में उपलब्ध उच्च सौर विकिरण क्षमता ने राजस्थान को:
- ‘पावर डेफिसिट’ (ऊर्जा कमी) वाले राज्य से
- ‘पावर सरप्लस’ (ऊर्जा अधिशेष) वाले राज्य में
बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
💡 June 2026 Update: राजस्थान की कुल स्थापित विद्युत क्षमता ~60 GW को पार कर चुकी है। सौर ऊर्जा में राजस्थान भारत में प्रथम स्थान पर है। राज्य अब न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भर है, बल्कि अन्य राज्यों को बिजली निर्यात भी कर रहा है।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
| वर्ष | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| 1947-49 | विद्युतीकृत शहर/गांव: मात्र 42 |
| 1947-49 | कुल स्थापित क्षमता: मात्र 13.27 MW |
| 1 जुलाई 1957 | RSEB (राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड) का गठन |
| 19 जुलाई 2000 | RSEB भंग → 5 अलग कंपनियों में पुनर्गठन |
| 2011 | सौर नीति — भारत का पहला राज्य |
| 2019 | सौर क्षमता में देश में प्रथम स्थान |
| मार्च 2026 | कुल स्थापित क्षमता ~60 GW |
3. विद्युत क्षेत्र का संस्थागत ढांचा एवं सुधार
विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम, 1999 के तहत 19 जुलाई 2000 को RSEB को भंग करके पाँच विशिष्ट कंपनियों में पुनर्गठित किया गया।
19 जुलाई 2000 को गठित पाँच कंपनियाँ:
| कंपनी | संक्षिप्त नाम | मुख्यालय | कार्य |
|---|---|---|---|
| राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड | RVUNL | जयपुर | विद्युत उत्पादन (Generation) |
| राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड | RVPNL | जयपुर | उच्च वोल्टेज पारेषण (Transmission) |
| जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड | JVVNL | जयपुर | जयपुर क्षेत्र में वितरण |
| अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड | AVVNL | अजमेर | मध्य राजस्थान वितरण |
| जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड | JdVVNL | जोधपुर | पश्चिमी राजस्थान वितरण |
राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (RERC)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | 2 जनवरी 2000 |
| मुख्यालय | जयपुर |
| प्रमुख कार्य | टैरिफ निर्धारण, लाइसेंस, उपभोक्ता संरक्षण |
निजी क्षेत्र की भागीदारी: भरतपुर, बीकानेर और कोटा में Franchise Model के तहत निजी वितरण कंपनियाँ कार्यरत हैं (KEDL — कोटा)।
राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (RUVNL): वर्ष 2015 में स्थापित। यह तीनों Discoms की ओर से बिजली खरीद-बिक्री (Power Trading) का कार्य करती है।
राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL): नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं एवं ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत।
4. ऊर्जा परिदृश्य — नवीनतम आँकड़े (June 2026)
🔴 सबसे अद्यतन डेटा — MNRE, CEA और आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार
| विवरण | आंकड़ा (जून 2026) |
|---|---|
| कुल स्थापित क्षमता (मार्च 2026) | ~60,000 MW (~60 GW) |
| नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (FY 2026) | ~46.6 GW |
| सौर ऊर्जा क्षमता (मई 2026) | 42.17 GW — भारत में प्रथम |
| पवन ऊर्जा क्षमता | ~5,200 MW (5.2 GW) |
| उपभोक्ता संख्या | 200 लाख+ (नए कनेक्शन जारी) |
| ग्रामीण विद्युतीकरण | शत-प्रतिशत |
| राज्य की भारत कुल सौर में हिस्सेदारी | ~27% (भारत कुल: 157 GW, मई 2026) |
ऊर्जा स्रोतों की भागीदारी (जून 2026):
| स्रोत | हिस्सेदारी | नोट |
|---|---|---|
| सौर ऊर्जा (Solar) | ~50%+ | कुल capacity का सबसे बड़ा हिस्सा |
| तापीय ऊर्जा (Thermal) | ~30-35% | Coal + Lignite + Gas |
| पवन ऊर्जा (Wind) | ~8-9% | 5.2 GW |
| परमाणु + हाइड्रो | शेष | RAPP 1880 MW (Unit 7 जुड़ा) |
⚡ ऐतिहासिक बदलाव: FY2022 में नवीकरणीय क्षमता ~17 GW थी, जो FY2026 में 46+ GW हो गई — महज 4 वर्षों में 270% से अधिक वृद्धि।
5. ऊर्जा संसाधनों का वर्गीकरण
ऊर्जा संसाधन
├── परंपरागत (Conventional) — अनवीकरणीय
│ ├── कोयला / लिग्नाइट
│ ├── पेट्रोलियम / गैस
│ ├── परमाणु ऊर्जा
│ └── जल विद्युत (बड़े बांध)
│
└── गैर-परंपरागत (Non-Conventional) — नवीकरणीय
├── सौर ऊर्जा ⭐ (42 GW — देश में प्रथम)
├── पवन ऊर्जा (5.2 GW)
├── बायोमास / बायोगैस
├── ग्रीन हाइड्रोजन ⭐ (नया उभरता क्षेत्र)
└── BESS — Battery Energy Storage (नई तकनीक)
🔑 महत्वपूर्ण तथ्य (June 2026):
- सर्वाधिक उत्पादन: अब सौर ऊर्जा — क्षमता में thermal को पीछे छोड़ दिया
- सर्वाधिक संभावना: सौर ऊर्जा — 142 GW+ (MNRE)
- भविष्य का स्तंभ: ग्रीन हाइड्रोजन — 2030 तक 2000 KTPA लक्ष्य
6. परंपरागत ऊर्जा स्रोत — विस्तृत विश्लेषण
(A) तापीय ऊर्जा (Thermal Power)
लिग्नाइट की समस्या:
- कार्बन प्रतिशत: 30-35% (कम)
- सल्फर मात्रा: अधिक
- ज्वलन क्षमता (Calorific Value): कम
- समाधान: बड़े सुपर क्रिटिकल प्लांट बाहरी राज्यों (छत्तीसगढ़, ओडिशा) के बिटुमिनस कोयले पर निर्भर
(i) सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट (SSTPS)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थिति | ठुकराना गाँव, सूरतगढ़ (जिला: श्रीगंगानगर) |
| उपनाम | “राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ” |
| विशेषता | राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट |
| चरण 1-4 | 250 MW × 6 = 1500 MW |
| सुपर क्रिटिकल (7वीं-8वीं इकाई) | 660 MW × 2 = 1320 MW |
| कुल क्षमता | 2820 मेगावाट (राज्य का सबसे बड़ा थर्मल केंद्र) |
(ii) कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट (KSTPS)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थिति | कोटा बैराज के पास (चंबल नदी किनारे) |
| विशेषता | राज्य का दूसरा सबसे बड़ा थर्मल प्लांट |
| कुल क्षमता | 1240 MW |
(iii) छाबड़ा थर्मल पावर प्लांट (CTPP)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थिति | मोतीपुरा चौकी, छाबड़ा (जिला: बारां) |
| विशेषता | राजस्थान का प्रथम सुपर क्रिटिकल तकनीक आधारित प्लांट |
| चरण 1 | 250 MW × 4 = 1000 MW |
| चरण 2 (सुपर क्रिटिकल) | 660 MW × 2 = 1320 MW |
