मेवाड़ का गुहिल वंश — Part 2

📚 परीक्षा उपयोगिता: इस Part में चित्तौड़ का प्रथम साका (1303 ई.) — जो राजस्थान इतिहास का सर्वाधिक परीक्षोपयोगी topic है — का विस्तृत वर्णन है। RPSC RAS, SI, Patwari, REET सभी परीक्षाओं में इससे प्रश्न अवश्य आते हैं।
Table of Contents

1. रावल तेजसिंह (1253–1273 ई.)

रावल जैत्रसिंह के पश्चात उनके पुत्र रावल तेजसिंह मेवाड़ की गद्दी पर आसीन हुए। यद्यपि उनका शासनकाल अपेक्षाकृत संघर्षपूर्ण रहा, तथापि साहित्यिक एवं कलात्मक दृष्टि से यह काल महत्वपूर्ण था।

तेजसिंह — प्रमुख तथ्य सारणी

विवरणतथ्य
शासनकाल1253–1273 ई.
पितारावल जैत्रसिंह
धारण की गई उपाधियाँपरमभट्टारक, महाराजाधिराज, परमेश्वर
वैवाहिक सम्बन्धपत्नी जयतल्लदेवी (सोनगरा चौहान उदयसिंह की पुत्री रूपादेवी)
दिल्ली आक्रमणसुल्तान गयासुद्दीन बलबन का आक्रमण — सफलता नहीं
मंदिर निर्माणरानी जयतल्लदेवी ने चित्तौड़ में श्याम पार्श्वनाथ मंदिर बनवाया
साहित्यिक योगदान‘श्रावक प्रतिक्रमणसूत्रचूर्णि’ ग्रंथ का चित्रण
उत्तराधिकारीपुत्र समरसिंह

💡 परीक्षा बिंदु: तेजसिंह की उपाधियाँ — “परम-महा-परम” = परमभट्टारक + महाराजाधिराज + परमेश्वर।


‘श्रावक प्रतिक्रमणसूत्रचूर्णि’ — महत्व

यह ग्रंथ तेजसिंह के काल की कलात्मक और साहित्यिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। इसका चित्रण उस युग की चित्रकला परम्परा को भी प्रमाणित करता है।


👑 2. रावल समरसिंह (1273–1302 ई.)

तेजसिंह के पश्चात उनके पुत्र रावल समरसिंह मेवाड़ के शासक बने।

समरसिंह — प्रमुख तथ्य

विवरणतथ्य
शासनकाल1273–1302 ई.
उल्लेखनीय कार्यतुर्कों को गुजरात से खदेड़कर गुजरात का उद्धार किया
महत्वपूर्ण स्रोतचित्तौड़ प्रशस्ति — गुहिल वंश की शाखाओं की जानकारी का प्रमुख स्रोत
दो पुत्ररतनसिंह (मेवाड़ शासक) + कुंभकर्ण (नेपाल में राजवंश स्थापित)

💡 परीक्षा बिंदु: “नेपाल में राजवंश किस गुहिल के वंशज ने स्थापित किया?” — कुंभकर्ण (समरसिंह का पुत्र)।


🏰 3. रावल रतनसिंह (1302–1303 ई.) — रावल शाखा के अंतिम शासक

रावल रतनसिंह रावल शाखा के अंतिम और सर्वाधिक त्रासदीपूर्ण शासक थे। उनके शासनकाल की सबसे निर्णायक घटना थी — अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ आक्रमण और प्रथम साका।

रतनसिंह — प्रमुख तथ्य

विवरणतथ्य
शासनकाललगभग 1302–1303 ई.
पितारावल समरसिंह
शाखारावल शाखा (गुहिल वंश की मुख्य शाखा)
स्थानरावल शाखा के अंतिम शासक
प्रमुख घटना1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ आक्रमण
सेनापतिगोरा (रानी पद्मिनी के चाचा) + बादल (रानी के भाई)

⚔️ 4. चित्तौड़ का प्रथम साका — 1303 ई. (अत्यंत परीक्षोपयोगी)

यह राजस्थान इतिहास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण और अक्सर पूछी जाने वाली घटना है। इसे ‘चित्तौड़ का प्रथम साका’ कहा जाता है।


4.1 आक्रमण का कारण — बहुआयामी दृष्टिकोण

चित्तौड़ पर अलाउद्दीन के आक्रमण के कारणों को लेकर दो प्रमुख मत हैं:

(A) ऐतिहासिक/राजनीतिक कारण (वास्तविक कारण)

  1. सामरिक महत्व: मालवा, गुजरात और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग चित्तौड़ से होकर गुजरते थे।
  2. व्यापारिक नियंत्रण: चित्तौड़ पर नियंत्रण = गुजरात-दक्षिण के व्यापार पर नियंत्रण।
  3. साम्राज्यवादी विस्तार: अलाउद्दीन की समग्र विजय नीति का हिस्सा।
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(B) साहित्यिक कारण — पद्मावत (1540 ई.)

