धारा 342-344 BNS बनाम धारा 489A-489D IPC: करेंसी नोटों (Currency-notes) या बैंक नोटों का कूटकरण
सजा (Punishment)
आजीवन कारावास / 10 वर्ष / 7 वर्ष
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय (Non-Compoundable)
विचारणीय न्यायालय (Court)
सेशन कोर्ट (-489A,B,D) / प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (-489C)
IPC (पुराना कानून)
धारा 489A-489D
BNS (नया कानून)
धारा 342, 343, 344
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
जाली नोट छापना (Fake Currency)! (Counterfeit Notes)। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने का सबसे बड़ा हथियार जाली नोट है। अगर कोई 'नकली 2000 या 500 के नोट' छापता है (489A), उन्हें बाज़ार में चलाता है (489B), या जाली नोट छापने वाली 'इंक या प्रिंटिंग मशीन (Machinery)' रखता है (489D)। तो इन सभी मामलों में सीधे उम्रकैद (Life) या 10 साल की कठोर जेल है (BNS 342/343)। अगर किसी के 'बटुए (Wallet)' में जानबूझकर जाली नोट रखे (Possession) मिलें (489C / BNS 344), तो 7 साल की जेल हो सकती है।
तुलना
National Security: Fake Indian Currency Notes (FICN / जाली नोट) का मामला ‘राष्ट्रविरोधी’ श्रेणी में आता है। BNS में इन सभी गंभीर अपराधों को 342, 343 और 344 में पहले की तरह उम्रकैद के सख्त दंड के साथ रखा गया है।