| कुल क्षमता | 2320 MW |
💡 सुपर क्रिटिकल तकनीक: कम ईंधन में अधिक बिजली + कम प्रदूषण
(iv) कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थिति | झालावाड़ |
| क्षमता | 1200 MW (600 MW × 2) |
(v) अन्य प्रमुख लिग्नाइट-आधारित संयंत्र:
| संयंत्र | स्थान | विशेषता | क्षमता |
|---|---|---|---|
| गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट | बाड़मेर | प्रथम लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक, जर्मनी सहयोग | 250 MW |
| बरसिंगसर थर्मल पावर | बीकानेर | NLC (केंद्र सरकार) संचालित | — |
| JSW बाड़मेर (भादरेश) | बाड़मेर | निजी क्षेत्र | 1080 MW |
| कवाई पावर प्लांट | बारां | अडानी समूह | 1320 MW |
(B) गैस आधारित विद्युत परियोजनाएं
| संयंत्र | स्थान | विशेषता | क्षमता |
|---|---|---|---|
| रामगढ़ गैस थर्मल पावर | जैसलमेर | राजस्थान का प्रथम गैस-आधारित संयंत्र | ~273.5 MW |
| धौलपुर CCPS | धौलपुर | नेफ्था + गैस दोनों पर | 330 MW (110×3) |
| अंता | बारां | NTPC (केंद्र सरकार) | — |
(C) परमाणु ऊर्जा — राजस्थान अणु शक्ति परियोजना (RAPP) ⚛️
🔴 June 2026 Latest Update: RAPP यूनिट 7 अब पूरी तरह चालू (Operational) है!
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थिति | रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ (चंबल नदी किनारे) |
| स्थापना | 1973 — कनाडा के सहयोग से |
| भारत में स्थान | भारत का दूसरा परमाणु संयंत्र (तारापुर, महाराष्ट्र के बाद) |
| तकनीक | PHWR (Pressurised Heavy Water Reactor) — भारत में प्रथम |
RAPP इकाइयों की वर्तमान स्थिति (जून 2026):
| इकाई | क्षमता | स्थिति |
|---|---|---|
| यूनिट 1 | 100 MW | कार्यरत |
| यूनिट 2 | 200 MW | कार्यरत |
| यूनिट 3-6 | 220 × 4 MW | कार्यरत |
| यूनिट 7 | 700 MW | ✅ पूर्ण चालू — 10 फरवरी 2026 को 700 MW पर Rated Power |
| यूनिट 8 | 700 MW | 🔄 Commissioning चरण में (2026 में चालू अपेक्षित) |
| कुल (7 इकाइयाँ) | ~1880 MW | — |
📌 परीक्षा महत्वपूर्ण: यूनिट 7 सितंबर 2024 में पहली बार Critical हुई, मार्च 2025 में Grid से जुड़ी और 10 फरवरी 2026 को पूर्ण 700 MW क्षमता पर आई। यूनिट 8 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है।
बांसवाड़ा (माही) परियोजना:
- स्थान: नापला/दानपुर क्षेत्र, बांसवाड़ा
- राजस्थान का दूसरा प्रस्तावित परमाणु संयंत्र
- प्रस्तावित क्षमता: 700 MW × 4 = 2800 MW
(D) जल विद्युत (Hydro-Electric Power)
| परियोजना | भागीदारी | क्षमता |
|---|---|---|
| राणा प्रताप सागर बांध (चित्तौड़गढ़) | राजस्थान + मध्यप्रदेश (50:50) | 172 MW |
| जवाहर सागर बांध (कोटा) | राजस्थान + मध्यप्रदेश | 99 MW |
| माही बजाज सागर | राजस्थान + गुजरात | 140 MW (100% राजस्थान को) |
| भाखड़ा नांगल | बहु-राज्यीय | निश्चित हिस्सेदारी |
| व्यास परियोजना | बहु-राज्यीय | निश्चित हिस्सेदारी |
7. गैर-परंपरागत / नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
(A) सौर ऊर्जा — सूर्य नगरी की शक्ति ☀️
राजस्थान को सौर ऊर्जा के लिए क्यों सर्वश्रेष्ठ माना जाता है?