विवरणतथ्य
लेखकमलिक मुहम्मद जायसी
ग्रंथ‘पद्मावत’ (1540 ई. में रचित)
रचनाकालशेरशाह सूरी के शासनकाल में
बताया गया कारणरावल रतनसिंह की सुंदर पत्नी रानी पद्मिनी को प्राप्त करने की लालसा
इतिहासकार का मतदशरथ शर्मा ने भी इस कारण को मान्यता दी
वास्तविकताघटना 1303 की है, ग्रंथ 1540 में लिखा — 237 वर्ष बाद!

⚠️ परीक्षा ट्रिक: “जायसी की पद्मावत = 1540 में लिखी गई; घटना = 1303 की” — इसलिए यह काल्पनिक माना जाता है।


4.2 आक्रमण का कालक्रम — Step by Step

28 जनवरी 1303

अलाउद्दीन खिलजी विशाल सेना के साथ दिल्ली से रवाना

शाही शिविर — गंभीरी और बेड़च नदियों के मध्य (चित्तौड़गढ़ के निकट)
[अमीर खुसरो का विवरण]

अलाउद्दीन का व्यक्तिगत शिविर — 'चित्तौड़ी' नामक पहाड़ी पर

8 माह की लंबी घेराबंदी

किले में रसद सामग्री समाप्त

26 अगस्त 1303 (सोमवार) — द्वार खुले

गोरा-बादल के नेतृत्व में केसरिया — शत्रु पर आक्रमण → वीरगति

लगभग 1600 स्त्रियों का जौहर — रानी पद्मिनी के नेतृत्व में

रावल रतनसिंह वीरगति को प्राप्त

अलाउद्दीन खिलजी की विजय → कत्लेआम का आदेश

4.3 प्रथम साका — विस्तृत विवरण

(i) घेराबंदी की अवधि

  • 28 जनवरी 1303 को दिल्ली से रवाना हुआ।
  • 26 अगस्त 1303 को चित्तौड़ पर विजय।
  • कुल अवधि: छः महीने और सात दिन।
  • अमीर खुसरो ने इस घेराबंदी का विस्तृत विवरण लिखा है।

(ii) गोरा और बादल — वीरता की अमर गाथा

व्यक्तिरानी पद्मिनी से सम्बन्धभूमिका
गोरारानी पद्मिनी के चाचाकेसरिया धारण कर शत्रु पर आक्रमण
बादलरानी पद्मिनी के भाईगोरा के साथ वीरगति

💡 परीक्षा ट्रिक: “गोरा = चाचा; बादल = भाई” — यह अक्सर Match-the-Column में पूछा जाता है।

(iii) जौहर — प्रथम साका की परिभाषा

  • जौहर: युद्ध में पराजय निश्चित होने पर वीरांगनाओं का अग्नि में आत्मदाह — शत्रु के हाथों अपमान से बचने के लिए।
  • केसरिया: पुरुषों का भगवा वस्त्र धारण कर युद्धभूमि में लड़ते हुए वीरगति प्राप्त करना।
  • साका = जौहर + केसरिया — दोनों एक साथ हों तो ‘साका’ कहलाता है।
  • इस प्रथम साके में लगभग 1600 स्त्रियों ने रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर किया।
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4.4 अलाउद्दीन की विजय के बाद — चित्तौड़ में परिवर्तन

घटनाविवरण
26 अगस्त 1303अलाउद्दीन की विजय + कत्लेआम का आदेश
चित्तौड़ का नाम बदला‘खिज्राबाद’ — अपने पुत्र खिज्र खां के नाम पर
शासक बनायाअपने पुत्र खिज्र खां को चित्तौड़ का शासन सौंपा
पुल निर्माणखिज्र खां ने गंभीरी नदी पर पुल बनवाया (कुछ शिलालेख चुनवाए)
मकबरा निर्माणतलहटी के बाहर मकबरा — 1310 ई. का फारसी लेख (अलाउद्दीन को ‘उस समय का सूर्य’, ‘ईश्वर की छाया’ कहा)
1316 ई. मेंअलाउद्दीन की मृत्यु के बाद खिज्र खां ने मालदेव चौहान (सोनगरा) को चित्तौड़ का कार्यभार सौंपा

4.5 ‘पद्मावत’ और ऐतिहासिक महत्व

मलिक मुहम्मद जायसी

'पद्मावत' महाकाव्य (1540 ई.)