| कारक | विवरण |
|---|---|
| धूप के दिन | वर्ष में 325+ दिन |
| सौर विकिरण | 6-7 kWh/m²/day — देश में सर्वाधिक |
| सौर क्षमता (Potential) | 142 GW+ (MNRE के अनुसार) |
| स्थापित क्षमता (मई 2026) | 42.17 GW — भारत में प्रथम |
| भारत की कुल सौर में हिस्सा | ~27% (India total: 157 GW) |
| वर्तमान रैंकिंग | भारत में #1 (कर्नाटक, तेलंगाना को पीछे छोड़ा) |
नीतिगत प्रयास:
- 2011: सौर नीति घोषित करने वाला भारत का पहला राज्य
- राजस्थान सौर ऊर्जा नीति-2019: लागू
- राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2023: लागू
- राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 (ICEP-2024): 2029-30 तक 125 GW का लक्ष्य
प्रमुख सौर पार्क:
| सौर पार्क | जिला | विशेषता | क्षमता |
|---|---|---|---|
| भादला सोलर पार्क | जोधपुर | विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क, 5700 हेक्टेयर, 4 चरण | 2245 MW |
| भादला (NTPC Green Energy) | जोधपुर | 2026 में नई 300+125 MW क्षमता जोड़ी | 425 MW (नई) |
| नोख सोलर पार्क | जैसलमेर | RVUNL द्वारा | 925 MW |
| फतेहगढ़ सोलर पार्क | जैसलमेर | निजी परियोजना | — |
| फलोदी-पोकरण | जैसलमेर-जोधपुर | — | — |
🔴 June 2026 Update — भादला BESS: RSDCL (Rajasthan Solarpark Development Company Ltd.) ने भादला पार्क में Battery Energy Storage System (BESS) स्थापित करने के लिए EOI जारी किया है। यह 680 MW की grid connectivity को रात्रि में उपयोग करेगा, जिससे सोलर एनर्जी का भंडारण और 24×7 आपूर्ति संभव होगी।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| SEEZ | Solar Energy Enterprising Zone — जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर |
| प्रथम सौर संयंत्र | मथानिया (जोधपुर) |
| प्रथम सौर फ्रिज | बालेसर (जोधपुर) |
| निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट | खींवसर (नागौर) |
| अमेज़न का निवेश | एम्प एनर्जी के साथ 420 MW के 3 सौर फार्म |
प्रमुख सौर योजनाएं:
- PM-KUSUM योजना: किसानों को सोलर पंप + बंजर भूमि पर सौर संयंत्र। राजस्थान क्रियान्वयन में प्रथम।
- रूफटॉप सोलर: घरों की छतों पर सब्सिडी सहित सोलर पैनल।
- PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana (2024): रूफटॉप सोलर से 300 यूनिट/माह मुफ्त बिजली का लक्ष्य।
(B) पवन ऊर्जा (Wind Energy) 💨
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रथम पवन ऊर्जा नीति | 18 जुलाई 2012 |
| नवीनतम नीति | राजस्थान विंड एंड हाइब्रिड एनर्जी पॉलिसी-2019 |
| पवन क्षमता (100 मीटर पर) | ~18,770 MW (NIWE) |
| स्थापित क्षमता (जून 2026) | ~5,200 MW (5.2 GW) |
| देश में स्थान | शीर्ष 5 राज्यों में |
प्रमुख पवन ऊर्जा संयंत्र:
| संयंत्र | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| अमर सागर | जैसलमेर | राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र (1999) |
| देवगढ़ | प्रतापगढ़ | प्रमुख केंद्र |
| सोढ़ा बंधन | जैसलमेर | निजी क्षेत्र |
| बड़ा बाग | जैसलमेर | विस्तृत पवन चक्की क्षेत्र |
(C) बायोमास और बायोगैस (Biomass & Biogas) 🌱
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कच्चा माल | विलायती बबूल, चावल की भूसी, सरसों की तूड़ी, जूली फ्लोरा |