रानी पद्मिनी की सुंदरता = अलाउद्दीन के आक्रमण का कारण (साहित्यिक कथा)

वास्तविक घटना: 1303 ई.

पद्मावत लिखी गई: 1540 ई. (शेरशाह सूरी काल)

अंतर: 237 वर्ष!

निष्कर्ष: मूल रूप से अलाउद्दीन का उद्देश्य = साम्राज्यवादी विस्तार

🦁 5. राणा हम्मीर (1326/1335–1364 ई.) — सिसोदिया वंश का प्रथम महाराणा

5.1 पृष्ठभूमि — रावल शाखा का अंत और राणा शाखा का उदय

1303 ई. में रावल रतनसिंह की वीरगति के साथ रावल शाखा का सम्पूर्ण अंत हो गया। अब सीसोदा के जागीरदार — राणा शाखा के वंशज — मेवाड़ के शासन में आए।


5.2 चित्तौड़ पर अधिकार — दो मत

राणा हम्मीर ने किसे पराजित कर चित्तौड़ जीता — इस पर दो मत हैं:

इतिहासकारमत
डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझामालदेव सोनगरा के पुत्र जयसिंह (जैसा) चौहान को पराजित कर चित्तौड़ जीता
रणकपुर प्रशस्तिमालदेव चौहान के पुत्र बनवीर चौहान को पराजित कर चित्तौड़ जीता

5.3 चित्तौड़ विजय की तिथि — विवाद

यह एक महत्वपूर्ण विवाद है जो परीक्षाओं में पूछा जाता है:

इतिहासकारतिथिआधार
डॉ. ओझालगभग 1326 ई.अनुमान (करेड़ा शिलालेख प्राप्त नहीं था)
रामवल्लभ सोमानी1335 ई. के पश्चातकरेड़ा का जैन मंदिर शिलालेख (1335 ई.)

करेड़ा के शिलालेख का महत्व:

  • 1335 ई. के इस शिलालेख में उस समय चित्तौड़ पर पृथ्वीचंद्र का शासन बताया गया है।
  • पृथ्वीचंद्र = बनवीर का अन्य नाम या सोनगरा परिवार का सदस्य।
  • इसलिए सोमानी जी के अनुसार, हम्मीर ने चित्तौड़ 1335 ई. के बाद जीता।

💡 परीक्षा ट्रिक: “करेड़ा शिलालेख (1335) → सोमानी → 1335 के बाद; ओझा → 1326” — दोनों तिथियाँ याद रखें।


5.4 ‘महाराणा’ और ‘सिसोदिया’ — नामकरण परम्परा

🔑 अत्यंत महत्वपूर्ण: राणा हम्मीर की चित्तौड़ विजय के पश्चात:

  • मेवाड़ के शासक ‘महाराणा’ अथवा ‘राणा’ कहलाने लगे।
  • उनका वंश ‘सिसोदिया’ कहलाने लगा (सीसोदा ग्राम के कारण)।
  • यह परिवर्तन ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

5.5 राणा हम्मीर के बारे में इतिहासकारों के उद्गार

स्रोत/इतिहासकारउद्गार
कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति (चित्तौड़गढ़)हम्मीर सिसोदिया = ‘विषम घाटी पंचानन’ (विकट परिस्थितियों में सिंह के समान)
कर्नल जेम्स टॉडहम्मीर सिसोदिया = ‘उस समय का प्रबल हिन्दू शासक’
रसिकप्रिया की टीका (कुम्भा रचित)हम्मीर = ‘वीर राजा’

5.6 राणा हम्मीर की प्रमुख उपलब्धियाँ

(i) चित्तौड़गढ़ में अन्नपूर्णा माता मंदिर निर्माण

  • मोकलजी के शिलालेख में इसका उल्लेख मिलता है।
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(ii) सिंगोली का युद्ध (बांसवाड़ा)