| कार्यरत संयंत्र | 13 से अधिक |
| प्रमुख केंद्र | गंगानगर (पदमपुर), हनुमानगढ़, कोटा |
| प्रथम बायोमास संयंत्र | पदमपुर (श्रीगंगानगर) |
| बायोगैस अग्रणी जिले | उदयपुर और जयपुर |
8. उभरती ऊर्जा तकनीकें — June 2026
(A) ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) 🟢 — भविष्य का ईंधन
राजस्थान ने ग्रीन हाइड्रोजन को ऊर्जा क्षेत्र के अगले महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में अपनाया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नीति | राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2023 |
| उत्पादन लक्ष्य (2030) | 2000 KTPA (किलो-टन प्रति वर्ष) |
| नोडल एजेंसी | RRECL (राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा निगम) |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | Green Hydrogen Parks, Hubs, Clusters, Valleys |
| Electrolyzer Giga-factory | कम से कम एक Giga-factory स्थापित करने का लक्ष्य |
प्रमुख प्रोत्साहन:
- Wheeling & Transmission charges में 100% छूट
- Banking charges में 7-10 वर्ष तक छूट
- RIPS-2024 के तहत Thrust Sector का दर्जा
- Fertilizer, Refinery उद्योगों को Green H₂ Supply के लिए “Green Hydrogen Valley”
(B) बैटरी ऊर्जा भंडारण (Battery Energy Storage System — BESS)
सौर और पवन ऊर्जा की एक बड़ी समस्या है — intermittency (रात को सौर नहीं, हवा न चले तो पवन नहीं)। BESS इस समस्या का समाधान है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भादला BESS प्रोजेक्ट | 680 MW की grid capacity का रात्रि उपयोग |
| उद्देश्य | दिन की अतिरिक्त सौर ऊर्जा को रात भंडारित करना |
| वर्तमान स्थिति | EOI (Expression of Interest) जारी — 2026 |
| महत्व | 24×7 हरित ऊर्जा आपूर्ति संभव होगी |
💡 BESS क्यों जरूरी? राजस्थान में 42 GW सौर क्षमता है, लेकिन रात में उत्पादन शून्य है। BESS से रात को भी Solar energy मिलेगी।
(C) एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 (ICEP-2024) — Master Plan
यह राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी ऊर्जा नीति है।
| लक्ष्य | विवरण |
|---|---|
| कुल नवीकरणीय लक्ष्य | 125 GW तक 2029-30 |
| सौर ऊर्जा लक्ष्य | 90 GW |
| पवन + हाइब्रिड लक्ष्य | 25 GW |
| हाइड्रो + BESS लक्ष्य | 10 GW |
| राष्ट्रीय लक्ष्य योगदान | भारत के 500 GW लक्ष्य में सहयोग |
| Green Energy Cities | जिला मुख्यालयों को “हरित ऊर्जा शहर” बनाना |
9. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| रूट | जैसलमेर → बाड़मेर → जोधपुर |
| उद्देश्य | सौर-पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना |
| महत्व | Transmission losses कम करना, ऊर्जा निर्यात बढ़ाना |
10. सामाजिक कल्याण से जुड़ी ऊर्जा योजनाएं
| योजना | विवरण | अद्यतन |
|---|---|---|
| मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना | घरेलू उपभोक्ता: 150 यूनिट/माह मुफ्त | (2025-26 Green Budget में 100→150 यूनिट किया) |
| किसानों के लिए | 2000 यूनिट/वर्ष तक मुफ्त | — |
| PM Surya Ghar | Rooftop Solar — 300 यूनिट/माह मुफ्त | 2024 में लॉन्च |