  • दिल्ली सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने राणा हम्मीर के समय मेवाड़ पर आक्रमण किया।
  • यह युद्ध ‘सिंगोली का युद्ध’ (बांसवाड़ा) कहलाता है।
  • हम्मीर इस युद्ध में विजयी हुए — एक दिल्ली सुल्तान को पराजित करना महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।

💡 परीक्षा बिंदु: “सिंगोली का युद्ध” → मुहम्मद बिन तुगलक vs राणा हम्मीर → हम्मीर विजयी।

(iii) सिसोदिया वंश की स्थापना

  • राणा हम्मीर ने अपनी विजय से मेवाड़ के सिसोदिया युग की नींव रखी।
  • यह युग महाराणा प्रताप तक अटूट वीरता का प्रतीक बना।

5.7 राणा हम्मीर — त्वरित तथ्य सारणी

विवरणतथ्य
शासनकाल1326/1335–1364 ई.
पिताराणा अरिसिंह (सीसोदा शाखा)
चित्तौड़ विजयमालदेव/बनवीर चौहान को पराजित कर
युद्धसिंगोली का युद्ध — मुहम्मद बिन तुगलक से (विजय)
मंदिरचित्तौड़गढ़ में अन्नपूर्णा माता मंदिर
उपाधि/विशेषण‘विषम घाटी पंचानन’ (कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति)
महत्वसिसोदिया वंश का प्रथम महाराणा
उत्तराधिकारीपुत्र क्षेत्रसिंह (महाराणा खेता)

📊 Part 2 की समग्र Timeline — एक दृष्टि में

तेजसिंह (1253-1273)
↓ पाशुपत + श्याम पार्श्वनाथ मंदिर + परमभट्टारक
समरसिंह (1273-1302)
↓ गुजरात से तुर्क खदेड़े | चित्तौड़ प्रशस्ति
रावल रतनसिंह (1302-1303) ← रावल शाखा का अंतिम शासक

🔴 1303 — चित्तौड़ का प्रथम साका
→ अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण
→ गोरा-बादल की वीरगति (केसरिया)
→ 1600 महिलाओं का जौहर — रानी पद्मिनी के नेतृत्व में
→ रतनसिंह की वीरगति
→ चित्तौड़ = 'खिज्राबाद'

राणा हम्मीर (1326/1335-1364) ← सिसोदिया वंश का प्रथम शासक
↓ सिंगोली युद्ध | अन्नपूर्णा मंदिर | 'विषम घाटी पंचानन'

📝 विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

Q1. चित्तौड़ का प्रथम साका कब हुआ था?

  • (A) 1301 ई. (B) 1303 ई. ✓ (C) 1534 ई. (D) 1568 ई.

व्याख्या: 1303 = प्रथम; 1534 = द्वितीय (बहादुरशाह); 1568 = तृतीय (अकबर) — तीनों याद रखें।

Q2. अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण (1303) का समकालीन विवरण किसने लिखा?

  • (A) फरिश्ता (B) मलिक मुहम्मद जायसी (C) अमीर खुसरो ✓ (D) बदायूँनी

व्याख्या: अमीर खुसरो अलाउद्दीन का दरबारी कवि था और इस अभियान में साथ था।

Q3. ‘पद्मावत’ महाकाव्य किसने और किस वर्ष लिखा?

  • (A) अमीर खुसरो, 1303 (B) मलिक मुहम्मद जायसी, 1540 ✓ (C) फरिश्ता, 1400 (D) अबुल फजल, 1590

Q4. प्रथम साके में रानी पद्मिनी के चाचा और भाई कौन थे?

  • (A) चाचा = बादल, भाई = गोरा
  • (B) चाचा = गोरा, भाई = बादल ✓
  • (C) दोनों भाई थे
  • (D) दोनों चाचा थे

Q5. अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ जीतकर उसका नया नाम क्या रखा?

  • (A) मुहम्मदाबाद (B) सुल्तानपुर (C) खिज्राबाद ✓ (D) अलाउद्दीनपुर

व्याख्या: अपने पुत्र खिज्र खां के नाम पर।

Q6. प्रथम साके में कितनी स्त्रियों ने जौहर किया था?

  • (A) 800 (B) 1000 (C) लगभग 1600 ✓ (D) 2000

Q7. ‘साका’ से क्या तात्पर्य है?