| सौभाग्य योजना | शत-प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण | ✅ पूर्ण |
| DDUGJY | कृषि और घरेलू फीडर अलग | ✅ पूर्ण |
| PM-KUSUM | किसानों को सोलर पंप + भूमि किराया आय | राजस्थान प्रथम |
| Vibrant Village Programme-II | 184 सीमावर्ती गांवों में On-Grid Electrification | नया 2025-26 |
11. निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः, राजस्थान ने ऊर्जा के क्षेत्र में जो यात्रा 1947 में 13.27 मेगावाट से शुरू की थी, वह जून 2026 में ~60,000 मेगावाट (~60 GW) तक पहुँच गई है — यह 4,500 गुना से अधिक की वृद्धि है।
राज्य ने अपनी प्राकृतिक चुनौतियों — मरुस्थल और पानी की कमी — को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति — 42 GW सौर ऊर्जा (देश में प्रथम) — में बदल दिया है।
- ⚡ सूरतगढ़ और छाबड़ा — बेस लोड संभाल रहे हैं
- ☀️ भादला — विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क
- ⚛️ RAPP यूनिट 7 — 10 फरवरी 2026 को पूर्ण चालू
- 🟢 ग्रीन हाइड्रोजन — अगली ऊर्जा क्रांति की ओर
- 🔋 BESS — 24×7 हरित ऊर्जा का सपना
🏆 राजस्थान — भारत का ‘Power House of India’
ICEP-2024 के तहत 2029-30 तक 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य यह सुनिश्चित करता है कि राजस्थान आने वाले दशक में भारत की ऊर्जा राजधानी बनकर उभरेगा।
📋 Quick Revision — परीक्षा उपयोगी एक नज़र में (June 2026 Updated)
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| RSEB गठन | 1 जुलाई 1957 |
| RSEB विघटन | 19 जुलाई 2000 |
| RERC स्थापना | 2 जनवरी 2000 |
| RUVNL स्थापना | 2015 |
| कुल स्थापित क्षमता (मार्च 2026) | ~60 GW |
| सौर क्षमता (मई 2026) | 42.17 GW — भारत में #1 |
| पवन क्षमता | ~5.2 GW |
| FY2022 से FY2026 RE वृद्धि | 17 GW → 46 GW (270%+) |
| राजस्थान का प्रथम सुपर थर्मल प्लांट | सूरतगढ़ (SSTPS) — 2820 MW |
| राज्य का सबसे बड़ा थर्मल प्लांट | सूरतगढ़ (2820 MW) |
| प्रथम सुपर क्रिटिकल तकनीक | छाबड़ा (CTPP) — 2320 MW |
| परमाणु संयंत्र | RAPP, रावतभाटा (1973) |
| RAPP यूनिट 7 | 700 MW — 10 फरवरी 2026 से पूर्ण चालू |
| RAPP यूनिट 8 | 700 MW — 2026 Commissioning |
| RAPP कुल क्षमता (7 इकाई) | ~1880 MW |
| विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क | भादला, जोधपुर (2245 MW) |
| भादला नई BESS परियोजना | 680 MW — EOI 2026 |
| प्रथम सौर नीति वाला राज्य | राजस्थान (2011) |
| ICEP-2024 लक्ष्य | 125 GW by 2029-30 |
| ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य | 2000 KTPA by 2030 |
| PM-KUSUM में प्रथम | राजस्थान |
| प्रथम पवन संयंत्र | अमर सागर, जैसलमेर (1999) |
| प्रथम बायोमास संयंत्र | पदमपुर (श्रीगंगानगर) |
| प्रथम गैस संयंत्र | रामगढ़ (जैसलमेर) |
| प्रथम सौर फ्रिज | बालेसर (जोधपुर) |
| सौर ऊर्जा क्षमता (Potential) | 142 GW+ (देश में प्रथम) |
| SEEZ जिले | जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर |
| निःशुल्क बिजली (घरेलू) | 150 यूनिट/माह (2025-26 से) |
| बांसवाड़ा परमाणु प्रस्ताव | 700 × 4 = 2800 MW (प्रस्तावित) |

