  • (A) केवल जौहर
  • (B) केवल केसरिया
  • (C) जौहर + केसरिया — दोनों एक साथ ✓
  • (D) संधि

Q8. सिंगोली का युद्ध किनके बीच हुआ था?

  • (A) अलाउद्दीन vs जैत्रसिंह
  • (B) मुहम्मद बिन तुगलक vs राणा हम्मीर ✓
  • (C) बलबन vs तेजसिंह
  • (D) इल्तुतमिश vs रतनसिंह

Q9. कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति में हम्मीर सिसोदिया को क्या कहा गया है?

  • (A) वीर राजा (B) सूर्यवंशी (C) विषम घाटी पंचानन ✓ (D) हिन्दू सूर्य

Q10. मेवाड़ के शासक ‘महाराणा’ और उनका वंश ‘सिसोदिया’ किसकी विजय के बाद कहलाया?

  • (A) बप्पा रावल (B) जैत्रसिंह (C) राणा हम्मीर ✓ (D) रतनसिंह

Q11. ‘करेड़ा के जैन मंदिर शिलालेख’ (1335 ई.) के आधार पर किस इतिहासकार ने राणा हम्मीर की चित्तौड़ विजय की तिथि 1335 के बाद मानी?

  • (A) डॉ. ओझा (B) रामवल्लभ सोमानी ✓ (C) कर्नल टॉड (D) दशरथ शर्मा

Q12. प्रथम साके में अलाउद्दीन ने अपना शिविर किस पहाड़ी पर लगाया था?

  • (A) गंभीरी पहाड़ी (B) बेड़च पहाड़ी (C) चित्तौड़ी पहाड़ी ✓ (D) माचिया पहाड़ी

Q13. तेजसिंह की पत्नी जयतल्लदेवी ने चित्तौड़ में कौन-सा मंदिर बनवाया?

  • (A) एकलिंगजी (B) श्याम पार्श्वनाथ ✓ (C) अन्नपूर्णा (D) कालिका

Q14. ‘नेपाल में एक शाही वंश की स्थापना’ किस गुहिल ने की थी?

  • (A) रतनसिंह (B) कुंभकर्ण ✓ (C) समरसिंह (D) तेजसिंह

व्याख्या: कुंभकर्ण, रावल समरसिंह का पुत्र था।

🗝️ Part 2 — स्मरणीय संकेत (Memory Tricks)

विषयट्रिक
तेजसिंह की 3 उपाधियाँ“परम-महा-परम” = परमभट्टारक + महाराजाधिराज + परमेश्वर
प्रथम साका = 1303“तेरह सौ तीन में पहला साका”
गोरा-बादल“चा-भाई” = चाचा (गोरा) + भाई (बादल)
खिज्राबाद“खिज्र खां के नाम पर खिज्राबाद”
पद्मावत = 1540“जायसी ने 1540 में — 237 साल बाद लिखा”
सिंगोली = हम्मीर जीते“हम्मीर ने तुगलक को सिंगोली में लिया”
सिसोदिया = हम्मीर से“हम्मीर = Sisodiya का पहला रत्न”
‘विषम घाटी पंचानन’“हम्मीर = मुश्किल समय का शेर”

📚 Quick Revision Box — Part 2

तेजसिंह (1253-73): परमभट्टारक | बलबन का आक्रमण (असफल) | श्याम पार्श्वनाथ मंदिर
समरसिंह (1273-1302): गुजरात से तुर्क खदेड़े | चित्तौड़ प्रशस्ति | 2 पुत्र: रतनसिंह + कुंभकर्ण (नेपाल)

🔴 1303 — चित्तौड़ का प्रथम साका
→ अलाउद्दीन खिलजी | 8 माह घेराबंदी | 26 अगस्त 1303
→ गोरा (चाचा) + बादल (भाई) = केसरिया
→ 1600 स्त्रियाँ = जौहर (रानी पद्मिनी नेतृत्व)
→ रतनसिंह = वीरगति | खिज्राबाद = नया नाम
→ पद्मावत (जायसी, 1540) — 237 साल बाद

राणा हम्मीर (1326/1335-1364):
→ सिसोदिया वंश का प्रथम महाराणा
→ सिंगोली युद्ध — तुगलक परास्त
→ 'विषम घाटी पंचानन' (कीर्तिस्तम्भ)
→ अन्नपूर्णा माता मंदिर | उत्तराधिकारी: क्षेत्रसिंह
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